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यूपी: जांच के नाम पर हो रही 'करोड़ों की मीटिंग'

Fri, 28 Jun 2013 04:12 PM IST
लखनऊ/इंटरनेट डेस्क
लखनऊ/इंटरनेट डेस्क Updated Fri, 28 Jun 2013 04:12 PM IST
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its all about money in national rural health mission

अरबों रुपये के घोटालों की जांच झेल रहे राष्ट्रीय ग्रामीण स्वास्थ्य मिशन (एनआरएचएम) के अधिकारी अब भी राष्ट्रीय कार्यक्रमों की मॉनिटरिंग में लापरवाही कर रहे हैं। करोड़ों रुपये समीक्षा बैठकों में खर्च करने वाले एनआरएचएम के अधिकारियों के पास राष्ट्रीय कार्यक्रमों की देखरेख के लिए कोई कार्य योजना नहीं है।

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यह है महज बानगी
अक्टूबर 2011 में 23 करोड़ रुपये का बजट पूर्वांचल के नौ जिला चिकित्सालयों में वेंटीलेटर यूनिट लगाने के लिए जारी हुआ, लेकिन इस रकम का क्या इस्तेमाल हुआ, इसकी तरफ न तो मिशन निदेशक ने ध्यान दिया और न ही मॉनिटरिंग और इवैल्युएशन सेल ने।
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नौ बार हुआ टेंडर, पर नहीं बनी यूनिट
जनवरी 2012 से लेकर अब तक नौ बार टेंडर हुआ पर यूनिट नहीं बन पाई। जेई (जापानी इंसेफलाइटिस) और एईएस से बच्चे जान गंवाते रहे। एनआरएचएम स्वास्थ्य सेवाओं को सुदृढ़ करने और उसकी देख रेख में कितना संजीदा है, यह बताने के लिए एक ही उदाहरण काफी है। विभाग ने मॉनिटरिंग एंड इवैल्युएशन सेल बना रखा है लेकिन यह कैसे कार्य करता है, जानकारी देने वाला कोई अधिकारी नहीं है।
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कर्मचारियों की लंबी फौज, काम जीरो

सूत्रों की मानें तो कार्यक्रमों की मॉनिटरिंग के लिए कर्मचारियों की लंबी फौज खड़ी की गई, लेकिन वे जिलों में जाकर जांच कैसे करेंगे, किस बजट से करेंगे, इसका कोई खाका ही तैयार नहीं है। जबकि एनआरएचएम की स्थापना का उद्देश्य ही स्वास्थ्य सेवाओं के सुधार के लिए नई योजनाएं बनाना, उसे सही ढंग से लागू कराना और पूरे कार्यक्रम की मॉनिटरिंग कर उसकी रिपोर्ट केंद्र को सौंपना था।

बजट खपाने के लिए हो रहा खेल
करोड़ों का बजट खपाने के चक्कर में अधिकारियों ने मॉनिटरिंग को ताक पर रख दिया। सिर्फ बजट जारी कर ही अपने कर्तव्यों की इतिश्री कर ली। महाप्रबंधक हो या फिर प्रबंधक स्तर का अधिकारी सभी ने बड़े-बड़े होटलों में बैठकर समीक्षा कर ली।


नहीं लग सका एक अदद वेंटिलेटर
जमीनी सच्चाई सेे कोई भी रूबरू नहीं हुआ। इसका नतीजा यह हुआ कि आज तक जापानी इंसेफलाइटिस से जूझ रहे पूर्वांचल के जिलों में वेंटीलेटर यूनिट स्थापित नहीं हो पायी है। वहीं, इस मामले में जब मॉनिटरिंग एंड इवैल्युएशन सेल की डीजीएम डॉ. ऊषा गंगवार से पूछा गया तो उन्होंने कुछ भी बताने से मना कर दिया। कहा, इस प्रकोष्ठ का गठन पिछले साल ही हुआ है। मॉनीटरिंग के लिए समीक्षा बैठकें होती रहती हैं।

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