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'जब आरुषि का हो रहा था संस्कार, तब मिट रहे थे सबूत'
गाजियाबाद/ब्यूरो
Updated Fri, 19 Apr 2013 01:07 AM IST
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आरुषि-हेमराज मर्डर केस के मुख्य जांच अधिकारी सीबीआई एएसपी एजीएल कौल से डिफेंस की जिरह दूसरे दिन भी जारी रही।
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डिफेंस के सवाल का जवाब देते हुए कौल ने कहा कि जब मुझे विवेचना मिली थी, तब तक क्राइम सीन डिस्टर्ब हो चुका था।
मकान में परिवर्तन किया जा चुका था। ऐसा कोई रिकार्ड नहीं है और न ही किसी गवाह ने बताया है कि नोएडा पुलिस की उपस्थिति में मुलजिमों ने मकान संख्या एल-32 की सफाई 16 मई 2008 को कराई थी।
सेक्टर-20 थाने की एसआई सुनीता राणा ने सीबीआई के सहविवेचक मुकेश शर्मा को यह बयान दिया था कि मैने देखा कि जब आरुषि की लाश को दाह संस्कार के लिए लेकर गए थे, तब शायद एक आदमी झाडू लेकर ऊपर गया था तथा कुछ लोग चादर में बांधकर कुछ सामान फेंकने गए थे।
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चादर में से पानी टपक रहा था। मैने ऊपर जाकर देखा तो ड्राइंग रूम में काफी पानी भरा था और 2-3 लेडीज टावेल से पानी साफ कर रही थीं। इनके साथ एक जेंटस भी था। इसके बाद महिला दरोगा वापस आ गई।
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गवाह ने कहा कि तलवार दंपति और आरुषि के कमरे के बीच की जो दीवार थी, वह पक्की थी। उसमें एक जगह पहले दरवाजा लगा हुआ था।
उस दरवाजे के ऊपर दोनों ओर प्लाई लगा दी गई थी। यह प्लाई बीच की पूरी दीवार के ऊपर दोनों ओर लगी थी।
उसे ठोककर देखा तो वह हिस्सा खोखला लग रहा था। डिफेंस के सवाल पर गवाह ने यह भी कहा कि आरुषि के मोबाइल से की गई कॉल्स का विवरण मैने टेलीफोन कंपनी से प्राप्त नहीं किया था। न ही इस संबंध में कोई रिकार्ड पत्रावली में है।
आरुषि के मोबाइल की शिनाख्त कार्रवाई कुसुम अथवा मुल्जिमान से किसी मजिस्ट्रेट के समक्ष नहीं कराई गई। मैने आइडिया कंपनी से यह भी पता नहीं किया कि घटना वाली रात के बाद आरुषि का मोबाइल पहली बार कब चालू हुआ था।
यह कहना गलत है कि मैने अंतिम रिपोर्ट के पेज-28 पर यह गलत लिखा हो कि मुल्जिमान ने आरुषि के मोबाइल का डेटा समाप्त कर दिया हो।
डिफेंस ने गवाह को एक फोटो दिखाकर सवाल पूछा तो उसका कहना था कि मकान की छत में ग्रिल के ऊपर जो चादर रखी गई थी, वह फोटो में दिखाई गई है। मैंने मुल्जिमान से इसे मांगा था, लेकिन उन्होंने कहा था कि उनके पास चादर नहीं है।
यह बात सही है कि जिस दिन चादर का फोटो लिया गया, उस दिन यह चादर मौजूद थी, लेकिन उस दिन उसे सीज नहीं किया गया था।