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क्या प्रियंका गांधी के मिशन से घबराने लगी हैं बसपा प्रमुख मायावती?

शशिधर पाठक, अमर उजाला, नई दिल्ली Updated Fri, 22 May 2020 09:33 PM IST
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मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, मायावती, प्रियंका गांधी
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, मायावती, प्रियंका गांधी - फोटो : अमर उजाला (फाइल)
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सार

  • प्रवासी गरीब मजदूरों से जुड़ा मुद्दा होना हो सकता है कारण
  • प्रियंका गांधी की पहले की कोशिशें भी ला सकती हैं रंग
  • आखिर मायावती अचानक इतनी उतावली क्यों हुई?

विस्तार

सत्ता से दूरी, बसपा के संगठन को छोड़ते नेता, राजनीति में कम होता प्रतिनिधित्व जैसी कुछ परिस्थितियों को देख कर लग रहा है कि मायावती विचलित हो रही हैं। मायावती का द्वंद प्रवासी गरीब मजदूरों के अपने घर-गांव जाने के दौरान भी आया।
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मायावती ने गरीब मजदूरों को उनके गांव भेजने में सरकार से उतने आक्रामक तरीके से मांग रखकर मुद्दा नहीं उठाया, जितना कांग्रेस महासचिव प्रियंका के उत्तर प्रदेश सरकार के साथ बढ़े टकराव पर दिखाई पड़ा।
दिलचस्प बात यह है कि राज्य सरकार के अनुरोध पर राजस्थान सरकार की सहायता को लेकर मायावती ने बिना पूरा तथ्य जाने ही कांग्रेस पर खुलकर हमला बोल दिया।
महिला कांग्रेस की अध्यक्ष सुष्मिता देव का कहना है कि वह मायावती की परेशानी समझ सकती हैं। राजस्थान सरकार के एक मंत्री का कहना है कि उत्तर प्रदेश सरकार यदि राजस्थान को होने वाले भुगतान पर कमेंट करे तो वह जवाब देंगे।

लेकिन मायावती की टिप्पणी पर बोलकर वह उन्हें राजनीतिक लाभ नहीं देना चाहते। वहीं बसपा के खेमे से मायावती के सामने आने के बाद उस पर कोई नेता प्रतिक्रिया देने से बचता है।

क्या प्रियंका के मिशन से घबरा रही हैं मायावती?

बसपा और सपा उत्तर प्रदेश में हर मुद्दे पर करीब-करीब मौन रहते हैं। कभी-कभी समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव का बयान आ जाता है।

कुछ महीने में एकाध बार मायावती भी किसी मुद्दे पर बयान देती हैं, लेकिन प्रियंका गांधी वाड्रा लगातार न केवल राज्य का दौरा कर रही हैं, बल्कि राज्य सरकार के कामकाज पर विपक्ष के नेता की तरह सोशल मीडिया से लेकर हर फोरम पर सवाल उठा रही हैं।

प्रियंका गांधी प्रवासी गरीब मजदूरों को उनके घर पहुंचाने का मामला उठाया। सड़क पर चिलचिलाती धूप में परेशान मजदूरों को घर जाते देखकर उत्तर प्रदेश सरकार को 1000 बसों की मदद देने का प्रस्ताव दिया, और सरकार ने इसे स्वीकार भी कर लिया और तीन चार दिन तक ड्रामा चला।

माना जा रहा है कि मजदूरों से जुड़ा मुद्दा होने के कारण मायावती को यह सताने लगा, क्योंकि अधिकांश मजदूर दलित, आदिवासी समुदाय से जुड़े हैं।

मायावती के भड़कने का एक कारण और माना जा रहा है। उत्तर प्रदेश कांग्रेस के अध्यक्ष अजय कुमार लल्लू हैं। प्रियंका गांधी वाड्रा राज्य में अल्पसंख्यक, दलित, आदिवासी समेत कांग्रेस पार्टी के पुराने जनाधार को जोडऩे में लगी हैं।

भीम आर्मी के प्रमुख चंद्रशेखर आजाद उर्फ रावण ने आजाद समाज पार्टी का गठन करके कामकाज तेज कर दिया है। प्रियंका गांधी की टीम लगातार चंद्रशेखर के संपर्क में रहती है।

चंद्रशेखर को देखने भी प्रियंका जा चुकी हैं। बताते हैं इस तरह की तमाम आशंकाओं ने मायावती राजनीतिक तकलीफ बढ़ानी शुरू की है। मायावती की चिंता का एक स्वाभाविक कारण और भी है।

प्रियंका गांधी वाड्रा भी महिला हैं। अभी मायावती से उम्र में कम लेकिन में राजनीति करना जानती हैं।

क्या है राजस्थान सरकारों को भुगतान का मामला?

यह मामला 17-18 अप्रैल 2020 से जुड़ा है। उत्तर प्रदेश राज्य सड़क परिवहन निगम के प्रबंधन निदेशक डा. राज शेखर ने राजस्थान सड़क परिवहन निगम के प्रबंध निदेशक नवीन जैन को पत्र लिखा था।

इसमें उ.प्र. राज्य सड़क परिवहन निदेशक ने सरकार के आदेश का हवाला देते हुए कोटा में उत्तर प्रदेश की बसों को डीजल उपलब्ध कराने और उसका भुगतान उत्तर प्रदेश सरकार से किए जाने का आग्रह किया था।



यह बसें कोटा में कोविड-19 संक्रमण के बाद लॉकडाउन में फंसे छात्रों को आगरा, झांसी ले आने के लिए भेजी जानी थीं। 18 अप्रैल को उत्तर प्रदेश राज्य सड़क परिवहन निगम के प्रबंधक ने कोटा में 75 बसों की आवश्यकता बताते हुए सहायता की मांग की और राजस्थान के प्रबंध निदेशक ने अपेक्षित सहायता की।

राजस्थान के अधिकारियों का कहना है कि दो अधिकारियों के बीच में हुए इस सहयोग के भुगतान का मामला है। इसे लोग जानबूझकर राजनीतिक रंग देने की कोशिश कर रहे हैं।

मायावती ने क्या कहा?

बसपा प्रमुख मायावती ने इस पर दोनों राज्य सरकारों को आड़े हाथों लिया। उन्होंने इसे घिनौनी घटना बताते हुए राजस्थान की कांग्रेस सरकार पर हमला बोलते हुए दो ट्वीट किए हैं।
राजस्थान की कांग्रेसी सरकार ने कोटा से 12000 युवक, युवतियों को वापस उनके घर भेजने पर हुए खर्च के रूप में उत्तर प्रदेश सरकार से 36.36 लाख रुपये और देने की जो मांग की है, वह उसकी कंगाली व अमानवीयता को प्रदर्शित करता है। दो पड़ोसी राज्यों के ऐसी घिनौनी राजनीति अब दु:खद।

मायावती का दूसरा ट्वीट कुछ ज्यादा राजनीतिक है। इसमें उन्होंने प्रियंका गांधी पर परोक्ष रुप से हमला किया है। इसमें उन्होंने कहा है कि कांग्रेसी राजस्थान सरकार एक तरफ कोटा से उत्तर प्रदेश के छात्रों को अपनी कुछ बसों से वापस भेजने के लिए मनमाना किराया वसूल रही है तो दूसरी तरफ अब प्रवासी मजदूरों को उत्तर प्रदेश में उनके घर भेजने के लिए बसों की बात करके जो राजनीतिक खेल खेल रही है, यह कितना उचित और कितना मानवीय?

सरकार से सहायता मांगने और प्रस्ताव देने का फर्क समझें मायावती

कांग्रेस पार्टी के एक महासचिव ने कहा कि मायावती के इस ट्वीट पर उन्हें कुछ नहीं बोलना है। मायावती उत्तर प्रदेश की कई बार मुख्यमंत्री रही हैं। उन्हें समझना चाहिए कि यह उत्तर प्रदेश सरकार के परिवहन विभाग ने राजस्थान के परिवहन विभाग से सहायता मांगी थी।

पत्र में भुगतान का प्रस्ताव उत्तर प्रदेश की तरफ है। इसे प्रवासी गरीब मजदूरों को घर भेजने में सहायता देने के प्रस्ताव से जोड़ना कहां से उचित है, मैं नहीं समझता पाता। मायावती का यह ट्वीट ही अपने आप में ही एक बड़ा सवाल है।
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