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असुरक्षित गर्भपात से दम तोड़ रहीं यूपी की महिलाएं

Thu, 18 Jul 2013 07:45 PM IST
अरविंद सिंह
अरविंद सिंह Updated Thu, 18 Jul 2013 07:45 PM IST
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insecure abortion pregnent women die in up

उत्तर प्रदेश में असुरक्षित गर्भपात के चलते पिछले 12 माह में सरकारी अस्पतालों में 1965 महिलाओं ने दम तोड़ दिया है। इनमें 80 प्रतिशत ग्रामीण महिलाएं हैं।

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जननी सुरक्षा योजना के बावजूद यह सिलसिला थम नहीं रहा है। पिछले तीन माह में ही सूबे में 388 गर्भवती महिलाओं की जान चली गई है। इन आंकड़ों में निजी अस्पतालों और ग्रामीण इलाकों के स्वास्थ्य केंद्र शामिल नहीं हैं।
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यदि इनके आंकड़े भी मिला दिए जाएं तो मौतों की संख्या और ज्यादा हो सकती है। एनआरएचएम के हालिया आंकड़े इसकी तस्दीक करते हैं कि अस्पतालों में गर्भपात पर कोई अंकुश नहीं है।
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एनआरएचएम निदेशक ने ऐसी मौतों पर प्रभावी अंकुश लगाने के लिए प्रदेश के सभी मुख्य चिकित्सा अधिकारियों को निर्देश जारी किए हैं और जिला स्तरीय समिति गठित करने का सुझाव दिया है।

निदेशक अमित घोष ने सभी सीएमओ से प्रदेश के सुरक्षित गर्भपात केंद्रों की सूची भी तलब की है। पत्र में उक्त आंकड़ों के साथ जिलों में जननी सुरक्षा योजना की खामियों के प्रति चिंता जताई गई है।

स्वास्थ्य विभाग के पास राज्य में गर्भपात के सिर्फ 25 फीसदी आंकड़े ही मौजूद हैं। प्रदेश में जननी सुरक्षा योजना के तहत गर्भधारण से पूर्व, गर्भधारण, गर्भपात या प्रसव तक महिलाओं के लिए कई योजनाएं चलाई जा रही हैं।

योजना के अनुसार गर्भधारण के दौरान यदि कोई महिला स्वास्थ्य केंद्र पहुंचती है तो उसकी पूरी जानकारी स्वास्थ्य केंद्र को रखनी होती है। प्रसव या गर्भपात भी डॉक्टर की देखरेख में होना जरूरी है, लेकिन ये आंकड़े कुछ और ही बयान कर रहे हैं।

सीबीआई जांच में सामने आया मामला
एनआरएचएम घोटाले की सीबीआई जांच के दौरान जननी सुरक्षा योजना की भी जांच हुई थी। योजना के तहत उन सभी महिलाओं का ब्योरा लिया गया जो किसी भी तरह की जांच के लिए स्वास्थ्य केंद्र पहुंची।

इस दौरान उजागर हुआ कि इलाज के दौरान मरने वाली महिलाओं में बड़ी तादाद उनकी है जो गर्भपात के लिए पहुंचीं। पिछले सत्र में प्रदेश में प्रसव के दौरान 6750 महिलाओं की मौत हुई।

अनचाहे गर्भ से छुटकारे के लिए गर्भपात
प्रदेश में परिवार नियोजन की योजनाओं की असफलता ने असुरक्षित गर्भपात को बढ़ावा दिया है। वरिष्ठ चिकित्साधिकारी और स्त्री रोग विशेषज्ञ डॉ.अल्पना चटर्जी का कहना है कि दो बच्चे के बाद भी परिवार नियोजन के साधन अपनाने वाली महिलाओं की संख्या काफी कम है।


सरकारी आंकड़े कह रहे हैं कि केवल 38 फीसदी महिलाएं परिवार नियोजन के साधन अपना रही हैं। वरिष्ठ चिकित्साधिकारी डॉ. श्वेता अग्रवाल के मुताबिक गर्भपात के दौरान इंफेक्शन होने पर 40 फीसदी मामलों में जान जाने की आशंका होती है।

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