फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   indian railway- vagans reached Basti after 4 years from Visakhapatnam

जब 4 साल बाद खाद लेकर बस्ती पहुंचा मालगाड़ी का वैगन, खुद रेलवे के अधिकारी हुए भौचक्का

Sat, 28 Jul 2018 12:22 PM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Updated Sat, 28 Jul 2018 12:22 PM IST
विज्ञापन
indian railway- vagans reached Basti  after 4 years from Visakhapatnam
चार साल बाद बस्ती पहुंचा रेलवे का खाद लदा वैगन नम्बर 107462।

भारतीय रेल अक्सर अपनी लेटलतीफी के लिए जानी जाती है। लेकिन इसी भारतीय रेल का एक ऐसा मामला सामने आया है जिसने लेटलतीफी के सारे रिकॉर्ड को ध्वस्त कर दिया है। मामला बस्ती जिले का है, जहाँ साल 2014 में खाद लेकर विशाखापट्टनम से चला वैगन 4 साल बाद बुधवार को बस्ती पहुंचा। वैगन के यहां पहुंचते ही अधिकारी व कर्मचारी आश्चर्य में पड़ गए। संबंधित को सूचना दी गई तो हड़कम्प मच गया। इस ट्रेन के वैगन में जो खाद लदी है, उसके संबंध में बताया जा रहा है कि 50 फीसदी खाद प्रयोग लायक नहीं हैं। इस चूक का खामियाजा कौन भुगतेगा, यह तय करना भी अफसरों के लिए चुनौती बन गया है।

विज्ञापन


1400 किलोमीटर की दूरी तय करने में एक वैगन (मालगाड़ी) को चार साल लग गए। बस्ती पहुंचे वैगन को जब चेक किया गया तो पता चला की 2014 में यह वैगन विशाखापटनम से बुक किया गया था। आखिर एक वैगन मालगाड़ी में लगा हुआ कहां-कहां भटकता रहा, इसे लेकर रेलवे के अधिकारी भी भौचक्के हैं। वैगन में करीब 10 लाख रुपए की खाद थी, जो अब किसी काम की नहीं रही। रेलवे से असिस्मेंट बेसिस पर माल को लिया जाएगा।
विज्ञापन


बता दें इण्डियन पोटास कंपनी ने यह खाद लगा वैगन नम्बर 107462 विशाखापटनम पोर्ट से मेसर्स रामचन्द्र गुप्ता बस्ती की दुकान के लिए बुक किया था। वैगन बुक करने के बाद जब कई महीना बीत गए और खाद नहीं पहुंची तो रेलवे को दर्जनों पत्र भी लिखे गए लेकिन कुछ पता नहीं चल सका। पूरे चार साल वैगन पूरे देश में इधर से उधर घूमता रहा। सैकड़ों स्टेशनों से गुजरने के वादजूद रेल विभाग अपने गायब हुए इस वैगन को नहीं ढूंढ पाया। खाद के मालिक का कहना है कि ये रेलवे की बड़ी गलती है। जो रैक 2014 में बुक कराई गई, वह चार साल बाद अब आ रही है। वैगन के मिसिंग होने पर रेलवे को रिमाइंडर दिया गया था लेकिन उस वक्त कोई कार्रवाई नहीं की गई थी।  
विज्ञापन
विज्ञापन


रेलवे पता कराएगा इतने दिन कहां था वैगन
पूर्वोत्तर रेलवे के सीपीआरओ संजय यादव ने बताया कि मालगाड़ी में लगा वैगन कभी-कभार खराबी के चलते काट कर अलग कर दिया जाता है। इस वैगन के साथ भी वैसा ही हुआ होगा। लेकिन बिना जांच के अभी कुछ स्पष्ट नहीं कहा जा सकता। हालांकि साढ़े तीन साल तक वैगन न पहुंचना, हैरानी की बात है। इस लापरवाही की जांच कराई जाएगी। मामले की जांच कराई जाएगी।

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed