Rambhadracharya: स्वामी रामभद्राचार्य ने सुनाए रामायण के चर्चित प्रसंग, कथा सुनने उमड़ी श्रद्धालुओं की भीड़
हाथरस के लाड़पुर में रामभद्राचार्य ने रामकथा में सीता-राम विवाह का वर्णन किया। श्रीरामभद्राचार्यजी ने कहा कि महाकवि तुलसीदास ने राम-सीता विवाह का वर्णन 156 दोहों में किया है। रामकथा सुनने को श्रद्धालुओं की भीड़ पंडाल में दिखी।
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हाथरस के गांव लाड़पुर में चल रही रामकथा में व्यासपीठ से राम-सीता विवाह की कथा का वर्णन किया। इस प्रसंग पर पंडाल में उत्सव मनाया गया। प्रसिद्ध रामकथा मर्मज्ञ रामभद्राचार्य ने रामायण के कई चर्चित प्रसंग सुनाकर श्रद्धालुओं को भाव-विभोर कर दिया। हजारों की भीड़ कथा सुनने उमड़ी। पूरा पंडाल सीताराम की जय-जयकार से गूंजता रहा।
श्रीरामभद्राचार्यजी ने कहा कि महाकवि तुलसीदास ने राम-सीता विवाह का वर्णन 156 दोहों में किया है। उन्होंने कहा कि जब गुरु विश्वामित्र रामजी को लेने आए तो दशरथ ने कहा कि राघव को मैं न दूंगा। विश्वामित्र ने राम को अस्त्र-शस्त्र प्रदान किए। रामभद्राचार्य जी ने सीताजी के पार्वती पूजन की कथा का वर्णन जय जय-जय गिरिराज किशोरी, जय महेश सुख चंद्र चकोरी गीत के माध्यम से किया। विवाह पूर्व स्वयंवर की कथा का वर्णन करते हुए कहा कि दस हजार राजा स्वयंवर में शामिल हुए। इसमें रावण-बाणासुर भी शामिल थे। रामजी 11 वर्ष के लला स्वयंवर में गए। जब धनुष नहीं उठा तो राजा जनक जी दुखी हुए। जनक बोले पृथ्वी को मैं वीर विहीन मानता हूं, इस पर लक्ष्मण क्रोधित हुए।
उन्होंने कहा कि यदि गुरु की आज्ञा हो तो संपूर्ण ब्रह्माड को गेंद की तरह उठा लूं। राघवजी ने इशारे से लक्ष्मण को शांत किया और कहा कि जनकजी ने वीर विहीन कहा, रघुवीर विहीन नहीं, इसलिए हे लक्ष्मण मेरा कोई अपमान नहीं हुआ। तब विश्वामित्र ने कहा, उठउ राम भंजऊ भव चापा, मेटहु तात जनक परितापा। तब रामजी ने धनुष उठाया व छूते ही टूट गया। पुष्प वर्षा होने लगी। सब मंगलमय हो गया। सीताजी ने रामजी के गले में वरमाला पहनाई।
रामभद्राचार्यजी ने भगवान परशुराम के क्रोध के साथ आगमन की कथा का भी वर्णन किया। उन्होंने कहा कि कहा कि जितना मर्यादित विवाह सीता-रामजी का हुआ, आज तक अन्य किसी का नहीं हुआ। अयोध्या जी में लग्न पत्रिका आई, बरात का आगमन हुआ। विवाह अंतर्गत 12 बार शांति पाठ हुआ। जनकजी द्वारा चरण पखारे गए, भांवरिया हुई। दुल्हा के रंग आसमानी, दुल्हन के रंग बादामी गीत गाया गया। बरात की विदाई के दौरान राम दूल्हा की जय, सीता दुल्हन की जय, चारों दुल्हा की जय, चारों दुल्हन की जय, बोलो घराती-बाराती की जय-जय-जय गीत गाया गया।
पांचवें दिन भी बड़ी संख्या में पहुंचे संत
पांचवें दिन की कथा के प्रारंभ में पादुका पूजन मुख्य यजमान अजय गुप्ता ने सपरिवार किया। इसमें सर्वेश, संजय गुप्ता, मोनू शर्मा भी रहीं। यहां हरियाणा के उदासीन अखाड़ा से सदानंद जी महाराज, सूरत से सनातन सेवा न्यास के ट्रस्टी शिलोम मिश्रा, केंद्रीय मंत्री एसपी सिंह बघेल, ब्रह्माकुमारी की भावना बहन, ब्लॉक प्रमुख हाथरस पूनम पांडेय, ब्लॉक प्रमुख मुरसान रामेश्वर उपाध्याय, एसपी निपुण अग्रवाल, सीओ सिकंदराराऊ आनंद कुमार, एसडीएम सदर रवेंद्र कुमार की उपस्थिति रही। संचालन समाजसेवी प्रवीण वार्ष्णेय ने किया। प्रेमशंकर शर्मा, महेश गुप्ता, प्रखर वार्ष्णेय, अविनाश गुप्ता, अजय प्रधान, संजय शर्मा, भगवान सिंह माहौर, पप्पू लाला, गौरव प्रधान, बंटी प्रधान, दीपक मुद्गल, राहुल कौशिक, दीपक शर्मा सासनी वालों का अहम योगदान रहा।
रामवीर को याद कर भावुक हुए रामभद्राचार्य
स्वामी रामभद्राचार्य से जिला पंचायत अध्यक्ष सीमा उपाध्याय ने मुलाकात कर आशीर्वाद लिया। इस दौरान स्वामी रामभद्राचार्य महाराज ने कहा कि दिवंगत रामवीर उपाध्याय से एक मित्रता भाव था। रामवीर उपाध्याय को याद कर वह भावुक हो उठे।