सपा में नए जिलाध्यक्ष की ताजपोशी की हलचल
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जिला पंचायत अध्यक्ष का चुनाव निपटने के बाद अब सत्ताधारी समाजवादी पार्टी में भी नए जिलाध्यक्ष की नियुक्ति की सरगर्मियां तेज हो गई हैं। हालांकि अभी तक प्रदेश नेतृत्व से यह संकेत नहीं मिले हैं कि कब तक नए अध्यक्ष की ताजपोशी होगी। लेकिन दावेदारों को उम्मीद है कि अब प्रदेश नेतृत्व किसी भी समय नए जिलाध्यक्ष की घोषणा कर सकता है। अब तक नेतृत्व ने जिला पंचायत चुनाव की वजह से ही नए जिलाध्यक्ष की घोषणा रोक रखी थी। फिलहाल पिछले दो महीनों से जिलाध्यक्ष की घोषणा का इंतजार कर रहे दावेदार एकाएक फिर सक्रिय हो गए हैं। लखनऊ तक की भागदौड़ शुरू हो चुकी है।
हर दावेदार अपने पक्ष में मंडल के कद्दावर नेताओं की सिफारिश भी लेकर प्रदेश नेतृत्व के दरबार में पहुंच रहा है। अपने कामकाज और पार्टी की मजबूती के लिए दिए गए योगदान का पूरा रिपोर्ट कार्ड भी प्रदेश के नेताओं के सामने पेश करते हुए अपनी दावेदारी ठोकी जा रही है। अब नेतृत्व किसके दावों पर ज्यादा भरोसा करता है, इसका सबको इंतजार है।
पंचायत चुनाव में हटाए गए थे भाजुद्दीन गौरतलब है कि पूर्व जिलाध्यक्ष चौ.भाजुद्दीन की विदाई जिला और क्षेत्र पंचायत सदस्य चुनाव के दौरान हुई थी। जिले के कुछ नेताओं ने उनके खिलाफ संगठन में गुटबाजी को बढ़ावा देने और चुनाव में प्रत्याशियों के चयन पर तालमेल नहंी बिठाने की शिकायत की थी। जिसके बाद नेतृत्व ने उन्हें हटा दिया था। तब से जिले में जिलाध्यक्ष का यह पद खाली पड़ा हुआ है।
राजनीतिक पकड़ देखना चाहता था नेतृत्व दरअसल, प्रदेश नेतृत्व ने अभी तक जिलाध्यक्ष की घोषणा इसलिए रोक रखी थी, क्योंकि वह जिला पंचायत के चुनाव में अपने दिग्गज नेताओं की उनके क्षेत्रों में राजनीतिक पकड़ का आकलन करना चाहता था। अब चूंकि चुनाव निपट चुके हैं, इसलिए नेतृत्व को भी जिले में अपने नेताओं के सियासी कद का अंदाजा लग चुका है। लिहाजा अब नेतृत्व जिलाध्यक्ष पर अंतिम फैसला लेने के लिए स्वतंत्र हो चुका है।
प्रतिद्वंदी गुटों के बीच शक्ति प्रदर्शन जिन नेताओं और उनके द्वारा समर्थित प्रत्याशियों ने पंचायत चुनाव में बेहतर प्रदर्शन किया है या फिर विपक्ष को घेरने में अहम भूमिका अदा की है, उन पर पार्टी नेतृत्व का भरोसा बढ़ा है। पार्टी का यह गुट अपनी इसी उपलब्धि को लेकर नेतृत्व के दरबार में पहुंचा है। वहां इस गुट के नेताओं ने अपने दावेदारों के नाम उनकी राजनीतिक हैसियत और जमीनी पकड़ के ब्योरे के साथ नेतृत्व के सामने पेश किए हैं। जबकि दूसरे गुट ने भी सदस्य के चुनाव में विरोधी गुट की जबर्दस्त नाकामी का हवाला देकर अपने दावे को मजबूती देने की कोशिश की है।
अन्य दावेदार भी हैं लाइन में दोनों चिर-प्रतिद्वंदी गुटों के अलावा भी अन्य कई दावेदार जिलाध्यक्ष बनने का जुगाड़ लगा रहे हैं। यह दावेदार भी अपने-अपने राजनीतिक आकाओं के जरिए अपने दावे को मजबूती दे रहे हैं। जिले में पार्टी के सभी दिग्गजों की कोशिश है कि इस बार जिलाध्यक्ष उनका ही बने।