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Hathras News: अंधेरे कमरे से निकलकर डिजिटल दौर में पहुंची फोटोग्राफी

Thu, 20 Aug 2026 02:31 AM IST
अलीगढ़ ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, हाथरस
संवाद न्यूज एजेंसी, हाथरस Updated Thu, 20 Aug 2026 02:31 AM IST
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Photography: From the darkroom to the digital age.
पुराने जमाने के कैमरे।  संवाद - फोटो : Samvad
विनीत चौरसिया
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हाथरस। कभी एक रुपये में तीन पासपोर्ट साइज फोटो और 500 रुपये में पूरी शादी की 30 तस्वीरें... हाथरस में फोटोग्राफी का वह दौर अब यादों का हिस्सा बन चुका है। 1970 के दशक में जब तस्वीर खिंचवाना महंगा शौक माना जाता था, तब फोटोग्राफर अंधेरे कमरे में केमिकल के सहारे तस्वीरों को आकार देते थे। आज वही काम कंप्यूटर स्क्रीन और आधुनिक सॉफ्टवेयर ने आसान कर दिया है।
विश्व फोटोग्राफी दिवस पर जिले के वरिष्ठ फोटोग्राफरों ने पांच दशक से अधिक लंबे सफर की यादें साझा कीं। वरिष्ठ फोटोग्राफरों के अनुसार 1970 के दशक के बाद हाथरस में फोटोग्राफी के कारोबार ने तेजी पकड़ी। उस समय एक रुपये में तीन पासपोर्ट साइज फोटो बनते थे, जबकि शादी की 30 तस्वीरों का बिल करीब 500 रुपये आता था। तब सोने का भाव 185 रुपये प्रति 10 ग्राम और देसी घी 10 रुपये किलो था।
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उस दौर में रॉयल फोटो स्टूडियो अभिजात्य वर्ग में अपनी अलग पहचान रखता था, जबकि शांति, ब्यूटी, राजेंद्र, जगदंबा और अनिल फोटो स्टूडियो मध्यम वर्ग में लोकप्रिय थे। आज चंद्रा, भारत, नेशनल, निशांत, लक्ष्मी और अंबिका जैसे स्टूडियो इस विरासत को आगे बढ़ा रहे हैं। संवादं
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दशक दर-दशक बदलती गई तकनीक
-1975 तक : फोटो और फोटो स्टेट का काम पूरी तरह केमिकल बेस्ड था। पोलरॉइड कैमरों ने तुरंत 2x2 इंच की ब्लैक एंड व्हाइट फोटो देकर हलचल मचाई।
-1976 : जैंत कैमरे से कलर फोटोग्राफी शुरू हुई। रील प्रिंट होने के लिए हाथरस से कोलकाता और फिर जापान जाती थी, जिसमें एक महीने का समय लगता था। रात में फोटो खींचने के लिए इस्तेमाल होने वाले बल्ब एक ही फ्लैश में फ्यूज हो जाते थे।
-1980 का दशक : भारी बैटरी वाली फ्लैश गन आईं और इलेक्ट्रो स्टेट मशीनों का प्रचलन बढ़ा। उस दौर में शहर में पहली इलेक्ट्रो स्टेट मशीन 80 हजार रुपये में आई थी।
-1990 का दशक : कंप्यूटर और डिजिटल कैमरों के आगमन से फोटोग्राफी के क्षेत्र में क्रांति आई।
-2000-2010 का दशक : डिजिटल कैमरे सर्वसुलभ हुए और सस्ते हैंडीकैम ने बाजार को नया आयाम दिया।
-2020 के बाद : स्मार्टफोन और ड्रोन कैमरों ने फोटोग्राफी का स्वरूप ही बदल दिया। शादी-विवाह के न्यूनतम पैकेज अब 50 हजार रुपये से शुरू होकर लाखों तक पहुंच चुके हैं।

वरिष्ठ फोटोग्राफरों के अनुभव

वर्ष 1980 में जब मैंने अपने पैतृक कपड़े के व्यवसाय को छोड़कर राम फोटो स्टूडियो की शुरुआत की, तब से लेकर आज तक मेरा एक ही जुनून रहा हाथरस में फोटोग्राफी की हर नई तकनीक सबसे पहले लाना। 1980 में कोडक द्वारा ईजाद पहला डिजिटल कैमरा मैं 1985 में हाथरस ले आया था, हालांकि तब वह बहुत महंगा और जटिल था।

-रामनारायण गोयल, 77 वर्षीय फोटोग्राफर



हमारा दौर वह था, जब एक फोटो का प्रिंट देखने के लिए हफ्तों इंतजार करना पड़ता था। डार्क रूम में केमिकल के बीच फोटो डेवलप करना एक साधना जैसा था। आज की युवा पीढ़ी के पास कंप्यूटर स्क्रीन, आधुनिक कैमरे और डिजिटल टूल्स हैं, जिससे काम पलक झपकते ही हो जाता है।
-रामकिशन वर्मा, 73 वर्षीय फोटोग्राफर
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