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रोडवेज कर्मियों की लापरवाही से गई यात्री की जान
अमर उजाला ब्यूरो हाथरस।
Updated Mon, 28 Aug 2017 11:25 PM IST
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रोडवेज स्टेशन पर खड़ी बसें।
- फोटो : अमर उजाला
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रोडवेज कर्मियों की लापरवाही से गंभीर रूप से बीमार एक यात्री की जान चली गई। बस में मौजूद पुरदिलनगर के राकेश कुमार (34) को खून की उल्टियां हो रही थीं, लेकिन बस लगातार चलती रही। चालक और परिचालक ने राकेश कुमार को बस रोककर आगरा पहुंचाने की कोशिश नहीं की, बल्कि वह बस को जल्दी हाथरस पहुंचाने की कोशिश में जुटे रहे। हाथरस बस स्टैंड पर जब राकेश कुमार को बस से उतारा गया, तब तक उनकी मौत हो चुकी थी।
पुरदिलनगर के सोरों गेट इलाके के रहने वाले राकेश कुमार पुत्र मोहनलाल मेलों में दुकान लगाया करते थे। इन-दिनों उन्होंने राजस्थान के धौलपुर में अपनी दुकान लगाई हुई थी। राकेश गंभीर बीमारी से ग्रस्त थे। धौलपुर में उनकी तबियत बिगड़ने पर वह पुरदिलनगर निवासी अपने पड़ोसी सुरेश चंद्र के साथ सोमवार सुबह धौलपुर से पुरदिलनगर के लिए निकले। सुबह करीब सात बजे वह आगरा के ईदगाह बस स्टैंड से हाथरस के लिए बस में सवार हुए थे। खंदौली पार करते ही राकेश को खून की उल्टियां होने लगीं।
यात्रियों ने बस को रोककर राकेश को किसी निजी अस्पताल में भर्ती कराने की बात कही। लेकिन बस फिर भी चलती रही। खंदौली से हाथरस तक आने में करीब एक घंटे का समय लग जाता है। जब यात्रियों ने दबाव डाला तो रोडवेज चालक- परिचालक सीएचसी पर बस रोककर राकेश को भर्ती कराने को तैयार हो गए।
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उधर, राकेश की हालत लगातार बिगड़ती जा रही थी। एक-एक मिनट की देरी उसकी जान पर भारी पड़ रही थी। इस बीच किसी ने बस चालक और परिचालक को बेहतर इलाज के लिए हाथरस तक बस ले जाने की सलाह दे दी। राकेश के पड़ोसी सुरेश चंद्र फोन पर परिजनों से संपर्क साधे हुए थे। उन्होंने भी इसके लिए हामी भर दी। सादाबाद से हाथरस तक बस के पहुंचने में करीब आधा घंटा लग जाता है। बस स्टैंड पर पहुुंचकर जब राकेश को बस से उतारा गया तब तक उनकी मौत हो चुकी थी।
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पुरदिलनगर के सोरों गेट इलाके के रहने वाले राकेश कुमार पुत्र मोहनलाल मेलों में दुकान लगाया करते थे। इन-दिनों उन्होंने राजस्थान के धौलपुर में अपनी दुकान लगाई हुई थी। राकेश गंभीर बीमारी से ग्रस्त थे। धौलपुर में उनकी तबियत बिगड़ने पर वह पुरदिलनगर निवासी अपने पड़ोसी सुरेश चंद्र के साथ सोमवार सुबह धौलपुर से पुरदिलनगर के लिए निकले। सुबह करीब सात बजे वह आगरा के ईदगाह बस स्टैंड से हाथरस के लिए बस में सवार हुए थे। खंदौली पार करते ही राकेश को खून की उल्टियां होने लगीं।
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यात्रियों ने बस को रोककर राकेश को किसी निजी अस्पताल में भर्ती कराने की बात कही। लेकिन बस फिर भी चलती रही। खंदौली से हाथरस तक आने में करीब एक घंटे का समय लग जाता है। जब यात्रियों ने दबाव डाला तो रोडवेज चालक- परिचालक सीएचसी पर बस रोककर राकेश को भर्ती कराने को तैयार हो गए।
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उधर, राकेश की हालत लगातार बिगड़ती जा रही थी। एक-एक मिनट की देरी उसकी जान पर भारी पड़ रही थी। इस बीच किसी ने बस चालक और परिचालक को बेहतर इलाज के लिए हाथरस तक बस ले जाने की सलाह दे दी। राकेश के पड़ोसी सुरेश चंद्र फोन पर परिजनों से संपर्क साधे हुए थे। उन्होंने भी इसके लिए हामी भर दी। सादाबाद से हाथरस तक बस के पहुंचने में करीब आधा घंटा लग जाता है। बस स्टैंड पर पहुुंचकर जब राकेश को बस से उतारा गया तब तक उनकी मौत हो चुकी थी।