हाथरस: मीतई बिजलीघर में करंट से युवक की मौत पर हंगामा, तीन बच्चों के सिर से उठा पिता का साया
राजेश तीन भाइयों में सबसे बड़ा था। वह अपने पीछे पत्नी व तीन बच्चों को रोता बिलखता छोड़ गया है। बड़ी बेटी छह वर्ष, दूसरे नंबर की चार वर्ष व सबसे छोटा बेटा एक साल का है। पति का शव देख पत्नी बदहवास हो गई, जिन्हें रिश्तेदार संभालते नजर आए। बड़ी बेटी पिता को याद कर रोती दिखी।
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हाथरस के मीतई बिजलीघर पर काम करते समय झुलसे युवक की दिल्ली के सफदरगंज अस्पताल में बुधवार रात उपचार के दौरान मौत हो गई। पांच दिन पहले यह हादसा हुआ था। ग्रामीण चंदपा कोतवाली पहुंचे और जेई को हादसे का जिम्मेदार ठहराते हुए हंगामा किया। पुलिस के समझाने पर ग्रामीण शांत हुए।
हाथरस जंक्शन क्षेत्र के गांव नगला खरग निवासी कमल सिंह के तीन बेटों में से बड़ा राजेश (26) मीतई स्थित 220 केवी बिजलीघर पर संविदा कर्मी के रूप में कार्यरत था। 10 अक्तूबर की शाम करीब चार बजे राजेश बिजलीघर में ही टीम के साथ काम कर रहा था। खंभे पर चढ़ने के दौरान अर्थिंग रोड का एक सिरा सीधे करंट की चपेट में आ गया, जिससे वह बुरी तरह झुलस गया।
करंट लगते ही वह नीचे आ गिरा था। राजेश को आनन-फानन अलीगढ़ ले जाया गया था। अधिक झुलस जाने के कारण उसे दिल्ली के सफदरगंज रेफर किया गया। मौसेरे भाई राहुल कुमार ने बताया कि बुधवार रात राजेश की मौत हो गई। मौत की खबर मिलते ही परिवार में कोहराम मच गया। राजेश के भाई व परिवार के लोगों ने घटना के समय मौजूद जेई पर लापरवाही का आरोप लगाया।
राहुल ने कहा कि बिना शट डाउन लिए ही उसे पोल पर चढ़ा दिया था, जबकि वह पांच लोगों के ग्रुप में केवल हेल्पर था। राहुल ने दावा किया उनका भाई वीडियो में बयान देकर गया है कि जेई ने ही उसे ऊपर चढ़ाया था। आरोपियों पर कार्रवाई के लिए बड़ी संख्या में ग्रामीण बृहस्पतिवार की सुबह चंदपा कोतवाली पहुंच गए। यहां शिकायत न लेने पर हंगामा किया। नोकझोंक की स्थिति बन गई।
परिजन मौत की जानकारी देने कोतवाली चंदपा पहुंचे थे। पोस्टमार्टम की कार्रवाई के लिए सूचना दर्ज की गई। हंगामे की बात सामने नहीं आई है। परिजनों की शिकायत पर नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।-योगेंद्रकृष्ण नारायण, सीओ सादाबाद
शव आने से पहले घर पहुंचे बिजली अधिकारी
पुलिस के समझाने के बाद ग्रामीण गांव लौट गए। दिल्ली से शव आने का इंतजार किया जा रहा था। कार्रवाई न होने पर परिजन मीतई बिजलीघर के सामने शव रख हंगामे के मूड में थे। हंगामे की भनक लगते ही बिजली निगम के अधिकारी दोपहर को राजेश के घर पहुंचे और नियमानुसार मुआवजा दिलाने का आश्वासन दिया।
देर शाम गांव में हुआ अंतिम संस्कार
शाम तक परिजनों को समझा लिया गया। इस कारण दिल्ली से पोस्टमार्टम के बाद शव सीधे गांव ले जाया गया। शव आते ही परिवार में कोहराम मच गया। गमगीन माहौल में पुलिस की मौजूदगी में अंतिम संस्कार किया गया।
तीन बच्चों के सिर से उठा पिता का साया
राजेश तीन भाइयों में सबसे बड़ा था। वह अपने पीछे पत्नी व तीन बच्चों को रोता बिलखता छोड़ गया है। बड़ी बेटी छह वर्ष, दूसरे नंबर की चार वर्ष व सबसे छोटा बेटा एक साल का है। पति का शव देख पत्नी बदहवास हो गई, जिन्हें रिश्तेदार संभालते नजर आए। बड़ी बेटी पिता को याद कर रोती दिखी।