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हाथरस : जनसहभागिता के बिना हिंदी भाषा का विकास संभव नहीं
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हाथरस : कपिल कौशिक। संवाद
- फोटो : HATHRAS
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, हाथरस
बगैर जन सहभागिता के मातृभाषा का विकास संभव नहीं है। स्वतंत्रता दिवस पर देशभक्ति की बातें करने के अलावा देशप्रेम साबित करने का सबसे श्रेष्ठ उपाय हिंदी भाषा का प्रयोग ही है। यह सुझाव शहर के शिक्षकों ने दिया है। शिक्षकों का कहना है कि दूसरे देशों के लोग अपनी ही भाषा में बात करते हैं। अंतरराष्ट्रीय बैठकों में उनके अनुवादक प्रदान किए जाते हैं। वे अपनी भाषा से समझौता नहीं करते। हमें भी अपनी भाषा के प्रति समर्पण भाव दिखाना होगा। कहीं भी किसी से बात करें, भाषा हिंदी ही होनी चाहिए। दूसरी भाषाओं का ज्ञान जरूरी है पर दिनचर्या में उसके प्रयोग से बचना होगा।
अंग्रेजी भाषा का ज्ञान जरूरी है, लेकिन बोलचाल में हिंदी भाषा का प्रयोग करना चाहिए। माता-पिता बच्चों को अंग्रेजी सिखाने पर ज्यादाजोर देते हैं। घर में अंग्रेजी में बात करने का दबाव बनाते हैं। यह मानसिकता ही हिंदी भाषा के पतन का कारण बन रही है। अभिभावकों को चाहिए कि बच्चों को अंग्रेजी सिखाएं, पढ़ाएं पर बातचीत हिंदी में करें।
-कपिल कौशिक, शिक्षक
चीन के नागरिक किसी भी देश में जाएं वे अपनी भाषा में बात करते हैं, जबकि भारतवासी देश में अंग्रेजी भाषा का प्रयोग कर सामाजिक छवि को बेहतर दिखाने का दिखावा करते हैं। जब तक यह सोच नहीं बदलेगी, तब तक हिंदी भाषा का विकास होना कठिन है। हिंदी के विकास के लिए प्रत्येक भारतीय को अपनी जिम्मेदारी निभानी होगी।
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-जगदीश प्रसाद यादव, शिक्षक
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बगैर जन सहभागिता के मातृभाषा का विकास संभव नहीं है। स्वतंत्रता दिवस पर देशभक्ति की बातें करने के अलावा देशप्रेम साबित करने का सबसे श्रेष्ठ उपाय हिंदी भाषा का प्रयोग ही है। यह सुझाव शहर के शिक्षकों ने दिया है। शिक्षकों का कहना है कि दूसरे देशों के लोग अपनी ही भाषा में बात करते हैं। अंतरराष्ट्रीय बैठकों में उनके अनुवादक प्रदान किए जाते हैं। वे अपनी भाषा से समझौता नहीं करते। हमें भी अपनी भाषा के प्रति समर्पण भाव दिखाना होगा। कहीं भी किसी से बात करें, भाषा हिंदी ही होनी चाहिए। दूसरी भाषाओं का ज्ञान जरूरी है पर दिनचर्या में उसके प्रयोग से बचना होगा।
अंग्रेजी भाषा का ज्ञान जरूरी है, लेकिन बोलचाल में हिंदी भाषा का प्रयोग करना चाहिए। माता-पिता बच्चों को अंग्रेजी सिखाने पर ज्यादाजोर देते हैं। घर में अंग्रेजी में बात करने का दबाव बनाते हैं। यह मानसिकता ही हिंदी भाषा के पतन का कारण बन रही है। अभिभावकों को चाहिए कि बच्चों को अंग्रेजी सिखाएं, पढ़ाएं पर बातचीत हिंदी में करें।
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-कपिल कौशिक, शिक्षक
चीन के नागरिक किसी भी देश में जाएं वे अपनी भाषा में बात करते हैं, जबकि भारतवासी देश में अंग्रेजी भाषा का प्रयोग कर सामाजिक छवि को बेहतर दिखाने का दिखावा करते हैं। जब तक यह सोच नहीं बदलेगी, तब तक हिंदी भाषा का विकास होना कठिन है। हिंदी के विकास के लिए प्रत्येक भारतीय को अपनी जिम्मेदारी निभानी होगी।
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-जगदीश प्रसाद यादव, शिक्षक

हाथरस : जगदीश प्रसाद यादव। संवाद- फोटो : HATHRAS