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हाथरस : एयरपोर्ट पर मौसी-मौसी से लिपटकर रोने लगा दक्ष
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अपने मौसा के साथ दक्ष चौधरी। संवाद
- फोटो : SHAPHU
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संवाद न्यूज एजेंसी, सहपऊ/सादाबाद।
यूक्रेन-रूस युद्ध के बीच यूक्रेन में फंसे जिले का अंतिम छात्र सादाबाद प्रगतिपुरम निवासी अनुज प्रताप सिंह का पुत्र दक्ष चौधरी मंगलवार को हंगरी के रास्ते सुबह पांच बजे इंदिरा गांधी अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर उतर गया। यहां दिल्ली में रहने वाले उसके मौसा-मौसी ने उसकी अगवानी की। यहां मौसा-मौसी से लिपट कर दक्ष रोने लगा।
हालांकि, युद्धग्रस्त क्षेत्र से सकुशल वापस लौटने की खुशी दक्ष के चेहरे पर झलक रही थी। दक्ष के दिल्ली हवाई अड्डे पर उतरने की सूचना मिलते ही सादाबाद में उसके परिजनों में खुशी की लहर दौड़ गई। पिता ने बताया कि वह साढ़े ग्यारह घंटे की उड़ान के बाद काफी थक गया था।
उसने कई दिन स्नान नहीं किया था। दक्ष ने बताया कि इस समय यूक्रेन के हालात बहुत ही खराब हैं। हम लोगों ने युद्ध के दौरान काफी दिक्कतों का सामना किया। वहां हमारी आंखों में नींद गायब थी। हर समय यही लगा रहता था कि किस तरह हम अपनी देश पहुंच जाए।
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हंगरी तक पहुंचने के लिए रात के समय माइनस तापमान में कई किमी पैदल चलना पड़ा। इस दौरान भूखे-प्यासे भी रहना पड़ा। हंगरी पहुंचने के बाद भारतीय दूतावास ने उनकी काफी मदद की। स्वदेश लौटने में भारत सरकार का कार्य काफी सराहनीय रहा। दक्ष ने प्रधानमंत्री को धन्यवाद दिया है।
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यूक्रेन-रूस युद्ध के बीच यूक्रेन में फंसे जिले का अंतिम छात्र सादाबाद प्रगतिपुरम निवासी अनुज प्रताप सिंह का पुत्र दक्ष चौधरी मंगलवार को हंगरी के रास्ते सुबह पांच बजे इंदिरा गांधी अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर उतर गया। यहां दिल्ली में रहने वाले उसके मौसा-मौसी ने उसकी अगवानी की। यहां मौसा-मौसी से लिपट कर दक्ष रोने लगा।
हालांकि, युद्धग्रस्त क्षेत्र से सकुशल वापस लौटने की खुशी दक्ष के चेहरे पर झलक रही थी। दक्ष के दिल्ली हवाई अड्डे पर उतरने की सूचना मिलते ही सादाबाद में उसके परिजनों में खुशी की लहर दौड़ गई। पिता ने बताया कि वह साढ़े ग्यारह घंटे की उड़ान के बाद काफी थक गया था।
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उसने कई दिन स्नान नहीं किया था। दक्ष ने बताया कि इस समय यूक्रेन के हालात बहुत ही खराब हैं। हम लोगों ने युद्ध के दौरान काफी दिक्कतों का सामना किया। वहां हमारी आंखों में नींद गायब थी। हर समय यही लगा रहता था कि किस तरह हम अपनी देश पहुंच जाए।
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हंगरी तक पहुंचने के लिए रात के समय माइनस तापमान में कई किमी पैदल चलना पड़ा। इस दौरान भूखे-प्यासे भी रहना पड़ा। हंगरी पहुंचने के बाद भारतीय दूतावास ने उनकी काफी मदद की। स्वदेश लौटने में भारत सरकार का कार्य काफी सराहनीय रहा। दक्ष ने प्रधानमंत्री को धन्यवाद दिया है।