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हाथरस हादसे की आंखों देखी : जो दलदल में गिरा वह उठ नहीं पाया, मुंह-नाक में घुस गया था कीचड़

Wed, 03 Jul 2024 05:55 AM IST
दुष्यंत शर्मा अमर उजाला नेटवर्क, अलीगढ़
अमर उजाला नेटवर्क, अलीगढ़ Published by: दुष्यंत शर्मा Updated Wed, 03 Jul 2024 05:55 AM IST
सार

राहुल बताते हैं कि महिलाओं-बच्चों के मुंह-नाक में कीचड़ भर गया था। सांसें थम गई थीं। हाथों से उनकी छाती-पीठ पर खूब दबाव दिया। दो-तीन महिलाओं के मुंह में मुंह लगाकर सांसें फूंकी, फिर भी उनकी जिंदगी न बच सकी।

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Hathras accident : The one who fell in the swamp could not get up.
आंखों देखी... - फोटो : self

विस्तार

सिकंदराराऊ के निवासी 30 वर्षीय राहुल उन लोगों में शामिल हैं, जो सड़क किनारे गड्ढे में गिरने वाले श्रद्धालुओं को निकालने में मददगार रहे। वह बताते हैं कि महिलाओं-बच्चों के मुंह-नाक में कीचड़ भर गया था। सांसें थम गई थीं। हाथों से उनकी छाती-पीठ पर खूब दबाव दिया। दो-तीन महिलाओं के मुंह में मुंह लगाकर सांसें फूंकी, फिर भी उनकी जिंदगी न बच सकी।

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यह बताते हुए कुछ सेकेंड के लिए वह कांपने लगे। पास खड़े लोगों ने कंधे पर हाथ रखकर हौसला बढ़ाया। राहुल ने बताया कि पहली बार बाबा का प्रवचन सुनने पहुंचे थे। जीटी रोड पर करीब चार सौ मीटर कानपुर की तरफ थे जब भगदड़ मची। लोग सड़क के एक ओर गिरने लगे। तेज शोर मचने लगा। इस पर वह भागकर पास पहुंचे। बारिश की वजह से सड़क की पटरी से नीचे खेत से पहले गड्ढा है। भीड़ के दबाव में सड़क किनारे खड़े लोग उसी में गिर रहे थे।
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लोग उन्हें निकाल रहे थे। वह भी भीड़ में लोगों को पानी-कीचड़ भरे गड्ढे से निकालने में जुट गए। 224-25 महिलाओं-बच्चों को कीचड़ से निकालकर आगे खेत में लिटाया। कुछ हिलाओं-बच्चों की छाती-पीठ पर हाथों से खूब दबाव डाला ताकि सांसें लौट सकेें। कुछ लोगों ने कहा तो मुंह से मुंह लगाकर खूब सांसें भरीं लेकिन उन महिलाओं-बच्चों की सांसें नहीं लौटीं। जो मर चुके थे, उन्हें करीब डेढ़ सौ मीटर दूर सड़क किनारे पहुंचाते रहे। राहुल ने कहा कि शायद ईश्वर ने इस मदद के लिए उन्हें भी चुना। कोई जिंदगी बच जाए तो यही सबसे बड़ा पुण्य हो जाएगा।

अपनों को सुरक्षित किया, फिर साथियों की करते रहे तलाश
हादसे के बाद अधिकतर लोग सबसे पहले अपनों को सुरक्षित करते रहे। कोई अपने वाहन में बिठाता रहा तो कोई सड़क किनारे सुरक्षित स्थान पर एक-दूसरे को रोकता रहा। इसके बाद वह अपने जिले-गांव से आए लोगों की तलाश में घटनास्थल से लेकर मौके पर चारों ओर भटकते रहे।


लखीमपुर खीरी जनपद के प्रतापपुर से तीन बसों में नारायण साकार हरि उर्फ भोले बाबा के अनुयायी पहुंचे थे। रामकिशोर भी इन्हीं में शामिल थे। उन्होंने बताया कि उनके साथ के लोग दो बसों में आए थे। दोनों बसों के सभी लोग सुरक्षित थे। हादसे के बाद सबसे पहले उनके यहां के लोग सत्संग स्थल से करीब आधा किलोमीटर दूर सड़क किनारे खड़ी अपनी-अपनी बसों में जाकर बैठ गए। इसके बाद वह अपने जनपद से आई तीसरी बस में शामिल लोगों की जानकारी करते इधर-उधर घूम रहे थे।

कानपुर देहात के पतारा से एक वैन में नौ लोग भोले बाबा के सत्संग में पहुंचे थे। इनमें से एक बुजुर्ग हादसे के बाद वह सत्संग स्थल के मुख्य गेट के सामने सड़क किनारे बैठे थे। बताया कि काफी देर से वह अपने साथ आए लोगों को तलाश कर रहे हैं। 

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