हाथरस सत्संग हादसा: भीड़ का कॉलम खाली, फिर भी एसडीएम ने जारी कर दिया अनुमति पत्र
सूत्रों के अनुसार जांच आयोग ने व्यवस्थाओं की कमियों के लिए एसडीएम व सीओ को दोषी माना है। यहां यह भी उजागर है कि सत्संग के अनुमति पत्र में भीड़ की संख्या को उजागर नहीं किया गया। एसडीएम सिकंदराराऊ ने यह अनुमति 18 जून 2024 को दी थी और इसमें कार्यक्रम में भाग लेने वाले व्यक्तियों की अनुमानित संख्या का कॉलम रिक्त छोड़ दिया गया।
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गत वर्ष 2 जुलाई को भोले बाबा के सत्संग में मची भगदड़ में 121 लोगों की मौत के मामले में न्यायिक जांच आयोग ने अपनी रिपोर्ट शासन को सौंप दी है। बताया जा रहा है कि इसमें माना गया है कि हर स्तर पर लापरवाही बरती गई। अनुमति पत्र में भीड़ का कॉलम ही खाली छोड़ दिया गया था। एसडीएम और सीओ को हादसे के लिए मुख्य तौर पर दोषी माना गया है।
पिछले वर्ष दो जुलाई को सिकंदराराऊ क्षेत्र के गांव फुलरई मुगलगढ़ी में भोले बाबा उर्फ साकार विश्व हरि का सत्संग समाप्त होने पर यह हादसा हुआ था। जैसे ही भीड़ ने निकलना शुरू किया था, तभी भोले बाबा का काफिला भी निकलने लगा। इस दौरान सेवादारों ने भीड़ को डंडों से धकियाकर रोक दिया। कुछ लोग भोले बाबा की चरण रज लेने के लिए गैलरी में पहुंच गए। व्यवस्था बिगड़ गई और भगदड़ मच गई थी।
इस भगदड़ में महिलाएं और बच्चे बुरी तरह कुचलते चले गए। राज्य सरकार की ओर से मामले की जांच के लिए तीन सदस्यीय न्यायिक जांच आयोग का गठन किया गया था। आयोग ने करीब 500 लोगों के बयान दर्ज किए थे। पुलिस ने एफआईआर दर्ज कर मुख्य आयोजक देवप्रकाश मधुकर सहित 11 आरोपियों को गिरफ्तार किया था। यह मामला सत्र न्यायालय में विचाराधीन है।
सूत्रों के अनुसार जांच आयोग ने व्यवस्थाओं की कमियों के लिए एसडीएम व सीओ को दोषी माना है। यहां यह भी उजागर है कि सत्संग के अनुमति पत्र में भीड़ की संख्या को उजागर नहीं किया गया। एसडीएम सिकंदराराऊ ने यह अनुमति 18 जून 2024 को दी थी और इसमें कार्यक्रम में भाग लेने वाले व्यक्तियों की अनुमानित संख्या का कॉलम रिक्त छोड़ दिया गया।
सीओ ने तत्कालीन कोतवाली प्रभारी निरीक्षक की रिपोर्ट को नजरअंदाज किया। सत्संग पंडाल की पूरी व्यवस्था सेवादारों के हाथ में थी। सत्संग में जुटी भीड़ के मुकाबले कम पुलिसकर्मी लगाना हादसे की वजह बनकर सामने आया है।
जांच आख्या को नजरअंदाज कर दी गई थी अनुमति
सत्संग के मुख्य आयोजक देव प्रकाश मधुकर ने 18 जून 2024 को उप जिलाधिकारी सिकंदराराऊ से मानव मंगल मिलन समागम कराने की अनुमति मांगी थी। इसमें 80 हजार लोगों की भीड़ एकत्रित होने की संभावना जताई थी। इस आधार पर एसडीएम ने सीओ और एसएचओ से जांच कर स्पष्ट आख्या मांगी थी। तत्कालीन कोतवाली निरीक्षक सिकंदराराऊ आशीष कुमार सिंह ने 29 जून 2024 को रिपोर्ट दी, जिसमें उन्होंने कहा कि कार्यक्रम में आसपास के जनपदों एवं अन्य क्षेत्र से लगभग करीब एक लाख भक्ताें एवं अनुयायियों के आने की संभावना है। एलआईयू ने यह संख्या दो लाख बताई थी। इसके बाद भी सत्संग में शामिल होने वाले लोगों की संख्या को नजरअंदाज कर अनुमति दी गई।
इंस्पेक्टर ने मांगी थी एक प्लाटून पीएसी और 55 पुलिस कर्मी
कार्यक्रम में जुटने वाली भीड़ के अनुमान के आधार पर इंस्पेक्टर सिकंदराराऊ ने एक प्लाटून पीएसी और 69 पुलिस कर्मी मांगे थे। उच्चाधिकारियों ने तत्कालीन कोतवाली प्रभारी की रिपोर्ट को पूरी तरह नजर अंदाज किया। कार्यक्रम में एक एसएचओ, चार इंस्पेक्टर, छह दरोगा, दो महिला दरोगा, चार ट्रैफिक पुलिस कर्मी और डेढ़ सेक्शन पीएसी सहित कुल 69 पुलिस कर्मी लगाए गए थे।