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हमें बचा लो: हम पुरदिलनगर से आगे नहर में गिर गए हैं, एक घंटे तक नदी और नहरों पर तलाश करते रहे कार

Sat, 15 Feb 2025 03:39 PM IST
चमन शर्मा अमर उजाला नेटवर्क, हाथरस
अमर उजाला नेटवर्क, हाथरस Published by: चमन शर्मा Updated Sat, 15 Feb 2025 03:39 PM IST
सार

गाड़ी में सेंट्रल लॉक लगा हुआ था, जैसे ही गाड़ी नदी के पानी में गिरकर पलटी, वैसे ही पूरी तरह से ऑटोमेटिक लॉक हो गई और उसमें पानी भरने लगा। करीब एक घंटे तक उसमें सवार लोगों ने खुद को बचाने की कोशिश की।

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car accident in hasayan
हादसे में क्षतिग्रस्त कार - फोटो : संवाद

विस्तार

हम पुरदिलनगर से आगे नहर में गिर गए हैं...यह जानकारी कार में फंसी मंजू ने डॉक्टर नगेंद्र के परिचित डॉक्टर राहुल को दी। उन्हें एक के बाद एक करके तीन कॉल उसने कीं। इसके बाद गांव में भी फोन कर हादसे की जानकारी दी। इसके बाद किसी का उनसे फोन से संपर्क नहीं हो पा रहा था। सही लोकेशन नहीं मिलने के कारण खोजने में दिक्कत आ रही थी। परिजन, पुलिस और एंबुलेंस ईशन नदी और इलाके में पड़ने वाली नहरों में कार की तलाश करते घूमते रहे।

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13 फरवरी की रात करीब सवा 11 बजे हादसा हुआ। मंजू की कॉल के बाद परिजन ही नहीं, जिसे भी घटना की जानकारी हुई, वह गांव से हाथरस के लिए दौड़ पड़ा। यह लोग पुरदिलनगर और हसायन क्षेत्र में पड़ने वाली नहरों, रजबहों व ईशन नदी में कार को ढूंढते रहे।
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डॉक्टर राहुल ने बताया कि करीब तीन कॉल मेरे पास आई थी। रात करीब 12 बजे में वह भागे। एंबुलेंस को फोन किया। वह जान बचाने के लिए खुद दो साथियों को लेकर पुरदिलनगर क्षेत्र में पहुंच गए। मंजू को भी वास्तविक लोकेशन की जानकारी नहीं थी कि कार कहां पर गिरी है। रास्ते में पड़ने वाली सभी नहरों के पुलों पर देखा, लेकिन जानकारी नहीं मिल सकी। बाद में रात करीब 12ः30 बजे बरसामई के निकट के पुल पर पहुंचकर देखा कि एंबुलेंस खड़ी है, उसके चालक नदी में उतरकर बचाव के प्रयास कर रहे थे।

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सभी से मुंह पानी से बाहर रखने की बात कही, शीशे भी तोड़ने की कोशिश की

जैसे ही कार नदी में पलटी और उसकी छत पानी में चली गई, वैसे ही मंजू ने कार में बैठे बच्चों व सभी से कहा कि मुंह को पानी से बाहर निकालो, जिससे कि हम बच सकें, लेकिन मंजू की तमाम कोशिशें भी अपने पति नगेंद्र के साथ मासूमों व अपनी देवरानी को नहीं बचा सकीं। इस बात को याद कर करके मंजू बार-बार बेहोश हो रही हैं।

मंजू अपने पति के साथ कार में आगे की सीट पर ही बैठी थीं। कार ने पलटा खाया तो उसका आगे का हिस्सा सीधे पानी में जाकर लगा, जिससे नगेंद्र के सिर में भी चोट आ गई। इसके बाद कार धीरे-धीरे पानी में डूबने लगी। कार उलटी हो गई। मंजू ने बताया कि पीछे की सीट पर बैठे बच्चे और पूनम कार के पलटते ही नीचे की ओर दब गए। मैंने सभी से कार में खड़े होकर पानी से मुंह बाहर रखने के लिए कहा, जिससे गंदा पानी अंदर न जा सके। इसके साथ ही लगातार सबकी जान बचाने के लिए पति के मोबाइल से नंबर मिलाए।

एक घंटे तक जान बचाने की कोशिश करते रहे कार में बंद लोग
गाड़ी में सेंट्रल लॉक लगा हुआ था, जैसे ही गाड़ी नदी के पानी में गिरकर पलटी, वैसे ही पूरी तरह से ऑटोमेटिक लॉक हो गई और उसमें पानी भरने लगा। करीब एक घंटे तक उसमें सवार लोगों ने खुद को बचाने की कोशिश की। गाड़ी में पानी पूरी तरह से भर चुका था, इसमें सवार लोग खड़े हो गए और पानी से बचने की कोशिश करने लगे। बचाव अभियान शुरू होने तक सभी ने खड़े रहकर ही खुद को बचाया।
                            

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