फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Hathras News ›   Bagla Degree College professor Dr Rajneesh acquitted of Physical harassment charges

Hathras: कोर्ट का आया फैसला, साक्ष्य के अभाव में यौन शोषण आरोपी बागला डिग्री कॉलेज प्रोफेसर डॉ रजनीश दोष मुक्त

Tue, 24 Mar 2026 05:25 PM IST
Chaman Kumar Sharma अमर उजाला नेटवर्क, हाथरस
अमर उजाला नेटवर्क, हाथरस Published by: Chaman Kumar Sharma Updated Tue, 24 Mar 2026 05:25 PM IST
सार

15 मार्च 2024 को प्रोफेसर के खिलाफ यौन शोषण के आरोप में मुकदमा दर्ज हुआ था। 21 मार्च को उन्हें गिरफ्तार कर लिया गया था। प्रकरण साल भर चर्चाओं में रहा।

विज्ञापन
Bagla Degree College professor Dr Rajneesh acquitted of Physical harassment charges
प्रोफेसर डॉ रजनीश - फोटो : वीडियो ग्रैब

विस्तार

दुष्कर्म, छेड़छाड़ और आईटी एक्ट के आरोपों में घिरे हाथरस पीसी बागला डिग्री कॉलेज के प्रोफेसर डा. रजनीश कुमार को न्यायालय ने बाइज्जत बरी कर दिया है। न्यायालय ने पाया कि अभियोजन पक्ष आरोपी के खिलाफ दोष सिद्ध करने में पूरी तरह विफल रहा और पेश किए गए इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्य भी कानूनी मानकों पर खरे नहीं उतरे।

विज्ञापन


पिछले वर्ष लाचार बेटी के नाम से एक गुमनाम पत्र राष्ट्रीय महिला आयोग की अध्यक्ष व पुलिस अधीक्षक हाथरस को भेजा गया था। एसपी ने 12 मार्च 2025 को यह पत्र जांच के लिए कोतवाली हाथरस गेट भेजा। प्रारंभिक छानबीन के बाद 15 मार्च को 2025 दुष्कर्म व आईटी एक्ट की धाराओं में डा. रजनीश के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज की गई थी।
विज्ञापन


गुमनाम खत में छात्रा ने आरोप लगाए थे कि पीसी बागला डिग्री कॉलेज में भूगोल विभाग के अध्यक्ष डा. रजनीश छात्राओं को भय व प्रलोभन में लेकर उनके साथ शारीरिक संबंध बनाते हैं और घटना के फोटो व वीडियो भी लेते हैं। प्रारंभिक जांच में कोई पीड़िता सामने न आने के कारण पुलिस ने अपनी तरफ से ही एफआइआर लिखकर 21 मार्च 2025 को गिरफ्तार कर जेल भेजा था।

विज्ञापन
विज्ञापन

मामले की सुनवाई अपर सत्र न्यायाधीश एफटीसी प्रथम महेंद्र कुमार रावत के न्यायालय में हुई। अभियोजन व बचाव पक्ष की दलीलें सुनने के बाद न्यायालय ने मंगलवार निर्णय दिया। कोर्ट ने कहा कि इस संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता कि अभियुक्त को फंसाने के उद्देश्य से किसी ने फर्जी और मनगढ़ंत वीडियो तैयार किए हों। पीड़िताओं ने स्वयं आरोपों का खंडन किया। साक्ष्यों के अभाव में अभियुक्त रजनीश कुमार को सभी आरोपों से दोष मुक्त कर दिया गया।


तकनीकी साक्ष्य देने में गच्चा खा गई पुलिस
पुलिस अपनी विवेचना में साबित नहीं कर सकी कि जो सीडी सील कर कोर्ट में दाखिल की है, उसमें फोटो व वीडियो कहां से आए। बरामद लैपटॉप व मोबाइल विधि विज्ञान प्रयोगशाला भेजे गए थे, लेकिन न्यायालय में प्रस्तुत आख्या में इसका उल्लेख नहीं है कि वीडियो व फोटो इन्हीं लैपटॉप व मोबाइल से मिले हैं। 

आर्टिफीशियल इंटेलीजेंस के जमाने में पुलिस ऐसा कोई साक्ष्य प्रस्तुत नहीं कर सकी कि फोटो या वीडियो वास्तविक हैं या नहीं। इसलिए इस बात की संभावना से इन्कार नहीं किया जा सका कि फोटो-वीडियो एआई जनरेटेड हैं। कोर्ट ने भी अपने फैसले में सुप्रीम कोर्ट के अर्जुन पंडितराव खोतकर बनाम कैलाश कुशनराव केस का जिक्र किया। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्य (जैसे सी.डी.) की सत्यता प्रमाणित करने के लिए धारा 65बी का प्रमाण पत्र अनिवार्य है, जो इस मामले में उपलब्ध नहीं था।

कोर्ट में पीड़िताएं बोलीं-पुलिस के दबाव में दिए थे बयान
अभियोजन पक्ष की ओर से नौ गवाह थे, जिनमें एक वादी मुकदमा, तीन पीड़िता, दो चिकित्सक, विवेचक व दो सिपाही शामिल थे। गवाही के दौरान तीनों पीड़िताओं ने प्रोफेसर पर कोई आरोप नहीं लगाए। पुलिस साक्षी की गवाही में भी प्रोफेसर पर आरोप सिद्ध नहीं हुए। पीड़िताओं ने भी कोर्ट में पुलिस के दबाव में बयान देने की बात कही।

पुलिस ने इस चर्चित मामले में 10 मई 2025 को न्यायालय में आरोप पत्र दाखिल किया था। 16 जून को प्रकरण सत्र सुपुर्द किया गया। 18 अगस्त को आरोप तय किए गए और इसके बाद गवाहों का परीक्षण शुरू हुआ। कोर्ट में दिए अपने बयान में पहली पीड़िता ने कहा कि प्रोफेसर रजनीश ने उसके साथ कोई घटना नहीं की है और न ही कोई वीडियो बनाया। उसने केवल छह माह कॉलेज में काम किया था।

दूसरी पीडि़ता ने भी यही बात दोहराई। उसने बताया कि वह बागला डिग्री कॉलेज से बीए करने के बाद उसने यहीं से एमए किया था और भूगोल में प्रवेश लिया था। उसने कहा कि वह डॉक्टर रजनीश से मिलती-जुलती नहीं थी। उन्होंने कहा कि कोई घटना नहीं की गई और न ही उसका वीडियो बनाया। मजिस्ट्रेट के समक्ष दिए बयानों को लेकर युवती ने न्यायालय में कहा कि वे बयान पुलिस के दबाव में दिए थे। पुलिस ने उसके भाई को थाने में बैठा लिया था और झूठा फंसाने की धमकी दी थी।

तीसरी पीड़िता ने कॉलेज की छात्रा होने की बात स्वींकारी, लेकिन प्रोफेसर द्वारा कोई कृत्य करने की बात से साफ इंकार किया। छात्रा ने कहा कि उसके द्वारा कोई शिकायत नहीं की गई और न ही पुलिस ने उसके बयान लिए थे। एक पीडि़ता ने शपथ पत्र के साथ सुप्रीम कोर्ट को पत्र भेजा था और अवगत कराया था कि उसके द्वारा विवेचक को कोई बयान नहीं दिए गए हैं। सुप्रीम कोर्ट से वह प्रार्थना पत्र स्थानीय न्यायालय को भेजा गया था, जिसे सुनवाई में शामिल किया गया।

प्रोफेसर ने बताई कॉलेज की राजनीति
साक्ष्य सफाई में प्रोफेसर ने अपना पक्ष रखते हुए कहा कि उन पर लगे सभी आरोप निराधार हैं। प्रोफेसर ने कहा कि कॉलेज की पार्टीबंदी एवं राजनीति से प्रेरित होकर झूठा मुकदमा चलाया गया है।

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed