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सता का सिंहासन से संग्राम नहीं रुकने दूंगा---
Updated Thu, 27 Sep 2018 12:17 AM IST
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फोटो
हेडिंग
कविता का सिंहासन से संग्राम नहीं रुकने दूंगा-----
क्रासर
भोर की किरण तक मेला श्रीदाऊजी महाराज में हुई गूंजी कवियों की वाणी
एक शाम अटल के नाम कार्यक्रम में उमड़े श्रोता, हरिओम पवार को अटल रत्न उपाधि
उमर उजाला ब्यूरो
हाथरस। मेला श्रीदाऊजी महाराज में मंगलवार की रात्रि में एक शाम अटल के नाम हुए कार्यक्रम में श्रोताओं की भीड़ उमड़ी। भोर की पहली किरण तक पंडाल में इस कार्यक्रम में हुए कवि सम्मेलन में श्रोताओं की भीड़ जमी रही। कार्यक्रम के समापन पर ओज के कवि हरिओम पवार को अटल रत्न की उपाधि से सम्मानित किया गया। भाजपा के संगठन महामंत्री भवानी सिंह सहित अन्य अतिथियों का स्वागत किया गया। संचालन अशोक सुंदरानी ने किया।
सरस्वती वंदना के साथ कार्यक्रम का शुभारंभ हुआ। उसके बाद युवा कवि अमित शर्मा नोएडा ने माइक संभाला। जोश के साथ कविता प्रस्तुत की बंटवारा करना तो ढंग से करते, चंदा सूरज हिंदुस्तान की माटी का परिवेश अधर में छोड़ दिया, बंटवारा भी करके बापू देश अधर में छोड़ दिया। उसके बाद हाशिम फिरोजाबादी की रचनाओं ने समां बांध दिया--
अपने हिंदुस्तान को खुदा कसम फिर से सोने की चिड़िया बनाएंगे।
बड़ोदरा की श्वेता सिंह ने की इस कविता को बेहद तालियां मिलीं।
कभी हिंदू हुए हैं हम, कभी मुस्लमान हुए हम, फकत इंसान ही हमको कभी बनना नहीं आया।
शृंगार रस के कवि विष्णु सक्सेना के इस गीत ने बेहद तालियां बटोरीं।
रेत पर नाम लिखने से क्या फायदा, एक आई लहर कुछ बचेगा नहीं।
पद्मश्री डॉ. सुनील जोगी की रचनाओं पर जमकर ठहाके लगे। उन्होंने यह रचना पढ़ी।
धरने पर बैठकर धनमंत्री बन गए तो आम आदमी बनकर मुख्यमंत्री बन गए।
उसके बाद जब रात्रि ढाई बजे ओज के कवि हरिओम पवार ने माइक संभाला तो वहां हजारों श्रोताओं में नई ऊर्जा का संचार हुआ। उन्होेंने वीर रस से ओत-प्रोत अपनी रचनाएं प्रस्तुत कीं तो वहां माहौल ही बदल गया और हर कोई उनकी रचनाओं को सुनकर उनका कायल हो गया। उनकी इस कविता ने बेहद तालियां बटोरीं।
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सत्ता का आकर्षण मेरी चाह नहीं, पगडंडी से लाल किले तक जाता हूं।
झुग्गी झोपड़ियों में सो जाता हूं, लेकिन दरबारों में अपना शीश नहीं झुकने दूंगा। कविता का सिंहासन से संग्राम नहीं रुकने दूंगा।
इसके अलावा रुचि चतुर्वेदी, नितिन मिश्रा, अशोक सुंदरानी, यशपाल यश आदि ने भी काव्यपाठ किया। कार्यक्रम की शुरुआत अटल जी के निजी सहायक रहे पं. शिवकुमार ने दीप प्रज्ज्वलित कर की। इस मौके पर मुख्य रूप से सदर विधायक हरीशंकर माहौर, पूर्व विधायक राजवीर सिंह पहलवान, नगर पालिकाध्यक्ष आशीष शर्मा, स्वदेश आर्य, गोपाल चतुर्वेदी, राजेश सिंह गुड्डू, हरीशंकर राना, अखिलेश गुप्ता, नंदनी देवी आदि मुख्य रूप से मौजूद थे।
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अटल रत्न उपाधि से किया सम्मानित
ओज कवि हरिओम पवार को कार्यक्रम के समापन पर अटल रत्न उपाधि से सम्मानित किया गया। अयोजकों ने एक लाख रुपये का चेक दिया। इसके साथ उन्होंने मंच से घोषणा की आठ सौ गरीब बच्चों का ट्रस्ट चलाता हूं। वहीं चेक को दूंगा।
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कविता का सिंहासन से संग्राम नहीं रुकने दूंगा-----
क्रासर
भोर की किरण तक मेला श्रीदाऊजी महाराज में हुई गूंजी कवियों की वाणी
एक शाम अटल के नाम कार्यक्रम में उमड़े श्रोता, हरिओम पवार को अटल रत्न उपाधि
उमर उजाला ब्यूरो
हाथरस। मेला श्रीदाऊजी महाराज में मंगलवार की रात्रि में एक शाम अटल के नाम हुए कार्यक्रम में श्रोताओं की भीड़ उमड़ी। भोर की पहली किरण तक पंडाल में इस कार्यक्रम में हुए कवि सम्मेलन में श्रोताओं की भीड़ जमी रही। कार्यक्रम के समापन पर ओज के कवि हरिओम पवार को अटल रत्न की उपाधि से सम्मानित किया गया। भाजपा के संगठन महामंत्री भवानी सिंह सहित अन्य अतिथियों का स्वागत किया गया। संचालन अशोक सुंदरानी ने किया।
सरस्वती वंदना के साथ कार्यक्रम का शुभारंभ हुआ। उसके बाद युवा कवि अमित शर्मा नोएडा ने माइक संभाला। जोश के साथ कविता प्रस्तुत की बंटवारा करना तो ढंग से करते, चंदा सूरज हिंदुस्तान की माटी का परिवेश अधर में छोड़ दिया, बंटवारा भी करके बापू देश अधर में छोड़ दिया। उसके बाद हाशिम फिरोजाबादी की रचनाओं ने समां बांध दिया--
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अपने हिंदुस्तान को खुदा कसम फिर से सोने की चिड़िया बनाएंगे।
बड़ोदरा की श्वेता सिंह ने की इस कविता को बेहद तालियां मिलीं।
कभी हिंदू हुए हैं हम, कभी मुस्लमान हुए हम, फकत इंसान ही हमको कभी बनना नहीं आया।
शृंगार रस के कवि विष्णु सक्सेना के इस गीत ने बेहद तालियां बटोरीं।
रेत पर नाम लिखने से क्या फायदा, एक आई लहर कुछ बचेगा नहीं।
पद्मश्री डॉ. सुनील जोगी की रचनाओं पर जमकर ठहाके लगे। उन्होंने यह रचना पढ़ी।
धरने पर बैठकर धनमंत्री बन गए तो आम आदमी बनकर मुख्यमंत्री बन गए।
उसके बाद जब रात्रि ढाई बजे ओज के कवि हरिओम पवार ने माइक संभाला तो वहां हजारों श्रोताओं में नई ऊर्जा का संचार हुआ। उन्होेंने वीर रस से ओत-प्रोत अपनी रचनाएं प्रस्तुत कीं तो वहां माहौल ही बदल गया और हर कोई उनकी रचनाओं को सुनकर उनका कायल हो गया। उनकी इस कविता ने बेहद तालियां बटोरीं।
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सत्ता का आकर्षण मेरी चाह नहीं, पगडंडी से लाल किले तक जाता हूं।
झुग्गी झोपड़ियों में सो जाता हूं, लेकिन दरबारों में अपना शीश नहीं झुकने दूंगा। कविता का सिंहासन से संग्राम नहीं रुकने दूंगा।
इसके अलावा रुचि चतुर्वेदी, नितिन मिश्रा, अशोक सुंदरानी, यशपाल यश आदि ने भी काव्यपाठ किया। कार्यक्रम की शुरुआत अटल जी के निजी सहायक रहे पं. शिवकुमार ने दीप प्रज्ज्वलित कर की। इस मौके पर मुख्य रूप से सदर विधायक हरीशंकर माहौर, पूर्व विधायक राजवीर सिंह पहलवान, नगर पालिकाध्यक्ष आशीष शर्मा, स्वदेश आर्य, गोपाल चतुर्वेदी, राजेश सिंह गुड्डू, हरीशंकर राना, अखिलेश गुप्ता, नंदनी देवी आदि मुख्य रूप से मौजूद थे।
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अटल रत्न उपाधि से किया सम्मानित
ओज कवि हरिओम पवार को कार्यक्रम के समापन पर अटल रत्न उपाधि से सम्मानित किया गया। अयोजकों ने एक लाख रुपये का चेक दिया। इसके साथ उन्होंने मंच से घोषणा की आठ सौ गरीब बच्चों का ट्रस्ट चलाता हूं। वहीं चेक को दूंगा।