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शौचालय तो बने, लेकिन पानी की व्यवस्था नहीं
Updated Sun, 28 Oct 2018 11:09 PM IST
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न्यूज डेस्क अमर उजाला हाथरस
हाथरस। जिले में स्वच्छ भारत मिशन के तहत बने शौचालयों का अभी तक पूरी तरीके से सत्यापन का काम नहीं हो सका है। अभी तक जिले के करीब 100 गांवों में जिला स्तरीय सत्यापन नहीं हुआ है। इन गांवों में जिला स्तरीय अधिकारियों ने अभी तक घूमकर शौचालय निर्माण की हकीकत नहीं देखी है। वहीं मंडलीय स्तरीय सत्यापन में ज्यादातर गांवों में शौचालयों पानी व्यवस्था का नहीं होना पाया जा रहा है।
यह खुलासा मंडलीय सत्यापन की टीम ने किया है, जबकि सभी शौचालयों में टंकी निर्माण के लिए विभाग की ओर से लाभार्थी को धनराशि दी गई थी। फिलहाल इस खुलासे के बाद विभागीय अधिकारियों में खलबली मची हुई है। स्वच्छ भारत मिशन के तहत जिले में करीब पौने तीन लाख शौचालयों का निर्माण कराया गया। वहीं बेसलाइन सर्वे 2012 के आधार पर विभाग ने जिले को ओडीएफ घोषित कर दिया। वहीं विभाग की ओर से जिला स्तरीय अधिकारियों से सत्यापन भी कराया गया, लेकिन जिला स्तरीय अधिकारियों ने अपनी सत्यापन रिपोर्ट में शौचालयों पर पानी की व्यवस्था का नहीं होना अंकित नहीं किया।
अब मंडलीय स्तर से हो रहे सत्यापन यह खुलकर सामने आ रहा है। मंडलीय स्तर के सत्यापन पानी की उपलब्धता नहीं होने की बात खुलकर आने के बाद विभागीय अधिकारियों ने लाभार्थियों पर टंकी का निर्माण करने के लिए दबाव बनाना शुरू कर दिया है। मंडलीय सत्यापन होने के बाद प्रदेश स्तर से भी एक टीम शौचालय निर्माण की हकीकत देखने के लिए आएगी।
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हाथरस। जिले में स्वच्छ भारत मिशन के तहत बने शौचालयों का अभी तक पूरी तरीके से सत्यापन का काम नहीं हो सका है। अभी तक जिले के करीब 100 गांवों में जिला स्तरीय सत्यापन नहीं हुआ है। इन गांवों में जिला स्तरीय अधिकारियों ने अभी तक घूमकर शौचालय निर्माण की हकीकत नहीं देखी है। वहीं मंडलीय स्तरीय सत्यापन में ज्यादातर गांवों में शौचालयों पानी व्यवस्था का नहीं होना पाया जा रहा है।
यह खुलासा मंडलीय सत्यापन की टीम ने किया है, जबकि सभी शौचालयों में टंकी निर्माण के लिए विभाग की ओर से लाभार्थी को धनराशि दी गई थी। फिलहाल इस खुलासे के बाद विभागीय अधिकारियों में खलबली मची हुई है। स्वच्छ भारत मिशन के तहत जिले में करीब पौने तीन लाख शौचालयों का निर्माण कराया गया। वहीं बेसलाइन सर्वे 2012 के आधार पर विभाग ने जिले को ओडीएफ घोषित कर दिया। वहीं विभाग की ओर से जिला स्तरीय अधिकारियों से सत्यापन भी कराया गया, लेकिन जिला स्तरीय अधिकारियों ने अपनी सत्यापन रिपोर्ट में शौचालयों पर पानी की व्यवस्था का नहीं होना अंकित नहीं किया।
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अब मंडलीय स्तर से हो रहे सत्यापन यह खुलकर सामने आ रहा है। मंडलीय स्तर के सत्यापन पानी की उपलब्धता नहीं होने की बात खुलकर आने के बाद विभागीय अधिकारियों ने लाभार्थियों पर टंकी का निर्माण करने के लिए दबाव बनाना शुरू कर दिया है। मंडलीय सत्यापन होने के बाद प्रदेश स्तर से भी एक टीम शौचालय निर्माण की हकीकत देखने के लिए आएगी।
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