{"_id":"5c25235fbdec2256a7705753","slug":"11545937759-hathras-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"डिप्थीरिया की दस्तक से स्वास्थ्य महकमा अलर्ट","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
डिप्थीरिया की दस्तक से स्वास्थ्य महकमा अलर्ट
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, हाथरस
हाथरस। प्रदेश के कई जिलों में डिप्थीरिया (गला घोंटू) फैल रहा है। इसे लेकर स्वास्थ्य विभाग भी सतर्क हो गया है। यहां रेपिड रेस्पांस टीम (आरआरटी) को सक्रिय कर दिया गया है। आवश्यक दवाओं और टीके की उपलब्धता सुनिश्चित की जा रही है।
स्वास्थ्य महकमे द्वारा इन-दिनों टीकाकरण अभियान चलाया जा रहा है। डिप्थीरिया से बचाव के लिए तीन प्राथमिक टीकाकरण और दो बूस्टर खुराक दी जाती है। जिला प्रतिरक्षण अधिकारी डॉ. विजेंद्र सिंह ने बताया कि वैक्सीनेशन से बच्चे को डिप्थीरिया बीमारी से बचाया जा सकता है। बच्चे को छठवें, 10वें और 14वें सप्ताह में टीकाकरण किया जाता है।
16 से 24 माह पर डीपीटी का पहला बूस्टर और पांच साल में दूसरा बूस्टर लगाया जाता है। इसके अलावा गंभीर परिस्थिति में बच्चे को एंटी टॉक्सिन भी दिया जाता है। टीकाकरण हो जाने के बाद डिप्थीरिया की संभावना कम रहती है। उन्होंने बताया यदि बच्चों में सांस लेने में कठिनाई, गर्दन में सूजन, त्वचा का रंग नीला और बुखार के लक्षण दिखे तो अभिभावक नजदीक के चिकित्सालय और स्वास्थ्य केंद्रों में तुरंत उसकी जांच कराएं।
विज्ञापन
विज्ञापन
हाथरस। प्रदेश के कई जिलों में डिप्थीरिया (गला घोंटू) फैल रहा है। इसे लेकर स्वास्थ्य विभाग भी सतर्क हो गया है। यहां रेपिड रेस्पांस टीम (आरआरटी) को सक्रिय कर दिया गया है। आवश्यक दवाओं और टीके की उपलब्धता सुनिश्चित की जा रही है।
स्वास्थ्य महकमे द्वारा इन-दिनों टीकाकरण अभियान चलाया जा रहा है। डिप्थीरिया से बचाव के लिए तीन प्राथमिक टीकाकरण और दो बूस्टर खुराक दी जाती है। जिला प्रतिरक्षण अधिकारी डॉ. विजेंद्र सिंह ने बताया कि वैक्सीनेशन से बच्चे को डिप्थीरिया बीमारी से बचाया जा सकता है। बच्चे को छठवें, 10वें और 14वें सप्ताह में टीकाकरण किया जाता है।
विज्ञापन
16 से 24 माह पर डीपीटी का पहला बूस्टर और पांच साल में दूसरा बूस्टर लगाया जाता है। इसके अलावा गंभीर परिस्थिति में बच्चे को एंटी टॉक्सिन भी दिया जाता है। टीकाकरण हो जाने के बाद डिप्थीरिया की संभावना कम रहती है। उन्होंने बताया यदि बच्चों में सांस लेने में कठिनाई, गर्दन में सूजन, त्वचा का रंग नीला और बुखार के लक्षण दिखे तो अभिभावक नजदीक के चिकित्सालय और स्वास्थ्य केंद्रों में तुरंत उसकी जांच कराएं।
विज्ञापन