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Hardoi News: 25 दिन बाद बदली गई डिजिटल मशीन की एक्सरे हेड ट्यूब
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फोटो-07- मेडिकल कॉलेज के एक्स-रे मशीन की मरम्मत करते टेक्नीशियन। संवाद
हरदोई। डिजिटल एक्सरे मशीन को लेकर कार्यदायी संस्था की हीलाहवाली मेडिकल कॉलेज के लिए फजीहत का सबब बनी है।
जितने दिन मशीन चलती नहीं उससे कहीं अधिक दिन खराब रहती है। दो माह तक खराब रही मशीन बनने के बाद बमुश्किल 20 दिन चली थी और बंद हो गई। अब 25 दिन बाद फिर से मशीन को बनाने की कवायद शुरू हुई है। उम्मीद है शुक्रवार तक काम पूरा कर लिया जाएगा।
मेडिकल काॅलेज की डिजिटल एक्सरे मशीन इस साल चौथी बार खराब हुई है और अब बनाई जा रही है। मशीन जनवरी में सही की गई थी जैसे तैसे अप्रैल तक काम हुआ। अप्रैल में मशीन का प्रिंटेड सर्किट बोर्ड (पीसीबी) खराब हुआ। इसी बीच विद्युत आपूर्ति नियंत्रित करने को लगा सरवो भी खराब हो गया।
आठ जुलाई को मशीन बनाई गई लेकिन कुछ घंटों में ही खराब हो गई। दो अगस्त को मशीन दोबारा बनी और महज 20 दिन चली। बीती 22 अगस्त को फिर खराब हो गई थी। एक्सरे हेड ट्यूब खराब होने से मशीन काम नहीं कर रही है। वहीं मरीजों को पोर्टेबल मशीन से एक्सरे कराने को मजबूर होना पड़ रहा था। इसमें मरीजों को फिल्म भी नहीं मिल रही है।
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उधर, सायरिक्स कंपनी की हीलाहवाली के कारण 25 दिन से मशीन खराब है। बृहस्पतिवार काे कंपनी के अभियंता प्रद्युम्न और आसिफ ने संतोष के सहयोग से मेडिकल कॉलेज पहुंच कर मशीन की मरम्मत शुरू की। एक्सरे टेक्नीशियन सुमित मिश्रा ने बताया कि ओपीडी में आने वाले सभी मरीजाें के एक्सरे होने के बाद ही मशीन का काम कराया जा रहा है।
स्पेन से मंगवाए गए मशीन के पार्ट्स
सायरिक्स कंपनी के अभियंता प्रद्युम्न ने बताया कि डिजिटल मशीन स्पेन की है। ऐसे में इसके पार्ट्स भी वहीं से मंगवाने पड़ते हैं। पार्ट्स भी काफी महंगे हैं। अभी इसके पहले मशीन में करीब 11 लाख रुपये लगे थे। अब करीब आठ लाख रुपये की एक्सरे हेड ट्यूब को मंगवाया गया है। स्पेन से पार्ट्स आते हैं, इसलिए समय लगता है। मशीन को बनाने का काम शुरू हो गया है। उम्मीद है कि कल तक काम पूरा हो जाएगा।
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जितने दिन मशीन चलती नहीं उससे कहीं अधिक दिन खराब रहती है। दो माह तक खराब रही मशीन बनने के बाद बमुश्किल 20 दिन चली थी और बंद हो गई। अब 25 दिन बाद फिर से मशीन को बनाने की कवायद शुरू हुई है। उम्मीद है शुक्रवार तक काम पूरा कर लिया जाएगा।
मेडिकल काॅलेज की डिजिटल एक्सरे मशीन इस साल चौथी बार खराब हुई है और अब बनाई जा रही है। मशीन जनवरी में सही की गई थी जैसे तैसे अप्रैल तक काम हुआ। अप्रैल में मशीन का प्रिंटेड सर्किट बोर्ड (पीसीबी) खराब हुआ। इसी बीच विद्युत आपूर्ति नियंत्रित करने को लगा सरवो भी खराब हो गया।
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आठ जुलाई को मशीन बनाई गई लेकिन कुछ घंटों में ही खराब हो गई। दो अगस्त को मशीन दोबारा बनी और महज 20 दिन चली। बीती 22 अगस्त को फिर खराब हो गई थी। एक्सरे हेड ट्यूब खराब होने से मशीन काम नहीं कर रही है। वहीं मरीजों को पोर्टेबल मशीन से एक्सरे कराने को मजबूर होना पड़ रहा था। इसमें मरीजों को फिल्म भी नहीं मिल रही है।
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उधर, सायरिक्स कंपनी की हीलाहवाली के कारण 25 दिन से मशीन खराब है। बृहस्पतिवार काे कंपनी के अभियंता प्रद्युम्न और आसिफ ने संतोष के सहयोग से मेडिकल कॉलेज पहुंच कर मशीन की मरम्मत शुरू की। एक्सरे टेक्नीशियन सुमित मिश्रा ने बताया कि ओपीडी में आने वाले सभी मरीजाें के एक्सरे होने के बाद ही मशीन का काम कराया जा रहा है।
स्पेन से मंगवाए गए मशीन के पार्ट्स
सायरिक्स कंपनी के अभियंता प्रद्युम्न ने बताया कि डिजिटल मशीन स्पेन की है। ऐसे में इसके पार्ट्स भी वहीं से मंगवाने पड़ते हैं। पार्ट्स भी काफी महंगे हैं। अभी इसके पहले मशीन में करीब 11 लाख रुपये लगे थे। अब करीब आठ लाख रुपये की एक्सरे हेड ट्यूब को मंगवाया गया है। स्पेन से पार्ट्स आते हैं, इसलिए समय लगता है। मशीन को बनाने का काम शुरू हो गया है। उम्मीद है कि कल तक काम पूरा हो जाएगा।

फोटो-07- मेडिकल कॉलेज के एक्स-रे मशीन की मरम्मत करते टेक्नीशियन। संवाद