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ग्रामीणों ने बनाया पशु आश्रय स्थल, चंदे से किया चारे का इंतजाम

Wed, 01 Jan 2020 11:06 PM IST
Kanpur	 Bureau कानपुर ब्यूरो
Updated Wed, 01 Jan 2020 11:06 PM IST
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villagers contribute money for cow shelter
फोटो-09- ग्रामीणों द्वारा बनाए गए आश्रय स्थल में बंद मवेशी। संवाद न्यूज एजेंसी - फोटो : HARDOI
बघौली। अहिरोरी ब्लॉक के जमुनिया गांव के ग्रामीणों ने अन्ना मवेशियों से फसलों को बचाने के लिए खुद नई पहल की है। ग्रामीणों ने आपसी सहयोग से गांव के सरस हाट परिसर की खाली भूमि पर अस्थाई पशु आश्रय स्थल विकसित कर लिया। आवारा मवेशियों को आश्रय स्थल में बंद किया गया है। सर्दी से मवेशियों को बचाने के लिए न सिर्फ तिरपाल लगाए गए हैं, बल्कि चंदा कर उनके चारे पानी का भी इंतजाम कर रहे हैं।
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अहिरोरी ब्लाक के जमुनिया गांव के लोग लंबे से समय से अन्ना मवेशियों से परेशान हैं। आए दिन मवेशी खेतों में खड़ी फसल खराब करते हैं। मजबूरन फसल बचाने के लिए लोगों को दिन के साथ रातों में खेत में रहकर रतजगा करना पड़ रहा है। परेशानी बढ़ी तो लोगों ने खुद ही आपस में चर्चा कर समस्या का समाधान तलाशना शुरू कर दिया। ग्रामीणों ने आपस में चंदा जुटाया और गांव के बाहर पड़ी सरस हॉट की खाली भूमि पर खंभे लगाकर भूमि की रस्सी से हद बांध पशु आश्रय स्थल विकसित कर लिया। इसके बाद ग्रामीणों ने अन्ना मवेशियों को आश्रय स्थल में पहुंचाया। ग्रामीणों ने मवेशियों को सर्दी से बचाने के लिए तिरपाल का इंतजाम किया और चंदा जुटाकर उनके लिए चारे व पानी का इंतजाम दुरुस्त किया। ग्रामीणों द्वारा की गई इस पहल को आस पास के लोगों को सराहा जा रहा है। लोगों का कहना है कि प्रशासन से मदद की आस लगाने से बेहतर है कि लोग खुद आगे आएं और ऐसा काम करें जो दूसरों के लिए नजीर बन जाएं। वहीं जमुनिया गांव के लोगों का कहना है कि आस पास के अन्ना मवेशियों को आश्रय स्थल में बंद करने के बाद खेतों कम मवेशी दिखाई पड़ रहे हैं।
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गांव में ग्रामीणों द्वारा अन्ना गोवंशों को संरक्षित किया गया है। यह अच्छा प्रयास है। गांव में स्थायी पशु आश्रय स्थल के भूमि तलाश की जा रही है। भूमि उपलब्ध होते ही आश्रय स्थल बनवाया जाएगा।
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धीरेंद्र कुमार, ग्राम विकास अधिकारी ग्रा. पं. जमुनिया
जमुनिया गांव निवासी प्रधान यादव ने बताया कि मवेशियों के झुंड फसलें उजाड़ रहे हैं। गांव के लोगों ने इस समस्या से निपटने की रणनीति तय की और प्रभावी ढंग से उस पर अमल किया।
जमुनिया गांव निवासी पप्पू वर्मा ने बताया कि मवेशियों को आश्रय स्थल तक लाना और उनके चारे का प्रबंध करना बड़ी जिम्मेदारी है। ग्रामीणों ने इसमें खुलकर साथ दिया है। सभी ने शुरुआत में सौ-सौ रुपये चंदा दिया है। जरूरत पड़ने पर फिर सब मदद करेंगे।
जमुनिया गांव निवासी झल्लू सिंह ने बताया कि आश्रय स्थल बनाना, उसमें मवेशी लाना और उनके खान पान का इंतजाम करना, काम मुश्किल था। सबने सहयोग किया, इससे किसानों को काफी राहत मिली है।

जमुनिया गांव निवासी पुनीत ने बताया कि आश्रय स्थल में दर्जनों मवेशी लाए गए हैं। अच्छी बात यह है कि आर्थिक सहयोग देने के साथ ही लोग गोवंशों की सेवा मेें भी रुचि ले रहे हैं। सबके सहयोग से व्यवस्था अनवरत जारी रखी जाएगी।
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