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Hardoi News: जिले में पंजीकृत ई-रिक्शे 22 हजार, शहर में ही 10 हजार से अधिक

Wed, 10 Sep 2025 10:40 PM IST
Kanpur	 Bureau कानपुर ब्यूरो
Updated Wed, 10 Sep 2025 10:40 PM IST
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There are 22 thousand e-rickshaws registered in the district, and more than 10 thousand in the city itself
हरदोई। शहर में यातायात व्यवस्था के लिए संचालित ई-रिक्शा अब परेशानी का सबब बन चुके हैं।
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जिले में पंजीकृत ई-रिक्शों के सापेक्ष कहीं अधिक ई-रिक्शा सड़कों पर दौड़ रहे हैं। ई-रिक्शा बिना पंजीकरण और वैरिफिकेशन के सड़क पर चल रहे हैं। तमाम नाबालिग भी ई-रिक्शा चला रहे हैं। इसके बाद भी एआरटीओ और यातायात विभाग आंखे मूंद कर बैठा है। दिनों दिन बढ़ रहे ई-रिक्शों से आए दिन जाम तो लग ही रहा है। साथ ही दुर्घटनाओं में भी इजाफा हो रहा है।
जिले में ई-रिक्शों की बाढ़ सी आ गई है। शहर से लेकर कस्बा और गांव में ई-रिक्शा इतने अधिक हो गए हैं कि सड़क पर चलना मुश्किल है। शहर में तो स्थिति यह है कि सड़क पर निकलो तो हर सड़क और चौराहों पर सिर्फ ई-रिक्शा ही नजर आते हैं। ई-रिक्शों के चलने से लोगों को रोजगार तो मिला है लेकिन शहर की ट्रैफिक व्यवस्था बदतर हो जाती है।
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उप संभागीय परिवहन विभाग के आंकड़ों की माने तो जिले में सिर्फ 22,265 ई-रिक्शे पंजीकृत हैं जबकि जिले भर में इससे दो गुने से अधिक ई-रिक्शा फर्राटा भर रहे हैं। अकेले शहर की बात करें तो यहां 10 हजार से अधिक ई-रिक्शा चल रहे हैं। ई-रिक्शों का न तो कोई रूट है और न ही परमिट। पूरे शहर भर में ई-रिक्शा यातायात व्यवस्था को धता बता रहे हैं। ई-रिक्शों पर न तो प्रशिक्षित ड्राइवर हैं और न ही इनके पास लाइसेंस है। तमाम ई-रिक्शा चालक नाबालिग हैं। इसके बाद भी एआरटीओ और यातायात विभाग कोई कार्रवाई नहीं कर रहा है।
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ई-रिक्शों से सड़क पर बढ़ गया जाम
ई-रिक्शों के लिए रूट निर्धारित हुआ था लेकिन ई-रिक्शा पूरे शहर में घूम रहे हैं। ऐसे में रिक्शों के कारण शहर के हर मार्ग और चौराहों पर जाम की स्थिति हर वक्त बनी रहती है। इतना ही नहीं बेतरतीब ढंग से फुटपाथ पर खड़े होने और यात्रियाें को बिठाने के चक्कर में ई-रिक्शा चालक दुर्घटनाओं को भी अंजाम देते हैं। इसके बाद भी कोई कार्रवाई नहीं हो रही है।



अभियान चलाकर सभी ई-रिक्शों के पेपर जांचे जाएंगे। वैसे भी ई-रिक्शा मालिकों को सिर्फ पंजीयन कराना है, अगर कोई चालक पंजीकरण कराए बिना चला रहा है तो कार्रवाई की जाएगी। -अरविंद कुमार सिंह, एआरटीओ, हरदोई
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