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Hardoi News: राहत दिलाने के आश्वासन पर ग्रामीणों के चंदे से हुआ शैलेंद्र का अंतिम संस्कार
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संवाद न्यूज एजेंसी
हरियावां। रक्षाबंधन के मौके पर बच्चाें के लिए मिठाई का इंतजाम कर पाने में नाकाम होने पर जान देने वाले पिता का अंतिम संस्कार शुक्रवार को किया गया। दोपहर में परिजनों ने अंतिम संस्कार करने से इनकार कर दिया था, लेकिन राजस्व विभाग के अधिकारियों ने मौके पर पहुंचकर सभी योजनाओं का लाभ दिलाने के लिए आश्वस्त किया, तो परिजन भी मान गए।
हरियावां थाना क्षेत्र के कायमपुर गांव निवासी शैलेंद्र (30) मजदूरी करता था। वह कर्ज में भी डूबा हुआ था। रक्षाबंधन पर बच्चों ने मिठाई लाने की जिद शैलेंद्र से की, लेकिन शैलेंद्र के पास इसके लिए रुपये नहीं थे। ऐसे में शैलेंद्र ने फंदा लगाकर खुदकुशी कर ली। पोस्टमार्टम के बाद शव परिजनों को सौंप दिया गया, लेकिन ग्रामीणों और परिजनों न अंतिम संस्कार करने से इनकार कर दिया।
गांव के लोगों ने आपस में चंदाकर कफन और अंतिम संस्कार के लिए जरूरी अन्य सामग्री खरीदी, लेकिन किसी प्रशासनिक अफसर के न पहुंचने और भविष्य में कोई सहायता मिलने की उम्मीद खत्म होती देख ग्रामीणों के साथ ही परिजनों ने भी शव का अंतिम संस्कार करने से मना कर दिया। इस पर पहुंचे थानाध्यक्ष धमेंद्र गुप्ता ने पांच हजार रुपये तत्कालिक सहायता करते हुए दे दिए, जबकि नायब तहसीलदार राकेश कुमार ने भी तीन हजार रुपये की सहायता की।
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ग्राम प्रधान पति ने पचास किलो गेहूं की व्यवस्था कर दी। नायब तहसीलदार ने रहने के लिए आवास, कृषि भूमि का पट्टा, निराश्रित महिला पेंशन और राशन कार्ड एक सप्ताह के अंदर बनवाने के प्रति आश्वस्त किया। इसके बाद शव का अंतिम संस्कार हुआ।
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हरियावां। रक्षाबंधन के मौके पर बच्चाें के लिए मिठाई का इंतजाम कर पाने में नाकाम होने पर जान देने वाले पिता का अंतिम संस्कार शुक्रवार को किया गया। दोपहर में परिजनों ने अंतिम संस्कार करने से इनकार कर दिया था, लेकिन राजस्व विभाग के अधिकारियों ने मौके पर पहुंचकर सभी योजनाओं का लाभ दिलाने के लिए आश्वस्त किया, तो परिजन भी मान गए।
हरियावां थाना क्षेत्र के कायमपुर गांव निवासी शैलेंद्र (30) मजदूरी करता था। वह कर्ज में भी डूबा हुआ था। रक्षाबंधन पर बच्चों ने मिठाई लाने की जिद शैलेंद्र से की, लेकिन शैलेंद्र के पास इसके लिए रुपये नहीं थे। ऐसे में शैलेंद्र ने फंदा लगाकर खुदकुशी कर ली। पोस्टमार्टम के बाद शव परिजनों को सौंप दिया गया, लेकिन ग्रामीणों और परिजनों न अंतिम संस्कार करने से इनकार कर दिया।
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गांव के लोगों ने आपस में चंदाकर कफन और अंतिम संस्कार के लिए जरूरी अन्य सामग्री खरीदी, लेकिन किसी प्रशासनिक अफसर के न पहुंचने और भविष्य में कोई सहायता मिलने की उम्मीद खत्म होती देख ग्रामीणों के साथ ही परिजनों ने भी शव का अंतिम संस्कार करने से मना कर दिया। इस पर पहुंचे थानाध्यक्ष धमेंद्र गुप्ता ने पांच हजार रुपये तत्कालिक सहायता करते हुए दे दिए, जबकि नायब तहसीलदार राकेश कुमार ने भी तीन हजार रुपये की सहायता की।
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ग्राम प्रधान पति ने पचास किलो गेहूं की व्यवस्था कर दी। नायब तहसीलदार ने रहने के लिए आवास, कृषि भूमि का पट्टा, निराश्रित महिला पेंशन और राशन कार्ड एक सप्ताह के अंदर बनवाने के प्रति आश्वस्त किया। इसके बाद शव का अंतिम संस्कार हुआ।