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Hardoi News: सीडीओ के निर्देश मानने में आना कानी, सात ब्लॉकों के मनरेगा भुगतान में कर दी मनमानी
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फोटो-33-मनरेगा के तहत गूल खोदाई का काम करते मनरेगा मजदूर। आर्काइव
हरदोई। लंबे समय से लंबित मनरेगा के सामग्री अंश का भुगतान करने में खंड विकास अधिकारियों ने जमकर मनमानी की।
शासन से लेकर मुख्य विकास अधिकारी तक के दिशा निर्देश धरे रह गए। सात विकास खंडों में तय भुगतान से कहीं ज्यादा का भुगतान भी कर दिया गया। अब मनरेगा के जिम्मेदारों ने ज्यादा भुगतान करने वाले खंड विका अधिकारियों से जवाब तलब करने की तैयारी कर ली है।
मनरेगा के तहत कराए जाने वाले विकास कार्याें का भुगतान दो मदों में किया जाता है। श्रमांश में मजदूरी का भुगतान होता है। सामग्री अंश में विकास कार्य में इस्तेमाल की गई सामग्री का भुगतान किया जाता है। जनपद में लंबे समय से सामग्री अंश का भुगतान नहीं हुआ था। इसकी वजह सेंट्रल पूल से बजट जारी न होना था। बीती 10 सितंबर को सामग्री अंश का भुगतान करने के लिए केंद्र सरकार ने बजट जारी किया था। बजट जारी किए जाने की सूचना पहले ही दे दी गई थी।
सभी विकास खंडों को सामग्री अंश का भुगतान करने का मौका मिल जाए इसलिए मुख्य विकास अधिकारी ने ब्लाक वार भुगतान की अधिकतम सीमा तय कर दी थी। बावजूद इसके कई खंड विकास अधिकारियों ने अधिकतम सीमा से ज्यादा का भुगतान कर दिया। बावन, संडीला, शाहाबाद, कछौना, बेहंदर, हरियावां और कोथावां में तय अधिकतम सीमा से ज्यादा का भुगतान किया गया है। पौने आठ लाख रुपये से लेकर 67 लाख रुपये तक का अधिक भुगतान खंड विकास अधिकारियों ने किया है।
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किसने कितना ज्यादा कर दिया भुगतान
. बावन विकास खंड में भुगतान के लिए अधिकतम सीमा 171.01 लाख रुपये थी। यहां 238.55 लाख रुपये का भुगतान कर दिया गया। मतलब यह कि तय सीमा से 67.54 लाख रुपये ज्यादा का भुगतान किया गया।
. संडीला विकास खंड में अधिकतम भुगतान 83.83 लाख रुपये स्वीकृत था। यहां 109.79 लाख रुपये का भुगतान कर दिया गया। तय सीमा से 25.96 लाख रुपये का अधिक भुगतान किया गया है।
. शाहाबाद विकास खंड में 86.22 लाख रुपये का अधिकतम भुगतान हो सकता था। यहां भी 101.95 लाख रुपये का भुगतान कर दिया गया। मतलब 15.73 लाख रुपये का अधिक भुगतान हो गया।
. कछौना विकास खंड में 19.77 लाख रुपये की सीमा भुगतान के लिए तय थी। यहां 33.52 लाख रुपये का भुगतान हुआ है। इस हिसाब से यहां 13.75 लाख रुपये का ज्यादा भुगतान किया गया है।
. बेहंदर विकास खंड में 58.35 लाख रुपये का भुगतान अनुमन्य था। यहां 68.03 लाख रुपये का भुगतान हुआ है। संडीला में 9.68 लाख रुपये का ज्यादा भुगतान किया गया है।
. हरियावां विकास खंड में 73.03 लाख रुपये का भुगतान करने की अनुमति थी। यहां भी 81.67 लाख रुपये का भुगतान कर दिया गया। तय सीमा से 8.64 लाख रुपये का ज्यादा भुगतान हुआ है।
. कोथावां विकास खंड में 50.40 लाख रुपये का अधिकतम भुगतान किया जा सकता था। यहां 58.16 लाख रुपये का भुगतान हुआ है। 7.76 लाख रुपये का ज्यादा भुगतान हुआ है।
गोशालाओं का भुगतान नहीं, इंटरलॉकिंग पर लुटाया बजट
शासन के साथ ही डीएम और सीडीओ के भी स्पष्ट निर्देश थे कि भुगतान के दौरान प्राथमिकता वाले कार्याें का ध्यान रखा जाए। अस्थाई गोशालाओं के निर्माण पर हुए खर्च का भुगतान प्राथमिकता से करने के निर्देश थे। बावजूद इसके ज्यादातर जगहों पर इंटरलॉकिंग मार्ग और नालियों पर ही बजट लुटाया गया। कोथावां विकास खंड में तो गोशालाओं के कामों का कोई भी भुगतान ही नहीं हुआ।
अब तक मेरे संज्ञान में यह बात नहीं थी। पूरे मामले की विस्तृत जांच करा लेंगे। तय सीमा से ज्यादा भुगतान और प्राथमिकता वाले कामों का भुगतान न होने की भी जांच कराएंगे। जो भी दोषी मिलेगा उसके खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी। -सान्या छाबड़ा, सीडीओ
सात विकास खंडों में तय अधिकतम राशि से ज्यादा का भुगतान किया है। इन सभी के खंड विकास अधिकारियों को नोटिस जारी की जाएगी। स्पष्टीकरण तलब करने के बाद पूरा मामला उच्चाधिकारियों के सामने रखेंगे। जो जिम्मेदार होगा, उस पर नियम के मुताबिक कार्रवाई होगी। -रवि प्रकाश सिंह, उपायुक्त मनरेगा
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शासन से लेकर मुख्य विकास अधिकारी तक के दिशा निर्देश धरे रह गए। सात विकास खंडों में तय भुगतान से कहीं ज्यादा का भुगतान भी कर दिया गया। अब मनरेगा के जिम्मेदारों ने ज्यादा भुगतान करने वाले खंड विका अधिकारियों से जवाब तलब करने की तैयारी कर ली है।
मनरेगा के तहत कराए जाने वाले विकास कार्याें का भुगतान दो मदों में किया जाता है। श्रमांश में मजदूरी का भुगतान होता है। सामग्री अंश में विकास कार्य में इस्तेमाल की गई सामग्री का भुगतान किया जाता है। जनपद में लंबे समय से सामग्री अंश का भुगतान नहीं हुआ था। इसकी वजह सेंट्रल पूल से बजट जारी न होना था। बीती 10 सितंबर को सामग्री अंश का भुगतान करने के लिए केंद्र सरकार ने बजट जारी किया था। बजट जारी किए जाने की सूचना पहले ही दे दी गई थी।
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सभी विकास खंडों को सामग्री अंश का भुगतान करने का मौका मिल जाए इसलिए मुख्य विकास अधिकारी ने ब्लाक वार भुगतान की अधिकतम सीमा तय कर दी थी। बावजूद इसके कई खंड विकास अधिकारियों ने अधिकतम सीमा से ज्यादा का भुगतान कर दिया। बावन, संडीला, शाहाबाद, कछौना, बेहंदर, हरियावां और कोथावां में तय अधिकतम सीमा से ज्यादा का भुगतान किया गया है। पौने आठ लाख रुपये से लेकर 67 लाख रुपये तक का अधिक भुगतान खंड विकास अधिकारियों ने किया है।
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किसने कितना ज्यादा कर दिया भुगतान
. बावन विकास खंड में भुगतान के लिए अधिकतम सीमा 171.01 लाख रुपये थी। यहां 238.55 लाख रुपये का भुगतान कर दिया गया। मतलब यह कि तय सीमा से 67.54 लाख रुपये ज्यादा का भुगतान किया गया।
. संडीला विकास खंड में अधिकतम भुगतान 83.83 लाख रुपये स्वीकृत था। यहां 109.79 लाख रुपये का भुगतान कर दिया गया। तय सीमा से 25.96 लाख रुपये का अधिक भुगतान किया गया है।
. शाहाबाद विकास खंड में 86.22 लाख रुपये का अधिकतम भुगतान हो सकता था। यहां भी 101.95 लाख रुपये का भुगतान कर दिया गया। मतलब 15.73 लाख रुपये का अधिक भुगतान हो गया।
. कछौना विकास खंड में 19.77 लाख रुपये की सीमा भुगतान के लिए तय थी। यहां 33.52 लाख रुपये का भुगतान हुआ है। इस हिसाब से यहां 13.75 लाख रुपये का ज्यादा भुगतान किया गया है।
. बेहंदर विकास खंड में 58.35 लाख रुपये का भुगतान अनुमन्य था। यहां 68.03 लाख रुपये का भुगतान हुआ है। संडीला में 9.68 लाख रुपये का ज्यादा भुगतान किया गया है।
. हरियावां विकास खंड में 73.03 लाख रुपये का भुगतान करने की अनुमति थी। यहां भी 81.67 लाख रुपये का भुगतान कर दिया गया। तय सीमा से 8.64 लाख रुपये का ज्यादा भुगतान हुआ है।
. कोथावां विकास खंड में 50.40 लाख रुपये का अधिकतम भुगतान किया जा सकता था। यहां 58.16 लाख रुपये का भुगतान हुआ है। 7.76 लाख रुपये का ज्यादा भुगतान हुआ है।
गोशालाओं का भुगतान नहीं, इंटरलॉकिंग पर लुटाया बजट
शासन के साथ ही डीएम और सीडीओ के भी स्पष्ट निर्देश थे कि भुगतान के दौरान प्राथमिकता वाले कार्याें का ध्यान रखा जाए। अस्थाई गोशालाओं के निर्माण पर हुए खर्च का भुगतान प्राथमिकता से करने के निर्देश थे। बावजूद इसके ज्यादातर जगहों पर इंटरलॉकिंग मार्ग और नालियों पर ही बजट लुटाया गया। कोथावां विकास खंड में तो गोशालाओं के कामों का कोई भी भुगतान ही नहीं हुआ।
अब तक मेरे संज्ञान में यह बात नहीं थी। पूरे मामले की विस्तृत जांच करा लेंगे। तय सीमा से ज्यादा भुगतान और प्राथमिकता वाले कामों का भुगतान न होने की भी जांच कराएंगे। जो भी दोषी मिलेगा उसके खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी। -सान्या छाबड़ा, सीडीओ
सात विकास खंडों में तय अधिकतम राशि से ज्यादा का भुगतान किया है। इन सभी के खंड विकास अधिकारियों को नोटिस जारी की जाएगी। स्पष्टीकरण तलब करने के बाद पूरा मामला उच्चाधिकारियों के सामने रखेंगे। जो जिम्मेदार होगा, उस पर नियम के मुताबिक कार्रवाई होगी। -रवि प्रकाश सिंह, उपायुक्त मनरेगा