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Hardoi News: सवा लाख की आबादी और भीषण गर्मी में पानी के सिर्फ चार सार्वजनिक बूथ
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हरदोई। सूरज की तपिश और लू के थपेड़े दिन प्रतिदिन अपनी तेजी दिखा रहे हैं। गर्मी से बचाव के लिए शहर में नाम के लिए ही इंतजाम हैं।
सवा लाख की शहर की आबादी और गांवों से आने वाले लोगों के लिए शहर में शीतल पानी के लिए चार सार्वजनिक बूथ हैं। छांव का कोई इंतजाम नहीं है। इससे लोगों को धूप और लू के थपेड़ों के बीच ही आवागमन करना पड़ रहा है।
इस बार गर्मी के मौसम में सूरज की तपिश ने रिकॉर्ड तोड़ा है। पारा 45 डिग्री तक पहुंच चुका है। तपिश के साथ ही चलने वाली लू के थपेड़ों से आमजन जीवन के साथ ही जीव-जंतुओं की हालत खराब है। गर्मी से बचाव के लिए सरकारी तौर पर कोई खास इंतजाम नहीं किए गए हैं। शहर में ही करीब सवा लाख से अधिक की आबादी और गांवों से आने-जाने वाले लोगों के लिए शीतल पेयजल उपलब्ध कराने के लिए चार वाटर कूलर ही लगे हुए हैं। इंडिया मार्का हैंडपंप भी नाममात्र ही बचे हैं। इससे ही लोगों को अपनी प्यास बुझाने की व्यवस्था करनी पड़ती है। शहर में अव्वल मार्गों के किनारे पेड़ ही नहीं बचे हैं। कुछ मार्गों पर पेड़ हैं, तो वह बिजली लाइन के कारण छंटाई करा दिए जाने से लोगों को छांव नहीं दे पा रहे हैं।
निकाय की ओर से भी शहर में अस्थाई छांव का कोई इंतजाम नहीं किया गया है। इससे लोगों को खुले मार्गों पर सूरज की तपिश और लू के थपेड़ों के बीच ही अपना सफर तय करना पड़ रहा है। पैदल सफर तय करने वालों को ऐसे में दिक्कतों का सामना करना पड़ता है।
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दैवी आपदा की गाइडलाइन में लोगों को लू से बचाव के लिए सलाह दी गई है। पानी की कमी पूरी करने के लिए जिला चिकित्सालय सहित सभी सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों पर ओआरएस पैकेट के वितरण के लिए कॉर्नर बनवाए गए हैं। जिला चिकित्सालय में लू और गर्मी से प्रभावित व्यक्ति के उपचार के लिए एक वार्ड और सभी सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों पर दो-दो बेड आरक्षित कराए गए हैं। गांवों में तालाबों में पानी भराया जा रहा है। लू और गर्मी से बचाव के लिए लोगों को जागरूक किया जा रहा है। -मंगला प्रसाद सिंह, जिलाधिकारी
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सवा लाख की शहर की आबादी और गांवों से आने वाले लोगों के लिए शहर में शीतल पानी के लिए चार सार्वजनिक बूथ हैं। छांव का कोई इंतजाम नहीं है। इससे लोगों को धूप और लू के थपेड़ों के बीच ही आवागमन करना पड़ रहा है।
इस बार गर्मी के मौसम में सूरज की तपिश ने रिकॉर्ड तोड़ा है। पारा 45 डिग्री तक पहुंच चुका है। तपिश के साथ ही चलने वाली लू के थपेड़ों से आमजन जीवन के साथ ही जीव-जंतुओं की हालत खराब है। गर्मी से बचाव के लिए सरकारी तौर पर कोई खास इंतजाम नहीं किए गए हैं। शहर में ही करीब सवा लाख से अधिक की आबादी और गांवों से आने-जाने वाले लोगों के लिए शीतल पेयजल उपलब्ध कराने के लिए चार वाटर कूलर ही लगे हुए हैं। इंडिया मार्का हैंडपंप भी नाममात्र ही बचे हैं। इससे ही लोगों को अपनी प्यास बुझाने की व्यवस्था करनी पड़ती है। शहर में अव्वल मार्गों के किनारे पेड़ ही नहीं बचे हैं। कुछ मार्गों पर पेड़ हैं, तो वह बिजली लाइन के कारण छंटाई करा दिए जाने से लोगों को छांव नहीं दे पा रहे हैं।
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निकाय की ओर से भी शहर में अस्थाई छांव का कोई इंतजाम नहीं किया गया है। इससे लोगों को खुले मार्गों पर सूरज की तपिश और लू के थपेड़ों के बीच ही अपना सफर तय करना पड़ रहा है। पैदल सफर तय करने वालों को ऐसे में दिक्कतों का सामना करना पड़ता है।
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दैवी आपदा की गाइडलाइन में लोगों को लू से बचाव के लिए सलाह दी गई है। पानी की कमी पूरी करने के लिए जिला चिकित्सालय सहित सभी सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों पर ओआरएस पैकेट के वितरण के लिए कॉर्नर बनवाए गए हैं। जिला चिकित्सालय में लू और गर्मी से प्रभावित व्यक्ति के उपचार के लिए एक वार्ड और सभी सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों पर दो-दो बेड आरक्षित कराए गए हैं। गांवों में तालाबों में पानी भराया जा रहा है। लू और गर्मी से बचाव के लिए लोगों को जागरूक किया जा रहा है। -मंगला प्रसाद सिंह, जिलाधिकारी