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Hardoi News: वायरल बुखार में भी घट रहीं प्लेटलेट्स, 107 दिन में 299 यूनिट की खपत
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फोटो-58-मेडिकल कॉलेज के रक्तकोष में प्लेटलेट्स निकालते टेक्नीशियन अकील खान और डॉ. दामिनी सिंह।
हरदोई। यूं तो डेंगू होने पर मरीज की प्लेटलेट्स की संख्या कम होती थी लेकिन इस बार सामान्य बुखार मेें भी प्लेटलेट्स तेजी से घट रही हैं। चिकित्सकों के साथ ही सरकारी रक्तकोष के आंकड़े भी इसकी गवाही देते हैं। एक जुलाई से 15 अक्तूबर तक जिले में डेंगू के 46 मामले आए और मलेरिया के 110। बावजूद इसके इन 107 दिनों में जिले के रक्तकोष से 299 यूनिट प्लेटलेट्स जरूरतमंदों को चिकित्सीय सलाह पर दी गईं। जाहिर सी बात है कि सामान्य और वायरल बुखार में भी प्लेटलेट्स तेजी से घट रही हैं।
बारिश शुरू होते ही मौसम में उतार चढ़ाव आने लगता है। कभी भीषण गर्मी तो कभी तेज उमस और इस सबके बीच कई बार सुबह शाम की ठंडक भी वायरल बुखार को दस्तक दे देती है। बारिश में मच्छर जनित रोग भी तेजी से फैलते हैं। आमतौर पर डेंंगू के मरीज बड़ी संख्या में सामने आते रहे हैं लेकिन एलाइजा टेस्ट में जनपद में एक जुलाई से 15 अक्तूबर के बीच 107 दिनों में डेंगू के महज 46 मामले ही सामने आए। इनमें से कई मरीजों की प्लेटलेट्स घटीं तो उन्हें प्लेटलेट्स चढ़वानी पड़ीं। रक्तकोष के आंकड़ों पर निगाह दौड़ाएं तो पता चलता कि जुलाई के 31 दिनों में 66 यूनिट, अगस्त के 31 दिनों में 67 यूनिट और सितंबर के 30 दिनों में 120 यूनिट प्लेटलेट्स जिले के मरीजों के लिए खप गईं।
अक्तूबर के 15 दिन में ही 46 यूनिट प्लेटलेट्स जरूरतमंदों को दी जा चुकी हैं। एक बानगी लगता है कि प्लेटलेट्स की मांग इतनी है लेकिन डेंगू से पीड़ितों की संख्या कम है। मेडिकल कॉलेज के मेडिसिन विभागाध्यक्ष डॉ. विकास चंद्र विद्यार्थी बताते हैं कि पिछले दो साल से वायरल बुखार में भी तेजी से प्लेटलेट्स घटने की बात सामने आ रही है। इसके अलावा भीषण मलेरिया होने पर भी प्लेटलेट्स घट रही हैं। इसीलिए प्लेटलेट्स की खपत ज्यादा हो रही है। आंकड़ों में हेराफेरी की बात को वह सिरे से खारिज करते हैं।
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बुखार को न लें हल्के में, चिकित्सक की सलाह पर लें दवाई
डॉ. विकास चंद्र विद्यार्थी कहते हैं कि बुखार आने पर बिना चिकित्सक को दिखाए दवा न लें। बुखार आने पर कई बार लोग मेडिकल स्टोर से ही दवा खरीदकर खाने लगते हैं। यह ठीक नहीं है। बुखार को हल्के में न लें लेकिन इससे घबराने की भी जरूरत नहीं है। उचित इलाज से बुखार ठीक हो जाता है।
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बारिश शुरू होते ही मौसम में उतार चढ़ाव आने लगता है। कभी भीषण गर्मी तो कभी तेज उमस और इस सबके बीच कई बार सुबह शाम की ठंडक भी वायरल बुखार को दस्तक दे देती है। बारिश में मच्छर जनित रोग भी तेजी से फैलते हैं। आमतौर पर डेंंगू के मरीज बड़ी संख्या में सामने आते रहे हैं लेकिन एलाइजा टेस्ट में जनपद में एक जुलाई से 15 अक्तूबर के बीच 107 दिनों में डेंगू के महज 46 मामले ही सामने आए। इनमें से कई मरीजों की प्लेटलेट्स घटीं तो उन्हें प्लेटलेट्स चढ़वानी पड़ीं। रक्तकोष के आंकड़ों पर निगाह दौड़ाएं तो पता चलता कि जुलाई के 31 दिनों में 66 यूनिट, अगस्त के 31 दिनों में 67 यूनिट और सितंबर के 30 दिनों में 120 यूनिट प्लेटलेट्स जिले के मरीजों के लिए खप गईं।
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अक्तूबर के 15 दिन में ही 46 यूनिट प्लेटलेट्स जरूरतमंदों को दी जा चुकी हैं। एक बानगी लगता है कि प्लेटलेट्स की मांग इतनी है लेकिन डेंगू से पीड़ितों की संख्या कम है। मेडिकल कॉलेज के मेडिसिन विभागाध्यक्ष डॉ. विकास चंद्र विद्यार्थी बताते हैं कि पिछले दो साल से वायरल बुखार में भी तेजी से प्लेटलेट्स घटने की बात सामने आ रही है। इसके अलावा भीषण मलेरिया होने पर भी प्लेटलेट्स घट रही हैं। इसीलिए प्लेटलेट्स की खपत ज्यादा हो रही है। आंकड़ों में हेराफेरी की बात को वह सिरे से खारिज करते हैं।
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बुखार को न लें हल्के में, चिकित्सक की सलाह पर लें दवाई
डॉ. विकास चंद्र विद्यार्थी कहते हैं कि बुखार आने पर बिना चिकित्सक को दिखाए दवा न लें। बुखार आने पर कई बार लोग मेडिकल स्टोर से ही दवा खरीदकर खाने लगते हैं। यह ठीक नहीं है। बुखार को हल्के में न लें लेकिन इससे घबराने की भी जरूरत नहीं है। उचित इलाज से बुखार ठीक हो जाता है।

फोटो-58-मेडिकल कॉलेज के रक्तकोष में प्लेटलेट्स निकालते टेक्नीशियन अकील खान और डॉ. दामिनी सिंह।