{"_id":"61f2dd17cef7013a635f9502","slug":"mallawa-hardoi-news-knp677435133","type":"story","status":"publish","title_hn":"राजस्व विभाग के अभिलेखों में दर्ज नहीं मल्लावां की पहचान","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
राजस्व विभाग के अभिलेखों में दर्ज नहीं मल्लावां की पहचान
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
मल्लावां। अंग्रेजी शासन काल में जिला मुख्यालय रहे मल्लावां (नगर) ने भले ही स्वतंत्रता संग्राम की अनगिनत यादें सहेज रखी हों, लेकिन मल्लावां अपनी पहचान के लिए आज भी संकट से जूझ रहा है। सुनने में यह लोगों को एक बार अजीब जरूर लगेगा पर यह एकदम सच है। क्योंकि राजस्व अभिलेखों में मल्लावां का नाम आज तक दर्ज नहीं है।
जानकारों की मानें तो 18 जून 1857 तक अंग्रेजी शासन में मल्लावां जिला मुख्यालय हुआ करता था। तब कलक्टर समेत अन्य अधिकारी, कर्मचारी मल्लावां मुख्यालय के कार्यालय में ही बैठते थे। इनके आवासीय परिसर आज भी बने हैं। जो अब जर्जर हो चुके हैं। जानकर बताते हैं कि मंगल पांडेय के नेतृत्व में जब स्वतंत्रता का पहला संग्राम शुरू हुआ था। तब भी अंग्रेजी शासन का मुख्यालय मल्लावां ही था। मल्लावां से भी कई क्रांतिकारी संग्राम के लिए निकले थे। वर्तमान समय में नगर पालिका परिषद मल्लावां है, लेकिन राजस्व अभिलेखों में मल्लावां नाम का कोई राजस्व गांव अभिलेखों में दर्ज नहीं हैं।
इसकी वजह चकबंदी की बंदोबस्त व्यवस्था बताई जा रही है। राजस्व अभिलेखों के अनुसार बंदीपुर, नशरतनगर, मोहिद्दीनपुर, श्यामपुर, गंगारामपुर, मिर्जापुर, भगवंतनगर, गोवर्धनपुर नाम से आठ राजस्व गांव अभिलेखों में दर्ज हैं। लेखपाल संगठन के तहसील मंत्री लेखपाल धर्मेंद्र यादव ने बताया कि मल्लावां कस्बे की जो भी भूमि है वह इन्हीं राजस्व नामों पर दर्ज है। इन्हीं के नाम से अंदर नगर पालिका दर्ज है। इन नामों से यहां की भूमि जानी जाती है। तहसील के वकील नीलमणि सिंह ने बताया कि अभिलेख अथवा विवादित संपत्तियों के वाद मुकदमे जो भी मल्लावां नगर के होते हैं। उनमें वही आठ राजस्व गांवों के नाम डाले जाते हैं। मुकदमों के निस्तारण होने पर राजस्व गांवों के नाम के साथ परगना मल्लावां जोड़ दिया जाता है।
विज्ञापन
राजस्व विभाग की वेबसाइट पर भी इन आठों गांवों के नाम से ही खतौनी निकलती है। खतौनी पर जैसे अन्य गांवों के साथ परगना मल्लावां लिखा रहता है। उसी तरह इन आठों गांवों की खतौनी पर भी परगना मल्लावां लिखा रहता है।
विज्ञापन
जानकारों की मानें तो 18 जून 1857 तक अंग्रेजी शासन में मल्लावां जिला मुख्यालय हुआ करता था। तब कलक्टर समेत अन्य अधिकारी, कर्मचारी मल्लावां मुख्यालय के कार्यालय में ही बैठते थे। इनके आवासीय परिसर आज भी बने हैं। जो अब जर्जर हो चुके हैं। जानकर बताते हैं कि मंगल पांडेय के नेतृत्व में जब स्वतंत्रता का पहला संग्राम शुरू हुआ था। तब भी अंग्रेजी शासन का मुख्यालय मल्लावां ही था। मल्लावां से भी कई क्रांतिकारी संग्राम के लिए निकले थे। वर्तमान समय में नगर पालिका परिषद मल्लावां है, लेकिन राजस्व अभिलेखों में मल्लावां नाम का कोई राजस्व गांव अभिलेखों में दर्ज नहीं हैं।
विज्ञापन
इसकी वजह चकबंदी की बंदोबस्त व्यवस्था बताई जा रही है। राजस्व अभिलेखों के अनुसार बंदीपुर, नशरतनगर, मोहिद्दीनपुर, श्यामपुर, गंगारामपुर, मिर्जापुर, भगवंतनगर, गोवर्धनपुर नाम से आठ राजस्व गांव अभिलेखों में दर्ज हैं। लेखपाल संगठन के तहसील मंत्री लेखपाल धर्मेंद्र यादव ने बताया कि मल्लावां कस्बे की जो भी भूमि है वह इन्हीं राजस्व नामों पर दर्ज है। इन्हीं के नाम से अंदर नगर पालिका दर्ज है। इन नामों से यहां की भूमि जानी जाती है। तहसील के वकील नीलमणि सिंह ने बताया कि अभिलेख अथवा विवादित संपत्तियों के वाद मुकदमे जो भी मल्लावां नगर के होते हैं। उनमें वही आठ राजस्व गांवों के नाम डाले जाते हैं। मुकदमों के निस्तारण होने पर राजस्व गांवों के नाम के साथ परगना मल्लावां जोड़ दिया जाता है।
विज्ञापन
राजस्व विभाग की वेबसाइट पर भी इन आठों गांवों के नाम से ही खतौनी निकलती है। खतौनी पर जैसे अन्य गांवों के साथ परगना मल्लावां लिखा रहता है। उसी तरह इन आठों गांवों की खतौनी पर भी परगना मल्लावां लिखा रहता है।