{"_id":"68753fbb69146a979c0b3c0e","slug":"life-imprisonment-to-nephew-who-killed-uncle-by-hitting-him-with-a-stick-hardoi-news-c-213-1-sknp1042-134317-2025-07-14","type":"story","status":"publish","title_hn":"Hardoi News: बांका मारकर चाचा की हत्या करने वाले भतीजे को उम्रकैद","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Hardoi News: बांका मारकर चाचा की हत्या करने वाले भतीजे को उम्रकैद
विज्ञापन
हरदोई। बांका मारकर चाचा की हत्या करने वाले भतीजे को आजीवन कारावास (उम्रकैद) की सजा सुनाई गई है। अपर जिला जज कोर्ट संख्या-4 यशपाल ने अभियुक्त पर 40 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया है। जुर्माना न देने पर छह माह की अतिरिक्त सजा भी काटनी होगी। जुर्माने की आधी रकम बतौर क्षतिपूर्ति रिपोर्ट दर्ज कराने वाले को देने के आदेश भी अपर जिला जज ने दिए हैं।
अतरौली थाना क्षेत्र के लालपुर बंजरा निवासी संजू पत्नी दीपू ने 12 अक्तूबर 2023 को रिपोर्ट दर्ज कराई थी। इसमें बताया था कि 11 अक्तूबर की रात लगभग साढ़े आठ बजे उसके ससुर उमाशंकर खाना खाकर मकान के बाहर पड़े टिन शेड के नीचे तखत पर लेटे थे।
इसी बीच पड़ोस में रहने वाला मिथुन उर्फ हरिश्चंद्र (मृतक का सगा भतीजा) आ गया। मिथुन शराब पीने का आदी था। यहां मिथुन और उमाशंकर की कहासुनी हो गई। मिथुन ने उमाशंकर की गर्दन पर बांका से प्रहार कर दिया। शोर सुनकर कई लोग मौके पर आ गए तो मिथुन मौके से भाग निकला।
विज्ञापन
अभियोजन पक्ष की ओर से 11 अभिलेखीय साक्ष्य और आठ गवाह पेश किए गए। सहायक जिला शासकीय अधिवक्ता भानु प्रताप सिंह ने मिथुन को अधिक से अधिक सजा दिए जाने का तर्क किया।
दूसरे पक्ष से अधिवक्ता रामदेव शुक्ला ने अभियुक्त को निर्दोष बताते हुए बरी करने का तर्क दिया। दोनों पक्षों की तर्कों को सुनने व पत्रावली पर मौजूद सबूतों के आधार पर अपर जिला जज ने सजा सुनाई है।
जानिएं, कब-कब क्या हुआ
- 11 अक्तूबर 2023 को हुई घटना।
- 12 अक्तूबर 2023 को रिपोर्ट दर्ज हुई।
- 9 फरवरी 2024 को आरोप तय हुए।
- 23 फरवरी 2024 अभियोजन साक्ष्य शुरू हुआ।
- 12 मार्च 2025 को अभियोजन साक्ष्य समाप्त हुए।
- 14 जुलाई 2025 को सजा सुनाई गई।
विज्ञापन
अतरौली थाना क्षेत्र के लालपुर बंजरा निवासी संजू पत्नी दीपू ने 12 अक्तूबर 2023 को रिपोर्ट दर्ज कराई थी। इसमें बताया था कि 11 अक्तूबर की रात लगभग साढ़े आठ बजे उसके ससुर उमाशंकर खाना खाकर मकान के बाहर पड़े टिन शेड के नीचे तखत पर लेटे थे।
विज्ञापन
इसी बीच पड़ोस में रहने वाला मिथुन उर्फ हरिश्चंद्र (मृतक का सगा भतीजा) आ गया। मिथुन शराब पीने का आदी था। यहां मिथुन और उमाशंकर की कहासुनी हो गई। मिथुन ने उमाशंकर की गर्दन पर बांका से प्रहार कर दिया। शोर सुनकर कई लोग मौके पर आ गए तो मिथुन मौके से भाग निकला।
विज्ञापन
अभियोजन पक्ष की ओर से 11 अभिलेखीय साक्ष्य और आठ गवाह पेश किए गए। सहायक जिला शासकीय अधिवक्ता भानु प्रताप सिंह ने मिथुन को अधिक से अधिक सजा दिए जाने का तर्क किया।
दूसरे पक्ष से अधिवक्ता रामदेव शुक्ला ने अभियुक्त को निर्दोष बताते हुए बरी करने का तर्क दिया। दोनों पक्षों की तर्कों को सुनने व पत्रावली पर मौजूद सबूतों के आधार पर अपर जिला जज ने सजा सुनाई है।
जानिएं, कब-कब क्या हुआ
- 11 अक्तूबर 2023 को हुई घटना।
- 12 अक्तूबर 2023 को रिपोर्ट दर्ज हुई।
- 9 फरवरी 2024 को आरोप तय हुए।
- 23 फरवरी 2024 अभियोजन साक्ष्य शुरू हुआ।
- 12 मार्च 2025 को अभियोजन साक्ष्य समाप्त हुए।
- 14 जुलाई 2025 को सजा सुनाई गई।