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नुमाइश मेला : दानवीर था शूरवीर था फिर भी तो सम्मान नहीं, कर्ण का इतना दोष था उसने दुर्याेधन का साथ दिया
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फोटो-03- नुमाइश मेला पंडाल में मुशायरे में कलाम पेश करते शायर नदीम फारुख। संवाद
हरदोई। श्रीराम लीला मेला कमेटी की ओर से शनिवार रात मुशायरे का आयोजन किया गया। नुमाइश मैदान स्थित पंडाल में हुए आयोजन में मशहूर शायरों के कलामों पर श्रोताओं ने खूब वाहवाही की। दिल्ली से आए आदिल रशीद ने कलाम पढ़ा, प्रेम की बातें करने वाले सुख साधन का साथ दिया। उसने मन का साथ दिया और तूने धन का साथ दिया। दानवीर था शूरवीर था, फिर भी तो सम्मान नहीं। कर्ण का इतना दोष था उसने दुर्याेधन का साथ दिया।
मुशायरे का शुभारंभ शमा रोशन कर किया गया। आयोजक नगर पालिका के पूर्व अध्यक्ष राम प्रकाश शुक्ला ने मुशायरे की परंपरा और आयोजन को लेकर विस्तार से जानकारी दी। निजामत करते हुए नदीम फारुख ने शायरों के बारे में श्रोताओं को बताया। इसके बाद शाश्वत सिंह दर्पण ने पढ़ा, तुम अपने दोस्तों के आस्तीं में छुप कर रहते हो, हम अपने जानी दुश्मन से भी मक्कारी नहीं करते। असद नैय्यर ने पढ़ा, मेरे घर के बराबर में मकां है इक नमाजी का, हुकूमत यह समझती है यहां दहशतगर्द रहता है। मेरठ से आईं हिमांशी बाबरा ने पढ़ा, तेरी यादों ने मेरे पैर पकड़ रखे थे, उस हसीं शख्स ने जब मुझसे कहा इश्क करो।
निकहत अमराेहवी ने पढ़ा, हिंदू, मुस्लिम हों सिख हों या इसाई हों, जान हाजिर है सबकी वतन के लिए। इकबाल अशहर ने पढ़ा, ऐ सबा उससे ये कहना कि सलामत है अभी, तेरे फूलों को किताबों में सजाने वाला। मंजर भोपाली ने पढ़ा, बाप बोझा ढोता था क्या दहेज दे पाता, इसलिए वो शहजादी आज तक कुंवारी। मुशायरे के दौरान नगर पालिका के अध्यक्ष सुख सागर मिश्र मधुर, बार एसोसिएशन के पूर्व अध्यक्ष केडी शुक्ला, प्रियम मिश्रा, बाबू अली, जीतेश दीक्षित, सचिन मिश्रा, विनय मिश्रा आदि मौजूद रहे।
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मुशायरे का शुभारंभ शमा रोशन कर किया गया। आयोजक नगर पालिका के पूर्व अध्यक्ष राम प्रकाश शुक्ला ने मुशायरे की परंपरा और आयोजन को लेकर विस्तार से जानकारी दी। निजामत करते हुए नदीम फारुख ने शायरों के बारे में श्रोताओं को बताया। इसके बाद शाश्वत सिंह दर्पण ने पढ़ा, तुम अपने दोस्तों के आस्तीं में छुप कर रहते हो, हम अपने जानी दुश्मन से भी मक्कारी नहीं करते। असद नैय्यर ने पढ़ा, मेरे घर के बराबर में मकां है इक नमाजी का, हुकूमत यह समझती है यहां दहशतगर्द रहता है। मेरठ से आईं हिमांशी बाबरा ने पढ़ा, तेरी यादों ने मेरे पैर पकड़ रखे थे, उस हसीं शख्स ने जब मुझसे कहा इश्क करो।
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निकहत अमराेहवी ने पढ़ा, हिंदू, मुस्लिम हों सिख हों या इसाई हों, जान हाजिर है सबकी वतन के लिए। इकबाल अशहर ने पढ़ा, ऐ सबा उससे ये कहना कि सलामत है अभी, तेरे फूलों को किताबों में सजाने वाला। मंजर भोपाली ने पढ़ा, बाप बोझा ढोता था क्या दहेज दे पाता, इसलिए वो शहजादी आज तक कुंवारी। मुशायरे के दौरान नगर पालिका के अध्यक्ष सुख सागर मिश्र मधुर, बार एसोसिएशन के पूर्व अध्यक्ष केडी शुक्ला, प्रियम मिश्रा, बाबू अली, जीतेश दीक्षित, सचिन मिश्रा, विनय मिश्रा आदि मौजूद रहे।

फोटो-03- नुमाइश मेला पंडाल में मुशायरे में कलाम पेश करते शायर नदीम फारुख। संवाद
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