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सीएम साहब! खंडहर में किसको सुनाएं अपनी समस्याएं
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CM sir Tell your problems to whom in the ruins
- फोटो : HARDOI
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हरदोई। मुख्यमंत्री की प्राथमिकता में शामिल पंचायतघरों (मिनी सचिवालय) के हालात बदतर हैं। कहीं खंडहर बन चुके हैं तो कहीं भवनों पर कर्मचारियों ने ताला लटका रखा है।
पंचायत सहायक और अन्य कर्मियों की नियुक्ति कर सरकार हर महीने लाखों रुपये खर्च कर रही है, लेकिन इसका फायदा ग्रामीणों को मिल नहीं रहा है। पंचायत भवनों में ऑनलाइन सेवाएं उपलब्ध कराने की व्यवस्था भी धड़ाम हो गई है। कहीं ऑपरेटर नहीं तो कहीं कम्प्यूटर ही गायब हैं।
ग्रामीणों की समस्याओं का ग्राम पंचायत स्तर पर ही निस्तारण कराने की व्यवस्था के तहत पंचायत स्तर पर पंचायत घर स्थापित किए गए थे। सामुदायिक भवन, आंबेडकर भवन, बारात घर और मिलन केंद्रों को भी पंचायतघरों के रूप में संचालित कराया गया। शुक्रवार को जिले के कुछ क्षेत्रों की पड़ताल में पंचायत घरों के हालात खराब मिले। इनमें न तो खुली बैठकें हो रही हैं और न ही यहां सचिव और प्रधान में मिलते हैं।
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खंडहर में तब्दील पंचायत घर, व्यवस्था पर सवाल
पचदेवरा। सरकार भले ही ग्रामीण क्षेत्रों में सुविधाएं मुहैया कराने के लिए प्रयास करे, लेकिन जिम्मेदार उसमें पलीता लगाने से पीछे नहीं हैं। वर्षों पूर्व न्याय पंचायत स्तर पर बनाए गए पंचायत भवन देख रेख के अभाव में खंडहर होते जा रहे हैं। विकास क्षेत्र भरखनी के ग्राम पंचायत मुर्तजानगर में एक दशक पहले बनाया गया पंचायत भवन खंडहर में तब्दील हो गया है।
भवन में दो कमरों के साथ ही एक बड़ा हाल, प्रसाधन केंद्र बनाकर चारों ओर बाउंड्रीवाल खड़ी की गई थी। अब भवन के खिड़कियां व दरवाजे गायब हो चुके हैं और परिसर में झाड़-झंखाड़ उगे हुए हैं। परिसर में छुट्टा मवेशियों का जमावड़ा रहता है। रात को अराजक तत्व डटे रहते हैं। पंचायत सहायक की नियुक्ति कर ऑनालइन कामों को पंचायत में ही निपटाने की कवायद भी की गई थी, लेकिन मुर्तजानगर के पंचायत भवन में ऐसा नहीं है। पंचायत भवन में कभी बैठक हुई ही नहीं। सचिव प्रवीन कुमार ने बताया कि पंचायत भवन मरम्मत की स्थिति में नही था, इस कारण नये पंचायत भवन निर्माण के लिए ग्राम पंचायत से प्रस्ताव बना कर भेज दिया है। स्वीकृति मिलने पर निर्माण करा दिया जायेगा।
बैठक न चौपाल, ताले में बंद रहता पंचायत घर
हरदोई। पंचायत भवन अतरौली में ताला लटकता रहता है। यहां पंचायत सहायक के पद पर राधा सिंह तैनात हैं। ग्रामीण प्रदीप मिश्र ने बताया कि पंचायत भवन बन्द रहने से सरकार की मंशा पर जिम्मेदार पानी फेर रहे हैं। योगी सरकार लोगों को अब उनके गांव के सचिवालय में ऑनलाइन सुविधाएं उपलब्ध कराने का दावा कर रही है, लेकिन अतरौली में लोगों को अपने कार्य के लिए जनसेवा केंद्र पर जेब ढीली करनी पड़ रही है।
ग्राम पंचायत भटपुर में स्थित ग्राम सचिवालय को सरकार ने सुविधाओं से लैस किया है। इस पंचायत भवन में तीन साल पहले कंप्यूटर व इंटरनेट जैसी सुविधाएं उपलब्ध करा दी गई थीं। लेकिन जिम्मेदारों की लापरवाही के चलते यहां उपकरण धूल फांक रहे हैं। ग्रामीणों को जनसेवा केंद्र के चक्कर काटने पड़ते हैं। यहां पंचायत सहायक ममता रावत तैनात हैं।
ग्रामीण उत्तम शुक्ला ने बताया कि उन्हें आय व निवास प्रमाण पत्र बनवाना था। कई बार पंचायत भवन गए लेकिन ताला ही लटकता रहता है। आधार वेरिफिकेशन के लिए भी निराश होकर ही लौटना पड़ा। थक-हारकर जनसेवा केंद्र से कार्य करवाया।
प्रधान न सचिव, खाली सचिवालय
संडीला। ब्लॉक के बेगमगंज के पंचायत भवन में सचिव सर्वेश कुमार अग्निहोत्री, प्रधान सपना गुप्ता और लेखपाल सुशील कुमार गुप्ता के कक्ष खाली पड़े थे। सचिवालय में सन्नाटा था। आसपास के लोगों ने बताया कि सचिवालय की यही स्थिति लगभग सभी दिन रहती है। इसलिए ग्रामीण समस्याएं या काम लेकर अब सचिवालय जाते ही नहीं।
जिले में अब लगभग सभी पंचायतों में पंचायत घर बेहतर स्थिति में हैं। यदि किसी पंचायत में सचिवालय का भवन खंडहर है तो वहां सर्वे कराकर नए भवन का प्रस्ताव कराया जाएगा। पंचायत भवनों में सुविधाएं उपलब्ध कराने के लिए लगातार निरीक्षण जारी है। -गिरीश चंद्र, जिला पंचायत राज अधिकारी, हरदोई।
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पंचायत सहायक और अन्य कर्मियों की नियुक्ति कर सरकार हर महीने लाखों रुपये खर्च कर रही है, लेकिन इसका फायदा ग्रामीणों को मिल नहीं रहा है। पंचायत भवनों में ऑनलाइन सेवाएं उपलब्ध कराने की व्यवस्था भी धड़ाम हो गई है। कहीं ऑपरेटर नहीं तो कहीं कम्प्यूटर ही गायब हैं।
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ग्रामीणों की समस्याओं का ग्राम पंचायत स्तर पर ही निस्तारण कराने की व्यवस्था के तहत पंचायत स्तर पर पंचायत घर स्थापित किए गए थे। सामुदायिक भवन, आंबेडकर भवन, बारात घर और मिलन केंद्रों को भी पंचायतघरों के रूप में संचालित कराया गया। शुक्रवार को जिले के कुछ क्षेत्रों की पड़ताल में पंचायत घरों के हालात खराब मिले। इनमें न तो खुली बैठकें हो रही हैं और न ही यहां सचिव और प्रधान में मिलते हैं।
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खंडहर में तब्दील पंचायत घर, व्यवस्था पर सवाल
पचदेवरा। सरकार भले ही ग्रामीण क्षेत्रों में सुविधाएं मुहैया कराने के लिए प्रयास करे, लेकिन जिम्मेदार उसमें पलीता लगाने से पीछे नहीं हैं। वर्षों पूर्व न्याय पंचायत स्तर पर बनाए गए पंचायत भवन देख रेख के अभाव में खंडहर होते जा रहे हैं। विकास क्षेत्र भरखनी के ग्राम पंचायत मुर्तजानगर में एक दशक पहले बनाया गया पंचायत भवन खंडहर में तब्दील हो गया है।
भवन में दो कमरों के साथ ही एक बड़ा हाल, प्रसाधन केंद्र बनाकर चारों ओर बाउंड्रीवाल खड़ी की गई थी। अब भवन के खिड़कियां व दरवाजे गायब हो चुके हैं और परिसर में झाड़-झंखाड़ उगे हुए हैं। परिसर में छुट्टा मवेशियों का जमावड़ा रहता है। रात को अराजक तत्व डटे रहते हैं। पंचायत सहायक की नियुक्ति कर ऑनालइन कामों को पंचायत में ही निपटाने की कवायद भी की गई थी, लेकिन मुर्तजानगर के पंचायत भवन में ऐसा नहीं है। पंचायत भवन में कभी बैठक हुई ही नहीं। सचिव प्रवीन कुमार ने बताया कि पंचायत भवन मरम्मत की स्थिति में नही था, इस कारण नये पंचायत भवन निर्माण के लिए ग्राम पंचायत से प्रस्ताव बना कर भेज दिया है। स्वीकृति मिलने पर निर्माण करा दिया जायेगा।
बैठक न चौपाल, ताले में बंद रहता पंचायत घर
हरदोई। पंचायत भवन अतरौली में ताला लटकता रहता है। यहां पंचायत सहायक के पद पर राधा सिंह तैनात हैं। ग्रामीण प्रदीप मिश्र ने बताया कि पंचायत भवन बन्द रहने से सरकार की मंशा पर जिम्मेदार पानी फेर रहे हैं। योगी सरकार लोगों को अब उनके गांव के सचिवालय में ऑनलाइन सुविधाएं उपलब्ध कराने का दावा कर रही है, लेकिन अतरौली में लोगों को अपने कार्य के लिए जनसेवा केंद्र पर जेब ढीली करनी पड़ रही है।
ग्राम पंचायत भटपुर में स्थित ग्राम सचिवालय को सरकार ने सुविधाओं से लैस किया है। इस पंचायत भवन में तीन साल पहले कंप्यूटर व इंटरनेट जैसी सुविधाएं उपलब्ध करा दी गई थीं। लेकिन जिम्मेदारों की लापरवाही के चलते यहां उपकरण धूल फांक रहे हैं। ग्रामीणों को जनसेवा केंद्र के चक्कर काटने पड़ते हैं। यहां पंचायत सहायक ममता रावत तैनात हैं।
ग्रामीण उत्तम शुक्ला ने बताया कि उन्हें आय व निवास प्रमाण पत्र बनवाना था। कई बार पंचायत भवन गए लेकिन ताला ही लटकता रहता है। आधार वेरिफिकेशन के लिए भी निराश होकर ही लौटना पड़ा। थक-हारकर जनसेवा केंद्र से कार्य करवाया।
प्रधान न सचिव, खाली सचिवालय
संडीला। ब्लॉक के बेगमगंज के पंचायत भवन में सचिव सर्वेश कुमार अग्निहोत्री, प्रधान सपना गुप्ता और लेखपाल सुशील कुमार गुप्ता के कक्ष खाली पड़े थे। सचिवालय में सन्नाटा था। आसपास के लोगों ने बताया कि सचिवालय की यही स्थिति लगभग सभी दिन रहती है। इसलिए ग्रामीण समस्याएं या काम लेकर अब सचिवालय जाते ही नहीं।
जिले में अब लगभग सभी पंचायतों में पंचायत घर बेहतर स्थिति में हैं। यदि किसी पंचायत में सचिवालय का भवन खंडहर है तो वहां सर्वे कराकर नए भवन का प्रस्ताव कराया जाएगा। पंचायत भवनों में सुविधाएं उपलब्ध कराने के लिए लगातार निरीक्षण जारी है। -गिरीश चंद्र, जिला पंचायत राज अधिकारी, हरदोई।

CM sir Tell your problems to whom in the ruins- फोटो : HARDOI

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