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Hardoi News: 200 वित्तविहीन विद्यालयों के सामने वजूद बचाने की चुनौती
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हरदोई। हाईस्कूल व इंटरमीडिएट की बोर्ड परीक्षा के दौरान जिन विद्यालयों में प्रवेश के लिए मारामारी रहती थी अब उन विद्यालयों में दहाई के अंक तक विद्यार्थी नहीं बचे हैं। विद्यालयों में बोर्ड परीक्षा के दौरान एक से डेढ़ माह विद्यार्थियों और अभिभावकों का जहां हुजूम लगा रहता था वह विद्यालय अब अपना वजूद बचाने में लगे हैं। 627 विद्यालयों में 200 से अधिक विद्यालय सिर्फ परिषदीय वेबसाइट पर जिंदा हैं, हकीकत में वहां पर न तो शिक्षक हैं न विद्यार्थी बचे हैं।
माध्यमिक शिक्षा परिषद से संबद्ध वर्तमान में 627 विद्यालय संचालित हैं। इन विद्यालयों में एक लाख 95 हजार विद्यार्थी शिक्षा प्राप्त कर रहे हैं। इन विद्यालयों में 55 राजकीय और 72 एडेड विद्यालय संचालित हैं। इसके अलावा 500 वित्त विहीन विद्यालय संचालित हैं। वित्त विहीन विद्यालयों में बोर्ड परीक्षा के दौरान जनपद के अलावा गैर जनपद व गैर प्रांत के विद्यार्थी भी प्रवेश के लिए पहुंचते थे। परीक्षा के दौरान डेढ़ माह तक इन विद्यालयों में विद्यार्थियों के बैठने के लिए स्थान नहीं मिलता था और मैदान में परीक्षाएं आयोजित करनी पड़ती थीं मगर जब से विद्यालयों में ऑनलाइन मॉनिटरिंग और सीसी कैमरे की निगरानी में परीक्षा शुरू हुई। इनमें विद्यार्थियों की संख्या कम होने लगी।
वर्तमान में 200 विद्यालय सिर्फ वेबसाइट पर ही सक्रिय रह गए। इन विद्यालयों में पूर्व तक दर्ज शिक्षक ही वेबसाइट पर नजर आते हैं और विद्यार्थियों की संख्या दहाई अंक तक नहीं पहुंच पाई। इस कारण परीक्षा के दौरान वित्त विहीन विद्यालयों के शिक्षक कक्ष निरीक्षक की ड्यूटी में नहीं पहुंचे थे।
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ऐसे विद्यालयों की सूची तैयार कर भौतिक सत्यापन कराया जाएगा। यदि मानक पूरे नहीं पाए गए और नामांकन की स्थिति कम मिलती है तो ऐसे विद्यालयों की मान्यता रद करने की कार्रवाई शुरू की जाएगी। -डॉ. अरविंद कुमार पाठक, जिला विद्यालय निरीक्षक
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माध्यमिक शिक्षा परिषद से संबद्ध वर्तमान में 627 विद्यालय संचालित हैं। इन विद्यालयों में एक लाख 95 हजार विद्यार्थी शिक्षा प्राप्त कर रहे हैं। इन विद्यालयों में 55 राजकीय और 72 एडेड विद्यालय संचालित हैं। इसके अलावा 500 वित्त विहीन विद्यालय संचालित हैं। वित्त विहीन विद्यालयों में बोर्ड परीक्षा के दौरान जनपद के अलावा गैर जनपद व गैर प्रांत के विद्यार्थी भी प्रवेश के लिए पहुंचते थे। परीक्षा के दौरान डेढ़ माह तक इन विद्यालयों में विद्यार्थियों के बैठने के लिए स्थान नहीं मिलता था और मैदान में परीक्षाएं आयोजित करनी पड़ती थीं मगर जब से विद्यालयों में ऑनलाइन मॉनिटरिंग और सीसी कैमरे की निगरानी में परीक्षा शुरू हुई। इनमें विद्यार्थियों की संख्या कम होने लगी।
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वर्तमान में 200 विद्यालय सिर्फ वेबसाइट पर ही सक्रिय रह गए। इन विद्यालयों में पूर्व तक दर्ज शिक्षक ही वेबसाइट पर नजर आते हैं और विद्यार्थियों की संख्या दहाई अंक तक नहीं पहुंच पाई। इस कारण परीक्षा के दौरान वित्त विहीन विद्यालयों के शिक्षक कक्ष निरीक्षक की ड्यूटी में नहीं पहुंचे थे।
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ऐसे विद्यालयों की सूची तैयार कर भौतिक सत्यापन कराया जाएगा। यदि मानक पूरे नहीं पाए गए और नामांकन की स्थिति कम मिलती है तो ऐसे विद्यालयों की मान्यता रद करने की कार्रवाई शुरू की जाएगी। -डॉ. अरविंद कुमार पाठक, जिला विद्यालय निरीक्षक