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तीन दिन में बीस किमी दूर कुंवरपुर बघेल पहुंचा बाघ
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पिहानी। पिछले तीन दिन में दो मुख्य मार्ग पार कर बाघ ने कुंवरपुर बघेल के खेतों में खड़े गन्ने की फसल में अपना ठिकाना बनाया है। बाघ का पीछा कर रही वन विभाग की टीम का कहना है कि उसने गोमती का किनारा छोड़ कर अब सल्लिया रोड के किनारे स्थित गांवों की राह पकड़ कर खीरी के बॉर्डर का रुख किया है।
तीन दिन पहले गोमती किनारे से भिरिया गांव होकर बाघ ने पिहानी चपरतला रोड पार की थी। यहां से शारदा नहर को भी पार करते हुए गन्ने के खेत में छुपता हुआ वह अब्दुल्लानगर होकर कुंवरपुर गांव की सीमा में दाखिल हो गया है।
टीम का कहना है कि पूरे बीस किमी का चक्कर काट कर बाघ लखीमपुर खीरी जनपद की सीमा से महज चंद किमी दूर है। खीरी में दाखिल होकर वह आसानी से जंगल का रुख कर सकता है। रेंजर शीतला प्रसाद ने बताया कि कुंवरपुर बघेल तक पंजों के निशान मिले हैं। इससे आगे की खोज के लिए कांबिंग के लिए टीम भेजी गई है।
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तीन दिन पहले गोमती किनारे से भिरिया गांव होकर बाघ ने पिहानी चपरतला रोड पार की थी। यहां से शारदा नहर को भी पार करते हुए गन्ने के खेत में छुपता हुआ वह अब्दुल्लानगर होकर कुंवरपुर गांव की सीमा में दाखिल हो गया है।
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टीम का कहना है कि पूरे बीस किमी का चक्कर काट कर बाघ लखीमपुर खीरी जनपद की सीमा से महज चंद किमी दूर है। खीरी में दाखिल होकर वह आसानी से जंगल का रुख कर सकता है। रेंजर शीतला प्रसाद ने बताया कि कुंवरपुर बघेल तक पंजों के निशान मिले हैं। इससे आगे की खोज के लिए कांबिंग के लिए टीम भेजी गई है।
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