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Hardoi News: बाढ़ की तबाही के बीच रोजगार की सता रही चिंता
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हरदोई/बिलग्राम। बाढ़ का पानी निकलने के बाद प्रभावित गांवों में तबाही के निशान और रोजगार का संकट लोगों के लिए परेशानी का कारण बन गया है। फसलों में भरा पानी न निकलने से फसलों के खराब की होने की आशंका बढ़ गई है। वहीं बाढ़ के कारण कामधंधा भी बंद होने से लोगों को रोजगार की चिंता सता रही है।
बैराजों से छोड़े जाने वाले पानी का क्रम जारी है, लेकिन आगे निकास होने से गंगा, रामगंगा और गर्रा नदियों में 24 घंटे में तेजी से पानी कम हुआ है। गंगा नदी में 10 सेंटीमीटर पानी कम हुआ है और पानी 136.65 मीटर पर आ गया है। रामगंगा नदी में पांच सेंटीमीटर की कमी दर्ज की गई और पानी 136.70 मीटर पर आ गया है, हालांकि पानी दोनों नदियों में चेतावनी चेतावनी बिंदु से ऊपर है।
गर्रा नदी में 18 सेंटीमीटर पानी कम हुआ है, वहीं रविवार को बैराजों से गर्रा नदी में पानी छोड़ा भी नहीं गया है। गंगा नदी में हरिद्वार बैराज से 85,428 क्यूसेक और नरौरा बैराज से 80,447 क्यूसेक पानी छोड़ा गया है। नदियों में पानी तेजी से कम होने और पानी नदियों के दायरे में आने से लोगों ने बाढ़ से राहती की सांस ली है। वहीं बाढ़ के पानी से कटे मार्ग, गिरे मकानों और खेतों में पानी भरा होने से प्रभावित गांवों के लोग परेशान हैं।
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बिलग्राम क्षेत्र में गंगा नदी में बाढ़ का पानी गांवों से निकल रहा है, जलस्तर में गिरावट आने के कारण आबादी में भरा पानी कम हो रहा है। गांवों के निकास गलियारों संपर्क मार्गों का पानी कम होने से ग्रामीण कुछ राहत में हैं, पर खेती में नुकसान के चलते उबरने की कवायद में जुट गए हैं। हालांकि 36 दिन की बाढ़ से पीड़ितों के रोजगार पर भी असर पड़ा है।
रोजमर्रा के खर्चों का चलना दुश्वार हुआ है। अब पानी कम हो रहा है तो ढर्रे पर जीवन लौटता दिख रहा है। बाढ़ में सर्वाधिक नुकसान कटरी बिछुइया के मजरा चिरंजू पुरवा में हुआ है। प्रधान नरवेश कुमार ने बताया कि आधा गांव पानी से कट गया। सैकड़ों बीघा फसल में अभी भी पानी भरा हुआ है। एसडीएम एन राम ने बताया कि पानी कम होते ही फसलों के नुकसान का सर्वे कराया जा रहा है।
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बैराजों से छोड़े जाने वाले पानी का क्रम जारी है, लेकिन आगे निकास होने से गंगा, रामगंगा और गर्रा नदियों में 24 घंटे में तेजी से पानी कम हुआ है। गंगा नदी में 10 सेंटीमीटर पानी कम हुआ है और पानी 136.65 मीटर पर आ गया है। रामगंगा नदी में पांच सेंटीमीटर की कमी दर्ज की गई और पानी 136.70 मीटर पर आ गया है, हालांकि पानी दोनों नदियों में चेतावनी चेतावनी बिंदु से ऊपर है।
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गर्रा नदी में 18 सेंटीमीटर पानी कम हुआ है, वहीं रविवार को बैराजों से गर्रा नदी में पानी छोड़ा भी नहीं गया है। गंगा नदी में हरिद्वार बैराज से 85,428 क्यूसेक और नरौरा बैराज से 80,447 क्यूसेक पानी छोड़ा गया है। नदियों में पानी तेजी से कम होने और पानी नदियों के दायरे में आने से लोगों ने बाढ़ से राहती की सांस ली है। वहीं बाढ़ के पानी से कटे मार्ग, गिरे मकानों और खेतों में पानी भरा होने से प्रभावित गांवों के लोग परेशान हैं।
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बिलग्राम क्षेत्र में गंगा नदी में बाढ़ का पानी गांवों से निकल रहा है, जलस्तर में गिरावट आने के कारण आबादी में भरा पानी कम हो रहा है। गांवों के निकास गलियारों संपर्क मार्गों का पानी कम होने से ग्रामीण कुछ राहत में हैं, पर खेती में नुकसान के चलते उबरने की कवायद में जुट गए हैं। हालांकि 36 दिन की बाढ़ से पीड़ितों के रोजगार पर भी असर पड़ा है।
रोजमर्रा के खर्चों का चलना दुश्वार हुआ है। अब पानी कम हो रहा है तो ढर्रे पर जीवन लौटता दिख रहा है। बाढ़ में सर्वाधिक नुकसान कटरी बिछुइया के मजरा चिरंजू पुरवा में हुआ है। प्रधान नरवेश कुमार ने बताया कि आधा गांव पानी से कट गया। सैकड़ों बीघा फसल में अभी भी पानी भरा हुआ है। एसडीएम एन राम ने बताया कि पानी कम होते ही फसलों के नुकसान का सर्वे कराया जा रहा है।