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Hardoi News: टेंडर के खेल में नियमों को तोड़ने पर पिहानी क्षेत्र पंचायत के जिम्मेदारों पर कार्रवाई तय
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हरदोई। संतरहा स्थित मिनी स्टेडियम में चहेते को लाभ देने के लिए एक ही काम को तीन हिस्सों में बांटकर टेंडर कराए जाने की जांच जिला विकास अधिकारी ने पूरी कर ली है। जिला विकास अधिकारी ने अपनी जांच रिपोर्ट मुख्य विकास अधिकारी को सौंप दी है। अब मुख्य विकास अधिकारी जांच रिपोर्ट का परीक्षण कर विस्तृत आख्या डीएम को के पास भेजेंगी।
माना जा रहा है कि पिहानी क्षेत्र पंचायत से कराए गए कार्याें का विशेष ऑडिट शासन की टीम से कराए जाने की संस्तुति की तैयारी चल रही है। संतरहा में स्थित मिनी स्टेडियम की दशा सुधार का काम क्षेत्र पंचायत ने कराया था। स्टेडियम के साथ चहेतों की दशा सुधारने का खेल भी तत्काल जिम्मेदारों ने कर डाला था। पूरे खेल का खुलासा अमर उजाला ने किया था। इसी आधार पर डीएम एमपी सिंह ने जिला विकास अधिकारी को जांच कर रिपोर्ट मांगी थी। अब डीडीओ ने जांच रिपोर्ट दे दी है।
यह है मामला
युवा कल्याण विभाग का मिनी स्टेडियम संतराहा मजरा करीमनगर में है। पिहानी क्षेत्र पंचायत ने वित्तीय वर्ष 2022-23 में मिनी स्टेडियम के जीर्णोद्धार का प्रस्ताव पारित किया था। इसी क्रम में मिनी स्टेडियम के जीर्णोद्धार की पत्रावली तैयार कराई गई। पंचायत राज विभाग के नियम के मुताबिक एक ही स्थान पर होने वाले निर्माण कार्याें के लिए पूरी एक पत्रावली बनाकर निविदा प्रक्रिया पूरी की जानी चाहिए। इसके बावजूद पिहानी क्षेत्र पंचायत के तत्कालीन जिम्मेदारों ने इस नियम की अनदेखी करते हुए तीन पत्रावली तैयार कराईं। जब निविदा आमंत्रण के लिए प्रकाशन हुआ तो एक ही दिन तीनों कामों की निविदा प्रकाशित कराई गई। मिनी स्टेडियम में होने वाले काम की पहली निविदा 9.93 लाख रुपये, दूसरे निविदा 8.40 लाख रुपये और तीसरी निविदा 6.83 लाख रुपये की प्रकाशित हुई।
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एक ही फर्म को मिले थे तीनों काम, हर निविदा पर वही तीन फर्म आईं
पत्रावली देखने से पता चला कि एक कार्यस्थल पर काम कराने के लिए तीन अलग अलग टेंडर निकाले गए। तीनों ही कामों की टेंडर प्रक्रिया में तीन विशेष फर्म ही टेंडर डालने आईं। हैरानी की बात यह है कि तीनों ही काम एक ही फर्म को मिले। डीएम एमपी सिंह कहते हैं कि इसका मतलब यह कि आपसी दुरभिसंधि से टेंडर मैनेज किए गए हैं।
... ताकि डीएम के पास स्वीकृति के लिए न भेजनी पड़े फाइल
पंचायत राज विभाग के नियम में वित्तीय स्वीकृति के लिए अलग अलग जिम्मेदारों को अधिकार दिए गए हैं। 10 लाख रुपये तक के कार्याें की प्रशासनिक और वित्तीय स्वीकृति का अधिकार खंड विकास अधिकारी को ही है। 10 लाख या इससे अधिक की लागत वाले कार्याें के लिए वित्तीय और प्रशासनिक स्वीकृति जिलाधिकारी ही दे सकते हैं। पत्रावली डीएम तक न जाए और चहेतों को काम देने में कोई रोड़ा न अटके इसलिए लागत 10 लाख रुपये से कम कर दी जाती है। इससे पत्रावली डीएम तक जाती नहीं और जिम्मेदार चहेतों को उपकृत करने में कामयाब हो जाते हैं।
डीडीओ दबाए रहे जांच, सात दिन में मांगी थी रिपोर्ट 28 दिन में दी
पिहानी क्षेत्र पंचायत से कराए गए कार्याें में मिली गड़बड़ियों की जांच रिपोर्ट देने में जिला विकास अधिकारी के भी हाथ कांपते रहे। विश्वस्त सूत्र बताते हैं कि अलग अलग दबावों के चलते जिला विकास अधिकारी जांच दबाए रहे। डीएम ने पांच अप्रैल को भेजे पत्र में सात दिन के अंदर रिपोर्ट देने को कहा था, लेकिन डीडीओ ने जांच करने में 28 दिन लगा दिए। इस मामले पर डीडीओ की भूमिका को लेकर डीएम भी खासे नाराज बताए जा रहे हैं।
टेंडर निकाले किसी ने, खुलवाए किसी ने, काम किसी और ने कराया
तत्कालीन अधिकारियों ने राजनीतिक दबाव में टेंडर में खेल किया था। आलम यह है कि जब निविदा प्रकाशित हुईं थीं तो खंड विकास अधिकारी कोई और था। टेंडर पड़ने के बाद काफी समय तक टेंडर खोले नहीं गए। जब टेंडर खुल तो दूसरे अधिकारी के पास खंड विकास अधिकारी का प्रभार था। जब काम कराया गया और भुगतान हुआ तो तीसरा अधिकारी खंड विकास अधिकारी के तौर पर तैनात था।
जांच रिपोर्ट अभी मुझ तक नहीं आई है। पता चला है कि जिला विकास अधिकारी ने जांच रिपोर्ट सीडीओ को दी है। अगले एक दो दिन में मुझ तक जांच रिपोर्ट आएगी। जांच रिपोर्ट के आधार पर कार्रवाई की जाएगी। जरूरी हुआ तो शासन से स्पेशल ऑडिट की संस्तुति की जाएगी।
-एमपी सिंह, डीएम
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माना जा रहा है कि पिहानी क्षेत्र पंचायत से कराए गए कार्याें का विशेष ऑडिट शासन की टीम से कराए जाने की संस्तुति की तैयारी चल रही है। संतरहा में स्थित मिनी स्टेडियम की दशा सुधार का काम क्षेत्र पंचायत ने कराया था। स्टेडियम के साथ चहेतों की दशा सुधारने का खेल भी तत्काल जिम्मेदारों ने कर डाला था। पूरे खेल का खुलासा अमर उजाला ने किया था। इसी आधार पर डीएम एमपी सिंह ने जिला विकास अधिकारी को जांच कर रिपोर्ट मांगी थी। अब डीडीओ ने जांच रिपोर्ट दे दी है।
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यह है मामला
युवा कल्याण विभाग का मिनी स्टेडियम संतराहा मजरा करीमनगर में है। पिहानी क्षेत्र पंचायत ने वित्तीय वर्ष 2022-23 में मिनी स्टेडियम के जीर्णोद्धार का प्रस्ताव पारित किया था। इसी क्रम में मिनी स्टेडियम के जीर्णोद्धार की पत्रावली तैयार कराई गई। पंचायत राज विभाग के नियम के मुताबिक एक ही स्थान पर होने वाले निर्माण कार्याें के लिए पूरी एक पत्रावली बनाकर निविदा प्रक्रिया पूरी की जानी चाहिए। इसके बावजूद पिहानी क्षेत्र पंचायत के तत्कालीन जिम्मेदारों ने इस नियम की अनदेखी करते हुए तीन पत्रावली तैयार कराईं। जब निविदा आमंत्रण के लिए प्रकाशन हुआ तो एक ही दिन तीनों कामों की निविदा प्रकाशित कराई गई। मिनी स्टेडियम में होने वाले काम की पहली निविदा 9.93 लाख रुपये, दूसरे निविदा 8.40 लाख रुपये और तीसरी निविदा 6.83 लाख रुपये की प्रकाशित हुई।
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एक ही फर्म को मिले थे तीनों काम, हर निविदा पर वही तीन फर्म आईं
पत्रावली देखने से पता चला कि एक कार्यस्थल पर काम कराने के लिए तीन अलग अलग टेंडर निकाले गए। तीनों ही कामों की टेंडर प्रक्रिया में तीन विशेष फर्म ही टेंडर डालने आईं। हैरानी की बात यह है कि तीनों ही काम एक ही फर्म को मिले। डीएम एमपी सिंह कहते हैं कि इसका मतलब यह कि आपसी दुरभिसंधि से टेंडर मैनेज किए गए हैं।
... ताकि डीएम के पास स्वीकृति के लिए न भेजनी पड़े फाइल
पंचायत राज विभाग के नियम में वित्तीय स्वीकृति के लिए अलग अलग जिम्मेदारों को अधिकार दिए गए हैं। 10 लाख रुपये तक के कार्याें की प्रशासनिक और वित्तीय स्वीकृति का अधिकार खंड विकास अधिकारी को ही है। 10 लाख या इससे अधिक की लागत वाले कार्याें के लिए वित्तीय और प्रशासनिक स्वीकृति जिलाधिकारी ही दे सकते हैं। पत्रावली डीएम तक न जाए और चहेतों को काम देने में कोई रोड़ा न अटके इसलिए लागत 10 लाख रुपये से कम कर दी जाती है। इससे पत्रावली डीएम तक जाती नहीं और जिम्मेदार चहेतों को उपकृत करने में कामयाब हो जाते हैं।
डीडीओ दबाए रहे जांच, सात दिन में मांगी थी रिपोर्ट 28 दिन में दी
पिहानी क्षेत्र पंचायत से कराए गए कार्याें में मिली गड़बड़ियों की जांच रिपोर्ट देने में जिला विकास अधिकारी के भी हाथ कांपते रहे। विश्वस्त सूत्र बताते हैं कि अलग अलग दबावों के चलते जिला विकास अधिकारी जांच दबाए रहे। डीएम ने पांच अप्रैल को भेजे पत्र में सात दिन के अंदर रिपोर्ट देने को कहा था, लेकिन डीडीओ ने जांच करने में 28 दिन लगा दिए। इस मामले पर डीडीओ की भूमिका को लेकर डीएम भी खासे नाराज बताए जा रहे हैं।
टेंडर निकाले किसी ने, खुलवाए किसी ने, काम किसी और ने कराया
तत्कालीन अधिकारियों ने राजनीतिक दबाव में टेंडर में खेल किया था। आलम यह है कि जब निविदा प्रकाशित हुईं थीं तो खंड विकास अधिकारी कोई और था। टेंडर पड़ने के बाद काफी समय तक टेंडर खोले नहीं गए। जब टेंडर खुल तो दूसरे अधिकारी के पास खंड विकास अधिकारी का प्रभार था। जब काम कराया गया और भुगतान हुआ तो तीसरा अधिकारी खंड विकास अधिकारी के तौर पर तैनात था।
जांच रिपोर्ट अभी मुझ तक नहीं आई है। पता चला है कि जिला विकास अधिकारी ने जांच रिपोर्ट सीडीओ को दी है। अगले एक दो दिन में मुझ तक जांच रिपोर्ट आएगी। जांच रिपोर्ट के आधार पर कार्रवाई की जाएगी। जरूरी हुआ तो शासन से स्पेशल ऑडिट की संस्तुति की जाएगी।
-एमपी सिंह, डीएम