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आवारा मवेशियों का आश्रय बनेगा अभयारण्य
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फोटो-01-सवायजपुर तहसील के कटरा बिल्हौर हाइवे पर ग्राम खम्हरिया के समीप आवारा गोवंश
- फोटो : HARDOI
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हरदोई। अन्ना मवेशियों के कारण किसान परेशान रहते हैं। ये खेतों में फसल चट कर जाते हैं। वहीं सड़कों पर हादसों का सबब भी बनते हैं। अब इस समस्या का समाधान होता नजर आ रहा है। जिले में अन्ना मवेशियों को रखने के लिए अभयारण्य बनाया जाएगा।
50 एकड़ जमीन पर मई में ही इसे तैयार किया जाना है। डीएम के निर्देश पर पांचों तहसील के एसडीएम अभयारण्य के लिए जमीन के चयन में जुटे हैं। अभयारण्य में मवेशियों के जाने से किसानों को भी राहत मिलेगी।
निदेशक प्रशासन एवं विकास विभाग डॉ. इंद्रमनि ने डीएम अविनाश कुमार और पशु चिकित्सा अधिकारी डॉ. जेएन पांडेय को पत्र भेजा है। इसमें 100 दिवसीय निराश्रित गोवंश संरक्षण अभियान के अंतर्गत सुविधाएं बढ़ाने का खाका खींचा गया है।
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50 एकड़ जमीन पर बनने वाले अभयारण्य में अन्ना मवेशियों के लिए पानी, चारा, छाया समेत अन्य सभी सुविधाएं बड़े स्तर पर उपलब्ध होंगी। पशु चिकित्सा अधिकारी ने बताया कि जमीन का चयन होते ही मई में ही अभयारण्य को विकसित कर मवेशियों को रखा जाएगा। (संवाद)
मदारा में निर्माण संभव
पशु चिकित्सा अधिकारी डॉ. जेएन पांडेय ने बताया कि डीएम ने सभी एसडीएम को अभ्यारण्य के लिए जमीन का चयन करने के निर्देश दिए हैं। इसमें तहसील सदर के तहत अहिरोरी ब्लॉक के मदारा में बड़े क्षेत्रफल में जमीन एसडीएम ने देखी है। यहां अभयारण्य बनाया जा सकता है।
तीन हजार मवेशी निराश्रित
जिले में तकरीबन 22 हजार अन्ना मवेशी हैं। पशु पालन विभाग के आंकड़ों के अनुसार इनमें लगभग 19 हजार मवेशी गोशालाओं और अस्थायी पशुबाड़ों में हैं। जबकि तीन हजार मवेशी निराश्रित हैं, जो सड़कों पर घूम रहे हैं। इन्हें अभयारण्य में रखा जाएगा।
100 दिवसीय कार्ययोजना बनाई
शासन की तरफ से बनाई गई 100 दिवसीय योजना के तहत रोजाना 10 निराश्रित मवेशियों को संरक्षित किया जाना है। इसके तहत जिले में अन्ना मवेशियों को पकड़ने के लिए नगर विकास विभाग, पंचायती राज विभाग के स्तर से व्यवस्था की जा रही है।
भूसे का भंडारण
अभयारण्य में रखे जाने वाले मवेशियों के लिए भूसे की व्यवस्था करने के निर्देश दिए हैं। पशु पालन विभाग को भूसे की व्यवस्था लोगों से दान कराकर करनी है। इसके साथ ही खरीदारी करके भी भंडारण किया जाना है। जनपद में पशु पालन विभाग ने इसकी तैयारी शुरू कर दी है।
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50 एकड़ जमीन पर मई में ही इसे तैयार किया जाना है। डीएम के निर्देश पर पांचों तहसील के एसडीएम अभयारण्य के लिए जमीन के चयन में जुटे हैं। अभयारण्य में मवेशियों के जाने से किसानों को भी राहत मिलेगी।
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निदेशक प्रशासन एवं विकास विभाग डॉ. इंद्रमनि ने डीएम अविनाश कुमार और पशु चिकित्सा अधिकारी डॉ. जेएन पांडेय को पत्र भेजा है। इसमें 100 दिवसीय निराश्रित गोवंश संरक्षण अभियान के अंतर्गत सुविधाएं बढ़ाने का खाका खींचा गया है।
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50 एकड़ जमीन पर बनने वाले अभयारण्य में अन्ना मवेशियों के लिए पानी, चारा, छाया समेत अन्य सभी सुविधाएं बड़े स्तर पर उपलब्ध होंगी। पशु चिकित्सा अधिकारी ने बताया कि जमीन का चयन होते ही मई में ही अभयारण्य को विकसित कर मवेशियों को रखा जाएगा। (संवाद)
मदारा में निर्माण संभव
पशु चिकित्सा अधिकारी डॉ. जेएन पांडेय ने बताया कि डीएम ने सभी एसडीएम को अभ्यारण्य के लिए जमीन का चयन करने के निर्देश दिए हैं। इसमें तहसील सदर के तहत अहिरोरी ब्लॉक के मदारा में बड़े क्षेत्रफल में जमीन एसडीएम ने देखी है। यहां अभयारण्य बनाया जा सकता है।
तीन हजार मवेशी निराश्रित
जिले में तकरीबन 22 हजार अन्ना मवेशी हैं। पशु पालन विभाग के आंकड़ों के अनुसार इनमें लगभग 19 हजार मवेशी गोशालाओं और अस्थायी पशुबाड़ों में हैं। जबकि तीन हजार मवेशी निराश्रित हैं, जो सड़कों पर घूम रहे हैं। इन्हें अभयारण्य में रखा जाएगा।
100 दिवसीय कार्ययोजना बनाई
शासन की तरफ से बनाई गई 100 दिवसीय योजना के तहत रोजाना 10 निराश्रित मवेशियों को संरक्षित किया जाना है। इसके तहत जिले में अन्ना मवेशियों को पकड़ने के लिए नगर विकास विभाग, पंचायती राज विभाग के स्तर से व्यवस्था की जा रही है।
भूसे का भंडारण
अभयारण्य में रखे जाने वाले मवेशियों के लिए भूसे की व्यवस्था करने के निर्देश दिए हैं। पशु पालन विभाग को भूसे की व्यवस्था लोगों से दान कराकर करनी है। इसके साथ ही खरीदारी करके भी भंडारण किया जाना है। जनपद में पशु पालन विभाग ने इसकी तैयारी शुरू कर दी है।