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8415 डुप्लीकेट लाभार्थी चिन्हित, सत्यापन के बाद कार्रवाई
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हरदोई। जनपद के आठ हजार से अधिक लोग ऐसे हैं जो दो जगह राशन कार्ड का लाभ ले रहे हैं। शासन ने ऐसे लोगों का सत्यापन पर कार्रवाई करने के निर्देश दिए हैं। पूर्ति विभाग ने लाभार्थियों का सत्यापन करना शुरू कर दिया है।
हाल ही में शासन ने ऐसे लोग चिह्नित किए थे, जिन्होंने सरकारी क्रय केंद्रों पर लाखों रुपये का धान बेचा और राशन कार्ड बनवाकर गरीबों को मुफ्त दिया जाने वाला राशन भी ले लिया। ऐसे लोगों के राशन कार्ड निरस्त किए जा चुके हैं। इधर कुछ दिनों पूर्व ही शासन स्तर से राशन कार्ड/लाभार्थियों के डाटा नेशनलाइज कर उसका प्रदेशों से मिलान कराया गया।
इस दौरान बड़े पैमाने पर ऐसे लाभार्थी चिह्नित किए गए हैं, जो अपने गृह जनपद/जन्म स्थान पर राशन कार्ड/राशन सुविधा का लाभ ले रहें है और साथ ही अन्य प्रांतों में भी या तो राशन कार्ड बनवा चुके हैं या किसी के कार्ड में बतौर लाभार्थी शामिल हैं। मिलान के दौरान प्रदेश के 1 लाख 80 हजार से अधिक लाभार्थी चिह्नित किए गए हैं। इनमें हरदोई जनपद के 8415 लोग भी शामिल हैं। खाद्य एवं रसद आयुक्त सौरभ बाबू ने ऐसे लाभार्थियों का अभियान चलाकर सत्यापन करने के निर्देश दिए हैं। कहा कि जो लोग वास्तविक रूप से बाहर निवास कर रहे हैं उनका राशन कार्ड यहां से समाप्त कर पात्रों को राशन कार्ड आवंटित किए जाएं। शासन से निर्देश मिलने के बाद पूर्ति विभाग ने लाभार्थियों का सत्यापन शुरू करा दिया है।
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बाहर काम किया, वहीं बनवा लिया राशन कार्ड
जनपद में चिह्नित आठ हजार से अधिक डुप्लीकेट लाभार्थियों के सत्यापन की प्रक्रिया तेज हो गई है। पूर्ति विभाग के अधिकारियों के मुताबिक अधिकांश मामलों में यह बात सामने आई है कि परिवार का कोई सदस्य गैर प्रांत में काम करने गया और वहीं बस गया। बसने के साथ ही उसने वहां राशन कार्ड बनवा लिया, जबकि पूर्व से ही वह यहां अपने जन्म स्थान में परिवार के राशन कार्ड में बतौर लाभार्थी दर्ज था। ऐसे लोगों व उनके परिजनों के निवास का सत्यापन किया जा रहा है।
कभी गए ही नहीं, वहां कैसे बना राशन कार्ड
हरपालपुर के एक गांव मलौथा के 72 लोग उत्तराखंड के ऊधमसिंह नगर में अलग-अलग जगहों पर राशन कार्डों में बतौर लाभार्थी दर्ज हैं। पूर्ति विभाग की टीम ने गांव पहुंचकर जांच की तो अधिकांश लोग गांव में ही निवास करते मिले। उन्होंने बताया कि उनमें से अधिकांश लोग उत्तराखंड या ऊधमसिंह नगर गए ही नहीं। उनका नाम वहां के राशन कार्डों में कैसे शामिल है, उन्हें जानकारी नहीं है। अधिकारियों का कहना है कि ऐसा आईडी का मिसयूज कर किया गया है।
यहां या वहां, देना पड़ रहा घोषणा पत्र
जो लोग गृह स्थान के साथ ही गैर प्रांतों में खाद विभाग के राशन कार्डो ंमें बतौर लाभार्थी दर्ज पाए गए हैं। पूर्ति विभाग न सिर्फ ऐसे लोगों से संपर्क कर उनके सही निवास की जानकारी ले रहा है बल्कि स्वेच्छा भी जान रहा है। ऐसे लोग जो बाहर रह रहे हैं, उनसे यह पूछा जा रहा है कि वह यहां इस सुविधा का लाभ लेना चाहते हैं या बाहर के वर्तमान निवास पर। लाभार्थी द्वारा जो भी सहमति दी जा रही है, उसका घोषणा पत्र भी लिया जा रहा है।
वर्जन
अभी तक कुल 5366 लाभार्थियों का सत्यापन किया जा चुका है, जिसमें से 3303 लोग यहां निवास करते पाए गए हैं। इनमें से बड़ी संख्या में लोग ऐसे हैं जो पूर्व में बाहर रहे थे, लेकिन अब स्थायी रूप से यहीं रह रहे हैं। जबकि 2063 लाभार्थी या तो बाहर रह रहे हैं, या उन्होंने बाहर के निवास पर बने राशन कार्ड से लाभ लेने की इच्छा जताई है। इसी आधार पर उनके नाम को हटाया जा रहा है। शेष लाभार्थियों का जल्द ही सत्यापन किया जाएगा - संजय कुमार पांडेय, जिला पूर्ति अधिकारी, हरदोई
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हाल ही में शासन ने ऐसे लोग चिह्नित किए थे, जिन्होंने सरकारी क्रय केंद्रों पर लाखों रुपये का धान बेचा और राशन कार्ड बनवाकर गरीबों को मुफ्त दिया जाने वाला राशन भी ले लिया। ऐसे लोगों के राशन कार्ड निरस्त किए जा चुके हैं। इधर कुछ दिनों पूर्व ही शासन स्तर से राशन कार्ड/लाभार्थियों के डाटा नेशनलाइज कर उसका प्रदेशों से मिलान कराया गया।
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इस दौरान बड़े पैमाने पर ऐसे लाभार्थी चिह्नित किए गए हैं, जो अपने गृह जनपद/जन्म स्थान पर राशन कार्ड/राशन सुविधा का लाभ ले रहें है और साथ ही अन्य प्रांतों में भी या तो राशन कार्ड बनवा चुके हैं या किसी के कार्ड में बतौर लाभार्थी शामिल हैं। मिलान के दौरान प्रदेश के 1 लाख 80 हजार से अधिक लाभार्थी चिह्नित किए गए हैं। इनमें हरदोई जनपद के 8415 लोग भी शामिल हैं। खाद्य एवं रसद आयुक्त सौरभ बाबू ने ऐसे लाभार्थियों का अभियान चलाकर सत्यापन करने के निर्देश दिए हैं। कहा कि जो लोग वास्तविक रूप से बाहर निवास कर रहे हैं उनका राशन कार्ड यहां से समाप्त कर पात्रों को राशन कार्ड आवंटित किए जाएं। शासन से निर्देश मिलने के बाद पूर्ति विभाग ने लाभार्थियों का सत्यापन शुरू करा दिया है।
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बाहर काम किया, वहीं बनवा लिया राशन कार्ड
जनपद में चिह्नित आठ हजार से अधिक डुप्लीकेट लाभार्थियों के सत्यापन की प्रक्रिया तेज हो गई है। पूर्ति विभाग के अधिकारियों के मुताबिक अधिकांश मामलों में यह बात सामने आई है कि परिवार का कोई सदस्य गैर प्रांत में काम करने गया और वहीं बस गया। बसने के साथ ही उसने वहां राशन कार्ड बनवा लिया, जबकि पूर्व से ही वह यहां अपने जन्म स्थान में परिवार के राशन कार्ड में बतौर लाभार्थी दर्ज था। ऐसे लोगों व उनके परिजनों के निवास का सत्यापन किया जा रहा है।
कभी गए ही नहीं, वहां कैसे बना राशन कार्ड
हरपालपुर के एक गांव मलौथा के 72 लोग उत्तराखंड के ऊधमसिंह नगर में अलग-अलग जगहों पर राशन कार्डों में बतौर लाभार्थी दर्ज हैं। पूर्ति विभाग की टीम ने गांव पहुंचकर जांच की तो अधिकांश लोग गांव में ही निवास करते मिले। उन्होंने बताया कि उनमें से अधिकांश लोग उत्तराखंड या ऊधमसिंह नगर गए ही नहीं। उनका नाम वहां के राशन कार्डों में कैसे शामिल है, उन्हें जानकारी नहीं है। अधिकारियों का कहना है कि ऐसा आईडी का मिसयूज कर किया गया है।
यहां या वहां, देना पड़ रहा घोषणा पत्र
जो लोग गृह स्थान के साथ ही गैर प्रांतों में खाद विभाग के राशन कार्डो ंमें बतौर लाभार्थी दर्ज पाए गए हैं। पूर्ति विभाग न सिर्फ ऐसे लोगों से संपर्क कर उनके सही निवास की जानकारी ले रहा है बल्कि स्वेच्छा भी जान रहा है। ऐसे लोग जो बाहर रह रहे हैं, उनसे यह पूछा जा रहा है कि वह यहां इस सुविधा का लाभ लेना चाहते हैं या बाहर के वर्तमान निवास पर। लाभार्थी द्वारा जो भी सहमति दी जा रही है, उसका घोषणा पत्र भी लिया जा रहा है।
वर्जन
अभी तक कुल 5366 लाभार्थियों का सत्यापन किया जा चुका है, जिसमें से 3303 लोग यहां निवास करते पाए गए हैं। इनमें से बड़ी संख्या में लोग ऐसे हैं जो पूर्व में बाहर रहे थे, लेकिन अब स्थायी रूप से यहीं रह रहे हैं। जबकि 2063 लाभार्थी या तो बाहर रह रहे हैं, या उन्होंने बाहर के निवास पर बने राशन कार्ड से लाभ लेने की इच्छा जताई है। इसी आधार पर उनके नाम को हटाया जा रहा है। शेष लाभार्थियों का जल्द ही सत्यापन किया जाएगा - संजय कुमार पांडेय, जिला पूर्ति अधिकारी, हरदोई