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Hardoi News: किशोर से दुष्कर्म में 72 साल के बुजुर्ग को सात साल की सजा
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हरदोई। किशोर से दुष्कर्म के आठ साल पुराने मामले में 72 साल के बुजुर्ग को विशेष न्यायाधीश (पॉक्सो एक्ट कोर्ट संख्या-14) दिनेश गौड़ ने दोषी करार दिया। अभियुक्त को सात साल की सजा सुनाई। 10 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया। जुर्माना न देने पर तीन माह की अतिरिक्त सजा होगी।
टड़ियावां थाना क्षेत्र के एक गांव निवासी शख्स ने प्राथमिकी दर्ज कराई थी। इसमें बताया था कि उनका पुत्र (12) 30 जुलाई 2018 को अपने साथी के साथ अहिरोरी में आषाढ़ी मेले में गया था। यहां फट्टा टॉकीज में फिल्म देखने के बाद वापस घर जा रहा था। आरोप लगाया था कि भूतनाथ मंदिर के पास स्थित आश्रम के निकट स्थित महेश सिंह ने बालक को रोक लिया था। झोपड़ी में ले जाकर उसके साथ दुष्कर्म किया था। घर पहुंचकर बालक ने घटना के बारे में पिता को बताया। पुलिस ने प्राथमिकी दर्ज कर जांच की थी।
अभियोजन पक्ष की ओर से छह गवाह और 10 अभिलेखीय साक्ष्य पेश किए गए। आरोपी ने अपनी उम्र 72 वर्ष होने और पारिवारिक परिस्थितियों का हवाला देते हुए परिवीक्षा का लाभ देने की मांग की। कहा उसके छह भाइयों में से चार की और उसके पिता की मृत्यु हो चुकी है। अदालत ने अपराध की प्रकृति और बालक की कम उम्र को ध्यान में रखते हुए नरमी देने की मांग स्वीकार नहीं की। दोनों पक्षों के तर्कों को सुनने व पत्रावली पर मौजूद सबूतों के आधार पर फैसला सुनाया।
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टड़ियावां थाना क्षेत्र के एक गांव निवासी शख्स ने प्राथमिकी दर्ज कराई थी। इसमें बताया था कि उनका पुत्र (12) 30 जुलाई 2018 को अपने साथी के साथ अहिरोरी में आषाढ़ी मेले में गया था। यहां फट्टा टॉकीज में फिल्म देखने के बाद वापस घर जा रहा था। आरोप लगाया था कि भूतनाथ मंदिर के पास स्थित आश्रम के निकट स्थित महेश सिंह ने बालक को रोक लिया था। झोपड़ी में ले जाकर उसके साथ दुष्कर्म किया था। घर पहुंचकर बालक ने घटना के बारे में पिता को बताया। पुलिस ने प्राथमिकी दर्ज कर जांच की थी।
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अभियोजन पक्ष की ओर से छह गवाह और 10 अभिलेखीय साक्ष्य पेश किए गए। आरोपी ने अपनी उम्र 72 वर्ष होने और पारिवारिक परिस्थितियों का हवाला देते हुए परिवीक्षा का लाभ देने की मांग की। कहा उसके छह भाइयों में से चार की और उसके पिता की मृत्यु हो चुकी है। अदालत ने अपराध की प्रकृति और बालक की कम उम्र को ध्यान में रखते हुए नरमी देने की मांग स्वीकार नहीं की। दोनों पक्षों के तर्कों को सुनने व पत्रावली पर मौजूद सबूतों के आधार पर फैसला सुनाया।
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