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Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Hapur News ›   UP: Over one lakh devotees took a holy dip in the Ganges at Brajghat, Kachche Ghat, and Puth on Pitra Amavasya

यूपी: पितृ अमावस्या पर ब्रजघाट, कच्चे घाट और पूठ में एक लाख से अधिक श्रद्धालुओं ने किया गंगा स्नान

Sat, 10 Oct 2026 03:15 PM IST
Sharukh Khan अमर उजाला नेटवर्क, गढ़मुक्तेश्वर
अमर उजाला नेटवर्क, गढ़मुक्तेश्वर Published by: Sharukh Khan Updated Sat, 10 Oct 2026 03:15 PM IST
सार

हापुड़ के गढ़मुक्तेश्वर में ब्रजघाट में पितृ अमावस्या पर एक लाख से अधिक श्रद्धालुओं ने गंगा स्नान किया। ब्रजघाट, कच्चे घाट और पूठ में श्रद्धालुओं की स्नान के लिए भीड़ उमड़ी। लोगों ने पितरों के निमित्त तर्पण, पिंडदान और दान-पुण्य कर पूर्वजों को नमन किया। 

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UP: Over one lakh devotees took a holy dip in the Ganges at Brajghat, Kachche Ghat, and Puth on Pitra Amavasya
pitru amavasya - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी

विस्तार

हापुड़ के गढ़मुक्तेश्वर में ब्रजघाट गंगानगरी, कच्चे घाट और पूठ घाट पर पितृ अमावस्या पर शनिवार को एक लाख से अधिक श्रद्धालुओं ने गंगा में आस्था की डुबकी लगाई। 
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श्रद्धालुओं ने विधि-विधान से स्नान करने के बाद अपने पितरों के निमित्त तर्पण, पूजा-अर्चना और पिंडदान किया। इस दौरान श्रद्धालुओं ने जरूरतमंदों को दान-पुण्य कर पूर्वजों की आत्मा की शांति और परिवार की सुख-समृद्धि की कामना की। धार्मिक अनुष्ठानों के बाद श्रद्धालुओं ने अपने पितरों को श्रद्धापूर्वक विदाई दी।
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शनिवार सुबह से ही ब्रजघाट, कच्चे घाट और पूठ घाट पर श्रद्धालुओं के पहुंचने का सिलसिला शुरू हो गया। गंगा तट पर लोगों ने स्नान के बाद पुरोहितों के निर्देशन में धार्मिक अनुष्ठान संपन्न किए। कई श्रद्धालुओं ने अपने पूर्वजों के नाम से तर्पण और पिंडदान कर उनकी स्मृति में पूजा की। गंगा किनारे पूजा-पाठ और दान-पुण्य का सिलसिला दिनभर चलता रहा। 
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पितरों के निमित्त तर्पण और दान का विशेष महत्व
पंडित विनोद शास्त्री ने बताया कि हिंदू धर्म में पितरों के निमित्त तर्पण, पिंडदान और दान-पुण्य का विशेष महत्व माना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इन अनुष्ठानों के माध्यम से पूर्वजों के प्रति श्रद्धा और कृतज्ञता व्यक्त की जाती है।
 

तर्पण में जल अर्पित कर पितरों का स्मरण किया जाता है, जबकि पिंडदान पूर्वजों की आत्मा की शांति के लिए किया जाने वाला धार्मिक कर्म है। इस अवसर पर श्रद्धालु अपनी सामर्थ्य के अनुसार अन्न, वस्त्र और अन्य वस्तुओं का दान भी करते हैं।
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