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Hapur News: एनएचएम संविदा कर्मचारियों का कार्य बहिष्कार, स्वास्थ्य सेवाएं प्रभावित
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हापुड़। राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (एनएचएम) के संविदा कर्मचारियों के कार्य बहिष्कार से जिले की स्वास्थ्य सेवाएं प्रभावित हो रही हैं। सीएचओ के बाद अब एनएचएम के विभिन्न पदों पर तैनात संविदा कर्मचारियों ने भी काम बंद कर दिया है। बृहस्पतिवार से कर्मचारियों ने सीएमओ कार्यालय परिसर में धरना शुरू कर दिया है।
यह आंदोलन उत्तर प्रदेश एनएचएम संविदा कर्मचारी संघ के प्रांतीय आह्वान पर शुरू हुआ है। यह तीन दिन तक चलेगा। कर्मचारियों ने सेवा और सम्मान सहित अपनी विभिन्न मांगों को लेकर कार्य बहिष्कार किया है। संघ पदाधिकारियों का कहना है कि लंबे समय से सेवाएं देने के बावजूद संविदा कर्मचारियों को स्थायित्व नहीं मिल रहा है। उन्हें उनके अधिकारों का लाभ भी नहीं मिल पा रहा है। धरने का नेतृत्व जिलाध्यक्ष चंद्रभान तोमर, महामंत्री राधेश्याम यादव, सचिव सुशील चौधरी और मीडिया प्रभारी अजय मलिक ने किया। प्रदर्शन में अभिनव दुबे, मयंक और शालिनी तिवारी समेत जिलेभर के एनएचएम संविदा कर्मचारी शामिल रहे।
कर्मचारियों की प्रमुख मांगें
कर्मचारियों की प्रमुख मांगों में 18 वर्षों से सेवा दे रहे कर्मियों का नियमितीकरण शामिल है। वे समान कार्य के लिए समान वेतन की भी मांग कर रहे हैं। 10 लाख रुपये तक का कैशलेस स्वास्थ्य बीमा प्रदान करने की भी मांग है। इसके अतिरिक्त, महंगाई भत्ता, ईपीएफ, ईएसआई और पारदर्शी स्थानांतरण नीति भी उनकी मांगों में शामिल हैं। अनुकंपा नियुक्ति भी एक महत्वपूर्ण मांग है।
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स्वास्थ्य सेवाओं पर असर और चेतावनी
गांवों के उप स्वास्थ्य केंद्रों पर पिछले दस दिन से ताले लटके हैं। इससे मरीजों को सीएचसी और जिला अस्पताल जाना पड़ रहा है, जिससे ओपीडी में भीड़ बढ़ गई है। संविदा कर्मियों ने आपात सेवाओं को छोड़कर अन्य सभी सेवाएं देने से इन्कार कर दिया है। संघ पदाधिकारियों ने चेतावनी दी कि मांगों पर जल्द निर्णय न होने पर आंदोलन और व्यापक होगा। 12 अक्तूबर को लाखों संविदा कर्मचारी लखनऊ में जुटकर आंदोलन करेंगे।
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यह आंदोलन उत्तर प्रदेश एनएचएम संविदा कर्मचारी संघ के प्रांतीय आह्वान पर शुरू हुआ है। यह तीन दिन तक चलेगा। कर्मचारियों ने सेवा और सम्मान सहित अपनी विभिन्न मांगों को लेकर कार्य बहिष्कार किया है। संघ पदाधिकारियों का कहना है कि लंबे समय से सेवाएं देने के बावजूद संविदा कर्मचारियों को स्थायित्व नहीं मिल रहा है। उन्हें उनके अधिकारों का लाभ भी नहीं मिल पा रहा है। धरने का नेतृत्व जिलाध्यक्ष चंद्रभान तोमर, महामंत्री राधेश्याम यादव, सचिव सुशील चौधरी और मीडिया प्रभारी अजय मलिक ने किया। प्रदर्शन में अभिनव दुबे, मयंक और शालिनी तिवारी समेत जिलेभर के एनएचएम संविदा कर्मचारी शामिल रहे।
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कर्मचारियों की प्रमुख मांगें
कर्मचारियों की प्रमुख मांगों में 18 वर्षों से सेवा दे रहे कर्मियों का नियमितीकरण शामिल है। वे समान कार्य के लिए समान वेतन की भी मांग कर रहे हैं। 10 लाख रुपये तक का कैशलेस स्वास्थ्य बीमा प्रदान करने की भी मांग है। इसके अतिरिक्त, महंगाई भत्ता, ईपीएफ, ईएसआई और पारदर्शी स्थानांतरण नीति भी उनकी मांगों में शामिल हैं। अनुकंपा नियुक्ति भी एक महत्वपूर्ण मांग है।
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स्वास्थ्य सेवाओं पर असर और चेतावनी
गांवों के उप स्वास्थ्य केंद्रों पर पिछले दस दिन से ताले लटके हैं। इससे मरीजों को सीएचसी और जिला अस्पताल जाना पड़ रहा है, जिससे ओपीडी में भीड़ बढ़ गई है। संविदा कर्मियों ने आपात सेवाओं को छोड़कर अन्य सभी सेवाएं देने से इन्कार कर दिया है। संघ पदाधिकारियों ने चेतावनी दी कि मांगों पर जल्द निर्णय न होने पर आंदोलन और व्यापक होगा। 12 अक्तूबर को लाखों संविदा कर्मचारी लखनऊ में जुटकर आंदोलन करेंगे।