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Hapur News: उच्च न्यायालय ने ग्राम विकास अधिकारी से वसूली के आदेश को किया निरस्त
Thu, 21 Aug 2025 10:53 PM IST
गाजियाबाद ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, हापुड़
संवाद न्यूज एजेंसी, हापुड़
Updated Thu, 21 Aug 2025 10:53 PM IST
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हापुड़। सिंभावली ब्लॉक के गांव सिखेड़ा मुरादाबाद के तत्कालीन ग्राम विकास अधिकारी जितेंद्र कुमार से अनियमितता के मामले में 6.29 लाख रुपये की वसूली के आदेश को डीएम अभिषेक पांडेय ने निरस्त कर दिया है। उच्च न्यायालय के आदेश पर डीएम ने यह कार्रवाई की है। हालांकि, मामले में उच्च न्यायालय ने डीएम को भी आदेश देने के लिए सक्षम प्राधिकारी नहीं माना है।
शिकायतकर्ता कमाल अहमद, अनिल, राजकुमार, जाकिर, इकबाल, अफजाल आदि ने एक नवंबर 2023 को ग्राम सिखेड़ा मुरादाबाद की पूर्व प्रधान रिजवाना पर वर्ष 2015-2020 तक इंटरलॉकिंग निर्माण, पंचायत घर निर्माण, खेल का मैदान, चैनल व हैंडपंप आदि कार्यों में फर्जी बिल बनाकर अनियमितता व भ्रष्टाचार और सरकारी धनराशि के गबन का आरोप लगाते हुए जांच की मांग की गई थी। मामले में तत्कालीन डीएम ने जिला विकास अधिकारी की अध्यक्षता में एक जांच कमेटी बनाई थी। आठ मई 2025 को मिली जांच आख्या में बड़ी लापरवाही सामने आई थी। इसके बाद डीएम ने पूर्व प्रधान रिजवाना के विरुद्ध अनियमित भुगतान की धनराशि 9,75,198 रुपये की वसूली के आदेश पारित किए। साथ ही तत्कालीन ग्राम विकास सचिव जितेंद्र कुमार की आगामी वर्षों की दो वेतन वृद्धियां स्थाई रूप से रोकते हुए जिला पंचायत राज अधिकारी को अनियमित भुगतान की धनराशि 6,29,506 रुपये वसूली के आदेश दिए। मामले में डीपीआरओ ने भी जितेंद्र कुमार के विरुद्ध आदेश करते हुए आगे की कार्रवाई शुरू कर दी। इस पर जितेंद्र कुमार ने उच्च न्यायालय इलाहाबाद में रिट दाखिल की। न्यायालय ने 28 मई 2025 को आदेश देते हुए कहा है कि जिलाधिकारी ने अधिनियम 1947 की धारा 27 के अनुसार, धनराशि जमा करने के लिए याचिकाकर्ता के खिलाफ आदेश पारित किया था, जो इस तरह के आदेश को पारित करने के लिए सक्षम प्राधिकारी नहीं है।
मामले में न्यायालय का आदेश आने के बाद अब डीएम ने भी पूर्व में दिए गए आदेश को निरस्त कर दिया है। डीपीआरओ शिव बिहारी शुक्ला का कहना है कि उच्च न्यायालय का आदेश प्राप्त होने के बाद जिलाधिकारी ने आगे की कार्रवाई करते हुए पूर्व आदेश को निरस्त कर दिया है।
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शिकायतकर्ता कमाल अहमद, अनिल, राजकुमार, जाकिर, इकबाल, अफजाल आदि ने एक नवंबर 2023 को ग्राम सिखेड़ा मुरादाबाद की पूर्व प्रधान रिजवाना पर वर्ष 2015-2020 तक इंटरलॉकिंग निर्माण, पंचायत घर निर्माण, खेल का मैदान, चैनल व हैंडपंप आदि कार्यों में फर्जी बिल बनाकर अनियमितता व भ्रष्टाचार और सरकारी धनराशि के गबन का आरोप लगाते हुए जांच की मांग की गई थी। मामले में तत्कालीन डीएम ने जिला विकास अधिकारी की अध्यक्षता में एक जांच कमेटी बनाई थी। आठ मई 2025 को मिली जांच आख्या में बड़ी लापरवाही सामने आई थी। इसके बाद डीएम ने पूर्व प्रधान रिजवाना के विरुद्ध अनियमित भुगतान की धनराशि 9,75,198 रुपये की वसूली के आदेश पारित किए। साथ ही तत्कालीन ग्राम विकास सचिव जितेंद्र कुमार की आगामी वर्षों की दो वेतन वृद्धियां स्थाई रूप से रोकते हुए जिला पंचायत राज अधिकारी को अनियमित भुगतान की धनराशि 6,29,506 रुपये वसूली के आदेश दिए। मामले में डीपीआरओ ने भी जितेंद्र कुमार के विरुद्ध आदेश करते हुए आगे की कार्रवाई शुरू कर दी। इस पर जितेंद्र कुमार ने उच्च न्यायालय इलाहाबाद में रिट दाखिल की। न्यायालय ने 28 मई 2025 को आदेश देते हुए कहा है कि जिलाधिकारी ने अधिनियम 1947 की धारा 27 के अनुसार, धनराशि जमा करने के लिए याचिकाकर्ता के खिलाफ आदेश पारित किया था, जो इस तरह के आदेश को पारित करने के लिए सक्षम प्राधिकारी नहीं है।
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मामले में न्यायालय का आदेश आने के बाद अब डीएम ने भी पूर्व में दिए गए आदेश को निरस्त कर दिया है। डीपीआरओ शिव बिहारी शुक्ला का कहना है कि उच्च न्यायालय का आदेश प्राप्त होने के बाद जिलाधिकारी ने आगे की कार्रवाई करते हुए पूर्व आदेश को निरस्त कर दिया है।
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