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Hapur News: मोबाइल से कमजोर हो रहीं आंखें
Sat, 15 Feb 2025 10:03 PM IST
गाजियाबाद ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, हापुड़
संवाद न्यूज एजेंसी, हापुड़
Updated Sat, 15 Feb 2025 10:03 PM IST
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हापुड़। कोरोना के बाद से मोबाइल का चलन बढ़ा है। लेकिन मोबाइल का अधिक प्रयोग लोगों की आंखों को नुकसान पहुंचा रहा है। आंखों में दर्द और चुभन के रोजाना जिला अस्पताल और सीएचसी की ओपीडी में 40 से अधिक मरीज पहुंच रहे हैं, जिसमें बच्चों की संख्या 60 प्रतिशत से अधिक है।
बच्चों में मोबाइल के अधिक प्रयोग का कारण ऑनलाइन क्लास, कोचिंग, सोशल मीडिया का इस्तेमाल है। मोबाइल का अधिक इस्तेमाल बुजुर्ग, युवाओं की आंखों को भी कमजोर करने लगा है।
जिला अस्पताल में तैनात नेत्र रोग विशेषज्ञ डॉ पीपी सिंह का कहना है कि ऑनलाइन पढ़ाई और सोशल मीडिया के कारण बच्चों को फोन की ऐसी लत लग गई है कि उन्होंने घर के बाहर शारीरिक रूप से खेलना बंद कर दिया है। इसका असर उनकी आंखों पर दिख रहा है। डॉ पीपी सिंह ने बताया कि मोबाइल को दो से तीन घंटे तक लगातार पास से देखने के कारण करीब 60 प्रतिशत बच्चों की आंखों की रोशनी कमजोर हो रही है।
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उन्होंने बताया कि अस्पताल में हर दिन करीब 100 मरीज जांच कराने आते हैं, इसमें जिनकी आंखें अधिक कमजोर मिल रही हैं,उनकी उम्र 18 वर्ष से कम है, इसमें मायोपिया आंखों से संबंधित बीमारी के मरीज अधिक हैं, जिसमें रोगी की आंख की आई वॉल का आकार बढ़ जाता है। इससे दूर की वस्तुएं धुंधली दिखाई देने लगती हैं। मरीजों से रोजाना का रूटीन आदि पूछने पर यह जानकारी निकलकर सामने आई है।
इस प्रकार करें बचाव--
- आधा घंटा से अधिक एक साथ मोबाइल या टीवी न देखें।
- मोबाइल का कम से कम प्रयोग करें। खेलकूद व व्यायाम भी सुबह-शाम करें।
- आंखों को हर एक घंटे में धोएं और करीब दो घंटे में थोड़ी देर के लिए आंखों को बंद करके लेट जाएं।
- कोशिश करें कि दूर से ही मोबाइल का प्रयोग करें।
- रात्रि में सोने से पहले और सुबह उठने के तुरंत बाद मोबाइल का प्रयोग न करें।
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बच्चों में मोबाइल के अधिक प्रयोग का कारण ऑनलाइन क्लास, कोचिंग, सोशल मीडिया का इस्तेमाल है। मोबाइल का अधिक इस्तेमाल बुजुर्ग, युवाओं की आंखों को भी कमजोर करने लगा है।
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जिला अस्पताल में तैनात नेत्र रोग विशेषज्ञ डॉ पीपी सिंह का कहना है कि ऑनलाइन पढ़ाई और सोशल मीडिया के कारण बच्चों को फोन की ऐसी लत लग गई है कि उन्होंने घर के बाहर शारीरिक रूप से खेलना बंद कर दिया है। इसका असर उनकी आंखों पर दिख रहा है। डॉ पीपी सिंह ने बताया कि मोबाइल को दो से तीन घंटे तक लगातार पास से देखने के कारण करीब 60 प्रतिशत बच्चों की आंखों की रोशनी कमजोर हो रही है।
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उन्होंने बताया कि अस्पताल में हर दिन करीब 100 मरीज जांच कराने आते हैं, इसमें जिनकी आंखें अधिक कमजोर मिल रही हैं,उनकी उम्र 18 वर्ष से कम है, इसमें मायोपिया आंखों से संबंधित बीमारी के मरीज अधिक हैं, जिसमें रोगी की आंख की आई वॉल का आकार बढ़ जाता है। इससे दूर की वस्तुएं धुंधली दिखाई देने लगती हैं। मरीजों से रोजाना का रूटीन आदि पूछने पर यह जानकारी निकलकर सामने आई है।
इस प्रकार करें बचाव
- आधा घंटा से अधिक एक साथ मोबाइल या टीवी न देखें।
- मोबाइल का कम से कम प्रयोग करें। खेलकूद व व्यायाम भी सुबह-शाम करें।
- आंखों को हर एक घंटे में धोएं और करीब दो घंटे में थोड़ी देर के लिए आंखों को बंद करके लेट जाएं।
- कोशिश करें कि दूर से ही मोबाइल का प्रयोग करें।
- रात्रि में सोने से पहले और सुबह उठने के तुरंत बाद मोबाइल का प्रयोग न करें।