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जैविक खेती का हब बनेगा गढ़,गंगा के पांच किलोमीटर दायरे में लहलहाएंगी फसलें
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ददायरा गांव में बजट पर चर्चा करते ग्रामीण संवाद
- फोटो : HAPUR
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जैविक खेती का हब बनेगा गढ़ खादर, गंगा के 5 किलोमीटर क्षेत्र में लहलहाएंगी फसलें
हापुड़। गढ़मुक्तेश्वर में गंगा किनारे पांच किलोमीटर तक बसे गांवों की पहचान जैविक खेती से होगी। बजट में गंगा कॉरिडोर के साथ प्राकृतिक खेती पर जोर दिया गया है। इस क्षेत्र के 15 गांवों में मुहिम शुरू की जा चुकी है, जहां गंगा नर्सरी, उद्यान उपवन को जैविक विधि से विकसित कराया जा रहा है। बजट में प्रावधान के बाद ऐसे गांवों की संख्या 80 से अधिक हो सकती है, जिसका सीधा लाभ करीब 30 हजार किसानों को मिलेगा।
गंगा नदी किनारे बसे गढ़मुक्तेश्वर की पहचान महाभारत कालीन से है। यहां ब्रजघाट को मिनी हरिद्वार की तर्ज पर देखा जाता है, गंगा के सुंदरीकरण के लिए नमामि गंगे औद्यानिक विकास योजना भी शुरू की गई थी, इसके तहत गंगा के किनारों को हरियाली और स्वच्छता से परिपूर्ण करने के साथ ही किसानों को आत्मनिर्भर बनाया जाना था।
कृषि और उद्यान विभाग को गंगा किनारे के इन 15 गांवों में जैविक खेती, उपवन, नर्सरी को बढ़ावा देने की जिम्मेदारी दी गई। हाल ही में पेश हुए बजट में गंगा कॉरिडोर के साथ प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने की बात हुई। इसमें गंगा के पांच किलोमीटर दायरे में जैविक खेती को बढ़ावा देकर किसानों को आत्मनिर्भर बनाने पर जोर दिया गया।
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बता दें कि गढ़ गंगा के पांच किलोमीटर दायरे में करीब 80 गांव आ रहे हैं, जिन्हें जैविक खेती, उद्यान, गंगा नर्सरी जैसी योजनाओं में शामिल कर किसानों का कायाकल्प किया जा सकता है। पर्यटन को बढ़ावा मिलने के साथ ही यह क्षेत्र रोजगार का सृजन करेगा।
योजना में ये गांव हैं शामिल
जैविक खेती और उद्यान उपवन के लिए आलमपुर भगवंतपुर, झड़ीना, हैदरपुर, इनायतपुर, रामपुर, मोहम्मदपुर रुस्तमपुर, लठीरा, अल्लाबख्शपुर, आलमगीरपुर, आलमनगर, नवादा खुर्द, पूठ, कांटी उर्फ शंकर टीला, रहरवा, गढ़ावली गांव का चयन किया गया है। इन गांवों में उद्यान पर अनुदान का भी प्रावधान है।
इस तरह मिलेगा लाभ
* गंगा बेसिन स्थिति ग्राम पंचायतों में फलदार पौधों की गुणवत्तायुक्त उपलब्धता।
* कृषकों को स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर उपलब्ध कराना।
* छोटी जोत के किसानों को कम लागत में अधिक आय के स्त्रोत उपलब्ध कराना।
* परंपरागत खेती की तुलना में किसानों को इकाई क्षेत्र से अधिक आय सुलभ कराना।
* प्राकृतिक संसाधनों का समुचित उपयोग।
इस तरह होंगे कार्यक्रम
* गंगा नदी के बाढ़ क्षेत्र को छोड़कर फलदार वृक्षों को बढ़ावा देने के लिए गंगा उद्यान तैयार करना।
* गंगा नदी के तटवर्ती क्षेत्र में फलदार वृक्ष के लिए गंगा नर्सरी की स्थापना।
* बागवानी फसलों की उन्नत तकनीकी व समस्याओं का वैज्ञानिक समाधान।
गंगा बेसिन क्षेत्रों के कायाकल्प को चलाई जा रही योजनाएं
* गंगा बेसिन क्षेत्र में 5.55 करोड़ की नमामि गंगे औद्यानिक विकास योजना प्रस्तावित।
* गंगा नर्सरी स्थापना के लिए अधिकतम 7.50 लाख का अनुदान।
* अमरुद, आम, आवंला, नींबू, बेर, बेल, अनार का 150 हेक्टेयर उद्यान स्थापित कराना।
* प्रति हेक्टेयर उद्यान पर तीन हजार रुपये/मासिक अनुदान की व्यवस्था।
रसायनों पर आने वाले खर्च से मिलेगी छूट
गढ़ क्षेत्र में जैविक खेती को बढ़ावा मिलने से किसानों का रसायनिक उर्वरकों पर आने वाला खर्च कम होगा। साथ ही रोगमुक्त सब्जियां यहां तैयार की जा सकेंगी। जिनकी सप्लाई राष्ट्रीय, अंतर्राष्ट्रीय बाजारों में होगी। - सतनाम सिंह, भगवंतपुर।--फोटो संख्या--39
गढ़ की होगी अलग पहचान
देशभर में फसलों को रसायनों से तैयार किया जा रहा है, जो सेहत के लिए भी खतरा है। गंगा किनारे के गांवों में जैविक खेती को बढ़ावा मिलने से गढ़ की देश में अलग पहचान बनेगी। रोजगार के अवसर भी बढ़ेंगे। - चरना प्रधान, गढ़ावली।
गंगा होगी प्रदूषण मुक्त
बजट में जैविक खेती पर मुख्य फोकस रहा है। गंगा कॉरिडोर में पांच किलोमीटर तक के क्षेत्रों में जैविक खेती को बढ़ावा दिया जाएगा। इससे गंगा प्रदूषण मुक्त होगी, साथ ही चारों ओर जैविक फसल लहलहाएंगी। - महेश केवट, पूठ।
किसानों की बढ़ेगी आय
गंगा बेसिन क्षेत्र में इस तरह की योजनाओं के क्रियान्वयन से किसानों की आय बढ़ेगी, साथ ही क्षेत्र को नई पहचान मिलेेगी। बजट में गढ़ के किसानों का पूरा ध्यान रखा गया है। - दीपेंद्र मणि त्यागी, झड़ीना।
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हापुड़। गढ़मुक्तेश्वर में गंगा किनारे पांच किलोमीटर तक बसे गांवों की पहचान जैविक खेती से होगी। बजट में गंगा कॉरिडोर के साथ प्राकृतिक खेती पर जोर दिया गया है। इस क्षेत्र के 15 गांवों में मुहिम शुरू की जा चुकी है, जहां गंगा नर्सरी, उद्यान उपवन को जैविक विधि से विकसित कराया जा रहा है। बजट में प्रावधान के बाद ऐसे गांवों की संख्या 80 से अधिक हो सकती है, जिसका सीधा लाभ करीब 30 हजार किसानों को मिलेगा।
गंगा नदी किनारे बसे गढ़मुक्तेश्वर की पहचान महाभारत कालीन से है। यहां ब्रजघाट को मिनी हरिद्वार की तर्ज पर देखा जाता है, गंगा के सुंदरीकरण के लिए नमामि गंगे औद्यानिक विकास योजना भी शुरू की गई थी, इसके तहत गंगा के किनारों को हरियाली और स्वच्छता से परिपूर्ण करने के साथ ही किसानों को आत्मनिर्भर बनाया जाना था।
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कृषि और उद्यान विभाग को गंगा किनारे के इन 15 गांवों में जैविक खेती, उपवन, नर्सरी को बढ़ावा देने की जिम्मेदारी दी गई। हाल ही में पेश हुए बजट में गंगा कॉरिडोर के साथ प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने की बात हुई। इसमें गंगा के पांच किलोमीटर दायरे में जैविक खेती को बढ़ावा देकर किसानों को आत्मनिर्भर बनाने पर जोर दिया गया।
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बता दें कि गढ़ गंगा के पांच किलोमीटर दायरे में करीब 80 गांव आ रहे हैं, जिन्हें जैविक खेती, उद्यान, गंगा नर्सरी जैसी योजनाओं में शामिल कर किसानों का कायाकल्प किया जा सकता है। पर्यटन को बढ़ावा मिलने के साथ ही यह क्षेत्र रोजगार का सृजन करेगा।
योजना में ये गांव हैं शामिल
जैविक खेती और उद्यान उपवन के लिए आलमपुर भगवंतपुर, झड़ीना, हैदरपुर, इनायतपुर, रामपुर, मोहम्मदपुर रुस्तमपुर, लठीरा, अल्लाबख्शपुर, आलमगीरपुर, आलमनगर, नवादा खुर्द, पूठ, कांटी उर्फ शंकर टीला, रहरवा, गढ़ावली गांव का चयन किया गया है। इन गांवों में उद्यान पर अनुदान का भी प्रावधान है।
इस तरह मिलेगा लाभ
* गंगा बेसिन स्थिति ग्राम पंचायतों में फलदार पौधों की गुणवत्तायुक्त उपलब्धता।
* कृषकों को स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर उपलब्ध कराना।
* छोटी जोत के किसानों को कम लागत में अधिक आय के स्त्रोत उपलब्ध कराना।
* परंपरागत खेती की तुलना में किसानों को इकाई क्षेत्र से अधिक आय सुलभ कराना।
* प्राकृतिक संसाधनों का समुचित उपयोग।
इस तरह होंगे कार्यक्रम
* गंगा नदी के बाढ़ क्षेत्र को छोड़कर फलदार वृक्षों को बढ़ावा देने के लिए गंगा उद्यान तैयार करना।
* गंगा नदी के तटवर्ती क्षेत्र में फलदार वृक्ष के लिए गंगा नर्सरी की स्थापना।
* बागवानी फसलों की उन्नत तकनीकी व समस्याओं का वैज्ञानिक समाधान।
गंगा बेसिन क्षेत्रों के कायाकल्प को चलाई जा रही योजनाएं
* गंगा बेसिन क्षेत्र में 5.55 करोड़ की नमामि गंगे औद्यानिक विकास योजना प्रस्तावित।
* गंगा नर्सरी स्थापना के लिए अधिकतम 7.50 लाख का अनुदान।
* अमरुद, आम, आवंला, नींबू, बेर, बेल, अनार का 150 हेक्टेयर उद्यान स्थापित कराना।
* प्रति हेक्टेयर उद्यान पर तीन हजार रुपये/मासिक अनुदान की व्यवस्था।
रसायनों पर आने वाले खर्च से मिलेगी छूट
गढ़ क्षेत्र में जैविक खेती को बढ़ावा मिलने से किसानों का रसायनिक उर्वरकों पर आने वाला खर्च कम होगा। साथ ही रोगमुक्त सब्जियां यहां तैयार की जा सकेंगी। जिनकी सप्लाई राष्ट्रीय, अंतर्राष्ट्रीय बाजारों में होगी। - सतनाम सिंह, भगवंतपुर।--फोटो संख्या--39
गढ़ की होगी अलग पहचान
देशभर में फसलों को रसायनों से तैयार किया जा रहा है, जो सेहत के लिए भी खतरा है। गंगा किनारे के गांवों में जैविक खेती को बढ़ावा मिलने से गढ़ की देश में अलग पहचान बनेगी। रोजगार के अवसर भी बढ़ेंगे। - चरना प्रधान, गढ़ावली।
गंगा होगी प्रदूषण मुक्त
बजट में जैविक खेती पर मुख्य फोकस रहा है। गंगा कॉरिडोर में पांच किलोमीटर तक के क्षेत्रों में जैविक खेती को बढ़ावा दिया जाएगा। इससे गंगा प्रदूषण मुक्त होगी, साथ ही चारों ओर जैविक फसल लहलहाएंगी। - महेश केवट, पूठ।
किसानों की बढ़ेगी आय
गंगा बेसिन क्षेत्र में इस तरह की योजनाओं के क्रियान्वयन से किसानों की आय बढ़ेगी, साथ ही क्षेत्र को नई पहचान मिलेेगी। बजट में गढ़ के किसानों का पूरा ध्यान रखा गया है। - दीपेंद्र मणि त्यागी, झड़ीना।