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Hapur News: पिलखुवा में एसआईबी ने पकड़ी टैक्स चोरी, 1.17 करोड़ का वसूला जुर्माना
Sat, 23 Aug 2025 10:19 PM IST
गाजियाबाद ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, हापुड़
संवाद न्यूज एजेंसी, हापुड़
Updated Sat, 23 Aug 2025 10:19 PM IST
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हापुड़। राज्य वस्तु एवं सेवा कर (एसजीएसटी) की विशेष अनुसंधान शाखा (एसआईबी) ने पिलखुवा के मोहल्ला बीच पट्टी स्थित गर्गा इंटरप्राइजेज के यहां करोड़ों रुपये की टैक्स चोरी पकड़ी है। फर्म द्वारा बीड़ी, सिगरेट, चायपत्ती आदि की खरीद और बिक्री की जाती है। कार्रवाई के बाद फर्म संचालक ने एक करोड़ 17 लाख 50 हजार रुपये जमा कराए हैं।
गाजियाबाद के एसजीएसटी ग्रेड 1 अपर आयुक्त मानवेंद्र प्रताप सिंह के नेतृत्व में एसआईबी संयुक्त आयुक्त अजय प्रताप सिंह ने गर्गा इंटरप्राइजेज फर्म के डाटा का विश्लेषण किया। अजय प्रताप सिंह ने बताया कि फर्म द्वारा बीड़ी, सिगरेट, चायपत्ती की खरीद फरोख्त की जाती है। वर्ष 2024-25 में फर्म ने जीएसटीआर-1 के सापेक्ष जीएसटीआर- 3बी में 8.10 करोड़ रुपये का कर जमा किया था। फर्म के आईटीसी लेजर में सेस 2.67 करोड़ रुपये का बैलेंस, 4.17 लाख रुपये एसजीएसटी व 4.18 लाख रुपये एसजीएसटी उपलब्ध पाया गया। जबकि, क्रेडिट लेजर में सेस की मद में आईटीसी, सीजीएसटी और एसजीएसटी की मद में उपलब्ध आईटीसी की तुलना में अधिक पाया।
इसके बाद खरीद और बिक्री का अभिलेखों व उपलब्ध स्टॉक का सत्यापन करने के लिए एसआईबी ने फर्म की रेकी कराई। इस दौरान क्रेडिट लेजर में उपलब्ध आईटीसी की तुलना में स्टॉक अत्यंत कम पाया गया। इसके बाद राज्य कर अधिकारी सतीश तिवारी और आलोक रॉय ने फर्म का भौतिक सत्यापन किया। व्यापारी द्वारा प्रस्तुत की गई स्टॉक शीट के आधार पर 22.23 लाख रुपये का कुल स्टॉक पाया गया। जांच के बाद डीआरसी-03 के माध्यम से व्यापारी द्वारा 25 हजार रुपये सीजीएसटी, 25 हजार रुपये एसजीएसटी और एक करोड़ 17 लाख रुपये सेस जमा किया गया।
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एसआईबी संयुक्त अजय प्रताप सिंह का कहना है कि फर्म की जांच चल रही है। विभाग कर चोरी करने और फर्जी तरीके से विभाग को चूना लगाने वाली फर्मों पर निगाह रखे हुए हैं। कर चोरी पकड़े जाने पर कड़ी कार्रवाई की जाएगी।
ये होता है सेस-
जीएसटी में उपकर (सेस) या क्षतिपूर्ति उपकर जीएसटी लागू होने के बाद राज्यों के राजस्व अंतर को पाटने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। सेस केवल चुनिंदा जैसे पान मसाला, तंबाकू और तंबाकू उत्पाद, सोडा वाटर, कोयला, कैफीनयुक्त पेय पदार्थ विलासिता और हानिकारक वस्तुओं पर लगाया जाता है।
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गाजियाबाद के एसजीएसटी ग्रेड 1 अपर आयुक्त मानवेंद्र प्रताप सिंह के नेतृत्व में एसआईबी संयुक्त आयुक्त अजय प्रताप सिंह ने गर्गा इंटरप्राइजेज फर्म के डाटा का विश्लेषण किया। अजय प्रताप सिंह ने बताया कि फर्म द्वारा बीड़ी, सिगरेट, चायपत्ती की खरीद फरोख्त की जाती है। वर्ष 2024-25 में फर्म ने जीएसटीआर-1 के सापेक्ष जीएसटीआर- 3बी में 8.10 करोड़ रुपये का कर जमा किया था। फर्म के आईटीसी लेजर में सेस 2.67 करोड़ रुपये का बैलेंस, 4.17 लाख रुपये एसजीएसटी व 4.18 लाख रुपये एसजीएसटी उपलब्ध पाया गया। जबकि, क्रेडिट लेजर में सेस की मद में आईटीसी, सीजीएसटी और एसजीएसटी की मद में उपलब्ध आईटीसी की तुलना में अधिक पाया।
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इसके बाद खरीद और बिक्री का अभिलेखों व उपलब्ध स्टॉक का सत्यापन करने के लिए एसआईबी ने फर्म की रेकी कराई। इस दौरान क्रेडिट लेजर में उपलब्ध आईटीसी की तुलना में स्टॉक अत्यंत कम पाया गया। इसके बाद राज्य कर अधिकारी सतीश तिवारी और आलोक रॉय ने फर्म का भौतिक सत्यापन किया। व्यापारी द्वारा प्रस्तुत की गई स्टॉक शीट के आधार पर 22.23 लाख रुपये का कुल स्टॉक पाया गया। जांच के बाद डीआरसी-03 के माध्यम से व्यापारी द्वारा 25 हजार रुपये सीजीएसटी, 25 हजार रुपये एसजीएसटी और एक करोड़ 17 लाख रुपये सेस जमा किया गया।
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एसआईबी संयुक्त अजय प्रताप सिंह का कहना है कि फर्म की जांच चल रही है। विभाग कर चोरी करने और फर्जी तरीके से विभाग को चूना लगाने वाली फर्मों पर निगाह रखे हुए हैं। कर चोरी पकड़े जाने पर कड़ी कार्रवाई की जाएगी।
ये होता है सेस-
जीएसटी में उपकर (सेस) या क्षतिपूर्ति उपकर जीएसटी लागू होने के बाद राज्यों के राजस्व अंतर को पाटने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। सेस केवल चुनिंदा जैसे पान मसाला, तंबाकू और तंबाकू उत्पाद, सोडा वाटर, कोयला, कैफीनयुक्त पेय पदार्थ विलासिता और हानिकारक वस्तुओं पर लगाया जाता है।