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किसान परेशान, वन विभाग बेबस
ब्यूरो, अमर उजाला/ हापुड़
Updated Thu, 19 Jan 2017 08:36 PM IST
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नील गाय
- फोटो : अमर उजाला
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बड़े पैमाने पर फसलों को तबाह कर रही नील गायों की धरपकड़ के लिए वन विभाग के पास कोई इंतजाम नहीं हैं। ऐसे में किसान अपनी फसलों को बचाने के लिए कड़ाके की ठंड में रातभर पहरेदारी कर रहे हैं।
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गंगा खादर सहित बांगर इलाके से जुड़े कृषि क्षेत्रों में नील गायों का आतंक है। इनके झुंड मौका मिलते ही खेतों में लहलहा रही फसलों को चौपट कर देते हैं। किसान मेवा सिंह, नौबत राणा और रामलाल ने बताया कि नील गायों ने उनकी काफी फसल बर्बाद कर दी है।
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फसलों की सुरक्षा के लिए किसान रातभर खेतों पर पहरा दे रहे हैं। भाकियू मंडल प्रवक्ता दिनेश खेड़ा का कहना है कि नील गायों का आतंक बढ़ने से खेतों में लहलहाती फसलों को बड़े स्तर पर नुकसान हो रहा है, लेकिन सरकारी स्तर से कोई भी मदद नहीं मिल रही है।
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गढ़ के किसान हक्कुल इस्लाम ने कहा कि गन्ना पेमेंट न मिलने पर इधर-उधर से कर्ज लेकर फसलें बोई थीं, लेकिन उनमें भी नील गाय जमकर नुकसान पहुंचा रही हैं। बिहूनी के पूर्व प्रधान संजीव त्यागी का कहना है कि नील गाय फसलों में तबाही मचा रही हैं,
लेकिन वन विभाग की ओर से कोई कार्रवाई नहीं की जा रही है। अल्लाबख्शपुर गांव के किसान इस्लाम खां ने बताया कि किसान बार-बार वन विभाग के अधिकारियों से शिकायत कर रहे हैं, लेकिन कोई सुनवाई नहंी हो रही है।
पर्यावरणविद् प्रो. अब्बास अली का कहना है कि गंगा की तलहटी से जुड़े जंगल में पेड़ों और झाड़ियों की अंधाधुंध कटान के कारण नील गायों के झुंड कृषि क्षेत्रों में छिपने को मजबूर हो जाते हैं। इससे फसलों को बड़े स्तर पर नुकसान पहुंचता है।
नील गाय एक जंगली जानवर है। इसको कोई भी नुकसान पहुंचना कानूनी तौर पर पूरी तरह प्रतिबंधित है। विभागीय स्तर पर कर्मचारियों की संख्या सीमित होने के कारण रोकथाम की कोई व्यवस्था कर पाना भी संभव नहीं है। अरुण कुमार सिंह, वन रेंजर