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Hapur News: चितौली रोड पर पालिका की जमीन के लिए छिड़ी जंग
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हापुड़। चितौली रोड पर पालिका की पुरानी पेयजल लाइन वाली जमीन को बचाने के लिए जिला प्रशासन जुटा हुआ है। मामले में एडीएम ने जांच सहित अन्य कार्यों के लिए फाइल को तहसील को भेजा है। इस पूरे मामले में पालिका के अधिकारियों ने चुप्पी साधी हुई है।
चितौली मार्ग पर पालिका की सरकारी पाइप लाइन की जमीन है। वर्तमान में इस जमीन की कीमत करोड़ों में है। उसकी वजह यह है कि इस भूमि के पीछे की जमीन पर कुछ लोग कालोनी काटने के लिए प्रयासरत हैं और अवैध कालोनी को जाने के लिए मात्र यही से एक रास्ता जा सकता है। यही कारण है कि इस जमीन को कब्जाने के करीब एक साल से प्रयास चल रहे हैं।
पूर्व में इस मामले में कोतवाली में रिपोर्ट भी दर्ज हुई थी। उस समय भी पालिका अधिकारियों व कर्मचारियों ने जमीन पर अवैध कब्जा और तार बंदी को तोड़ने के मामले में शिकायतों व एडीएम के हस्तक्षेप के बाद रिपोर्ट दर्ज कराई थी, लेकिन अब इस जमीन को फिर से घेरने की कोशिश है।
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कुछ लोगों ने जमीन को मिनजुमला की बताते हुए इसके हस्तांतरण की मांग करते हुए आवेदन किया है। मामले में फाइल एडीएम संदीप कुमार के समक्ष गई तो उन्होंने मौके पर लेखपाल व पालिका के कर्मचारी भेजकर जांच कराई। साथ ही जांच के लिए फाइल को तहसील भेज दिया।
बता दें कि सरकारी दस्तावेजों में मिनजुमला ऐसे खसरा नंबरों को कहते हैं, जिनमें कई लोगों के नाम दर्ज होते हैं, लेकिन उनके अधिकार क्षेत्र की दिशा का उल्लेख नहीं होता है। इसी का लाभ उठाकर पूर्व में इस प्रकार के खेल अधिकारियों व कर्मचारियों ने मिलकर किए हैं। इसी के आधार पर अब इस जमीन में भी खेल के प्रयास के आरोप हैं। पूर्व जिलाधिकारी ने तो मामले में जांच के आदेश भी दिए थे।
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पूर्व में इस मामले में कोतवाली में रिपोर्ट दर्ज हो चुकी है। मामले में फाइल को जांच के लिए तहसील भेजा गया है। वहां से प्राप्त रिपोर्ट के आधार पर आगे की कार्रवाई होगी। सरकारी जमीन को इस प्रकार से किसी अन्य को लेने नहीं देंगे। - संदीप कुमार- एडीएम
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चितौली मार्ग पर पालिका की सरकारी पाइप लाइन की जमीन है। वर्तमान में इस जमीन की कीमत करोड़ों में है। उसकी वजह यह है कि इस भूमि के पीछे की जमीन पर कुछ लोग कालोनी काटने के लिए प्रयासरत हैं और अवैध कालोनी को जाने के लिए मात्र यही से एक रास्ता जा सकता है। यही कारण है कि इस जमीन को कब्जाने के करीब एक साल से प्रयास चल रहे हैं।
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पूर्व में इस मामले में कोतवाली में रिपोर्ट भी दर्ज हुई थी। उस समय भी पालिका अधिकारियों व कर्मचारियों ने जमीन पर अवैध कब्जा और तार बंदी को तोड़ने के मामले में शिकायतों व एडीएम के हस्तक्षेप के बाद रिपोर्ट दर्ज कराई थी, लेकिन अब इस जमीन को फिर से घेरने की कोशिश है।
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कुछ लोगों ने जमीन को मिनजुमला की बताते हुए इसके हस्तांतरण की मांग करते हुए आवेदन किया है। मामले में फाइल एडीएम संदीप कुमार के समक्ष गई तो उन्होंने मौके पर लेखपाल व पालिका के कर्मचारी भेजकर जांच कराई। साथ ही जांच के लिए फाइल को तहसील भेज दिया।
बता दें कि सरकारी दस्तावेजों में मिनजुमला ऐसे खसरा नंबरों को कहते हैं, जिनमें कई लोगों के नाम दर्ज होते हैं, लेकिन उनके अधिकार क्षेत्र की दिशा का उल्लेख नहीं होता है। इसी का लाभ उठाकर पूर्व में इस प्रकार के खेल अधिकारियों व कर्मचारियों ने मिलकर किए हैं। इसी के आधार पर अब इस जमीन में भी खेल के प्रयास के आरोप हैं। पूर्व जिलाधिकारी ने तो मामले में जांच के आदेश भी दिए थे।
पूर्व में इस मामले में कोतवाली में रिपोर्ट दर्ज हो चुकी है। मामले में फाइल को जांच के लिए तहसील भेजा गया है। वहां से प्राप्त रिपोर्ट के आधार पर आगे की कार्रवाई होगी। सरकारी जमीन को इस प्रकार से किसी अन्य को लेने नहीं देंगे। - संदीप कुमार- एडीएम