{"_id":"68ac92eefe28b1f44c0ab17e","slug":"23-tendor-canceled-in-palika-hapur-news-c-135-1-hpr1005-129218-2025-08-25","type":"story","status":"publish","title_hn":"Hapur News: नगर पालिका में विकास कार्यों के 23 टेंडर निरस्त","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Hapur News: नगर पालिका में विकास कार्यों के 23 टेंडर निरस्त
Mon, 25 Aug 2025 10:14 PM IST
गाजियाबाद ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, हापुड़
संवाद न्यूज एजेंसी, हापुड़
Updated Mon, 25 Aug 2025 10:14 PM IST
विज्ञापन
हापुड़। नगर पालिका में 15 वें वित्त आयोग से होने वाले 23 विकास कार्यों के टेंडर निरस्त किए गए हैं। टेंडर डालने वाली फर्म के अधूरे दस्तावेज होने पर इन्हें निरस्त करने का आधार बनाया गया है।
पालिका को 15 वें वित्त आयोग से मिली धनराशि के बाद पिछले दिनों टेंडर निकाले गए थे। टेंडर प्रक्रिया में 23 विकास कार्य शामिल थे। डीएम अभिषेक पांडेय ने सभासदों के साथ बैठक कर प्राथमिकता के आधार पर इन निर्माण कार्यों को चिह्नित किया था। इसके बाद टेंडर प्रक्रिया शुरू हुई तो कुछ ठेकेदारों ने टेंडरों को मैनेज करने के आरोप लगाए। अब पालिका के अधिकारियों ने अधूरे दस्तावेज बताते हुए पुरानी टेंडर प्रक्रिया को निरस्त कर दिया है और फिर से नए टेंडर निकाले हैं। टेंडर निरस्त होने के कारण विकास कार्यों को शुरू होने में काफी समय लगेगा।
पालिका के टेंडरों में चल रहा खेल--
विभागीय सूत्रों के अनुसार, जिन ठेकेदारों के टेंडर अधूरे दस्तावेज पर निरस्त किए गए हैं, वह पूर्व में भी कई टेंडर लेकर काम कर रहे हैं। ऐसा नहीं है कि इन ठेकेदारों को पालिका के नियम नहीं पता है। दरअसल, यह कार्य 15 वें वित्त आयोग से मिली धनराशि से होने हैं। 15 वें वित्त के कार्यों के लिए जिलाधिकारी से अनुमति लेनी पड़ती है। जबकि राज्य वित्त के कार्यों में ऐसा नहीं होता है। डीएम की नजरों में टेंडरों में होने वाला खेल उजागर न हो जाए, इससे पहले ही अधूरे दस्तावेज के आधार पर पूर्व में डाली गई निविदाएं निरस्त कर दी गई हैं।
विज्ञापन
हर टेंडर में डल रही तीन निविदाएं
पालिका के निर्माण विभाग के टेंडरों को ध्यान से देखा जाए तो अधिकारी किसी टेंडर के लिए तीन निविदा कम से कम होने के नियम को जरूर पूरा कर रहे हैं। इसमें बड़ी बात यह है कि लगभग प्रत्येक टेंडर में तीन ही निविदाएं आ रही हैं। ऐसे में ठेकेदारों को मैनेज कर टेंडर डालने की शिकायतें बार-बार हो रही हैं। पिछले दिनों तो अधिकारियों ने एक फर्म को काली सूची में डालकर टेंडर निरस्त कर दिए थे। इस मामले में ठेकेदार ने गंभीर आरोप लगाते हुए डीएम से शिकायत भी की थी।
-- --
इन महत्वपूर्ण कार्यों के निकाले गए टेंडर--
⦁
39.14 लाख से मोदीनगर रोड पर फ्लाई ओवर के नीचे दस्तोई रोड मोड़ तक आरसीसी नाला।
⦁
39.66 लाख से आदर्शनगर गली नंबर-4 में नाली व सड़कें।
⦁
39.43 लाख से मोदीनगर रोड पर फ्लाईओवर के नीचे दस्तोई रोड मोड़ के पास मेडिकल के आसपास आरसीसी नाला।
⦁
29.58 लाख से मोहल्ला रफीकनगर में नाली व इंटरलॉकिंग।
⦁
37.94 लाख से मोहल्ला करीमपुरा में नाली व सड़क।
⦁
26.29 लाख से ईदगाह रोड पर कई नाली व सड़कों का निर्माण।
⦁
38.91 लाख से कमेला रोड पर एमएस गार्डन से एमआरएफ सेंटर की ओर आरसीसी नाला।
⦁
39.92 लाख से मोहल्ला शक्तिनगर में गलियों में नाली का निर्माण।
⦁
50 लाख से ऑपरेशन कायाकल्प के अंतर्गत नगर पालिका सीमा में आने वाले बेसिक स्कूलों के जीर्णोद्धार का कार्य।
कोट -
नियमों का पालन और दस्तावेजों को पूरा करने पर ही पालिका द्वारा टेंडर दिया जा सकता है। जिन ठेकेदारों के दस्तावेज अधूरे थे, उनके टेंडर निरस्त करते हुए पुन: निविदाएं निकाली गई हैं। नियम के विरुद्ध किसी को टेंडर नहीं दिया जाता है। - संजय कुमार मिश्रा, अधिशासी अधिकारी
विज्ञापन
पालिका को 15 वें वित्त आयोग से मिली धनराशि के बाद पिछले दिनों टेंडर निकाले गए थे। टेंडर प्रक्रिया में 23 विकास कार्य शामिल थे। डीएम अभिषेक पांडेय ने सभासदों के साथ बैठक कर प्राथमिकता के आधार पर इन निर्माण कार्यों को चिह्नित किया था। इसके बाद टेंडर प्रक्रिया शुरू हुई तो कुछ ठेकेदारों ने टेंडरों को मैनेज करने के आरोप लगाए। अब पालिका के अधिकारियों ने अधूरे दस्तावेज बताते हुए पुरानी टेंडर प्रक्रिया को निरस्त कर दिया है और फिर से नए टेंडर निकाले हैं। टेंडर निरस्त होने के कारण विकास कार्यों को शुरू होने में काफी समय लगेगा।
विज्ञापन
पालिका के टेंडरों में चल रहा खेल
विभागीय सूत्रों के अनुसार, जिन ठेकेदारों के टेंडर अधूरे दस्तावेज पर निरस्त किए गए हैं, वह पूर्व में भी कई टेंडर लेकर काम कर रहे हैं। ऐसा नहीं है कि इन ठेकेदारों को पालिका के नियम नहीं पता है। दरअसल, यह कार्य 15 वें वित्त आयोग से मिली धनराशि से होने हैं। 15 वें वित्त के कार्यों के लिए जिलाधिकारी से अनुमति लेनी पड़ती है। जबकि राज्य वित्त के कार्यों में ऐसा नहीं होता है। डीएम की नजरों में टेंडरों में होने वाला खेल उजागर न हो जाए, इससे पहले ही अधूरे दस्तावेज के आधार पर पूर्व में डाली गई निविदाएं निरस्त कर दी गई हैं।
विज्ञापन
हर टेंडर में डल रही तीन निविदाएं
पालिका के निर्माण विभाग के टेंडरों को ध्यान से देखा जाए तो अधिकारी किसी टेंडर के लिए तीन निविदा कम से कम होने के नियम को जरूर पूरा कर रहे हैं। इसमें बड़ी बात यह है कि लगभग प्रत्येक टेंडर में तीन ही निविदाएं आ रही हैं। ऐसे में ठेकेदारों को मैनेज कर टेंडर डालने की शिकायतें बार-बार हो रही हैं। पिछले दिनों तो अधिकारियों ने एक फर्म को काली सूची में डालकर टेंडर निरस्त कर दिए थे। इस मामले में ठेकेदार ने गंभीर आरोप लगाते हुए डीएम से शिकायत भी की थी।
इन महत्वपूर्ण कार्यों के निकाले गए टेंडर
⦁
39.14 लाख से मोदीनगर रोड पर फ्लाई ओवर के नीचे दस्तोई रोड मोड़ तक आरसीसी नाला।
⦁
39.66 लाख से आदर्शनगर गली नंबर-4 में नाली व सड़कें।
⦁
39.43 लाख से मोदीनगर रोड पर फ्लाईओवर के नीचे दस्तोई रोड मोड़ के पास मेडिकल के आसपास आरसीसी नाला।
⦁
29.58 लाख से मोहल्ला रफीकनगर में नाली व इंटरलॉकिंग।
⦁
37.94 लाख से मोहल्ला करीमपुरा में नाली व सड़क।
⦁
26.29 लाख से ईदगाह रोड पर कई नाली व सड़कों का निर्माण।
⦁
38.91 लाख से कमेला रोड पर एमएस गार्डन से एमआरएफ सेंटर की ओर आरसीसी नाला।
⦁
39.92 लाख से मोहल्ला शक्तिनगर में गलियों में नाली का निर्माण।
⦁
50 लाख से ऑपरेशन कायाकल्प के अंतर्गत नगर पालिका सीमा में आने वाले बेसिक स्कूलों के जीर्णोद्धार का कार्य।
कोट -
नियमों का पालन और दस्तावेजों को पूरा करने पर ही पालिका द्वारा टेंडर दिया जा सकता है। जिन ठेकेदारों के दस्तावेज अधूरे थे, उनके टेंडर निरस्त करते हुए पुन: निविदाएं निकाली गई हैं। नियम के विरुद्ध किसी को टेंडर नहीं दिया जाता है। - संजय कुमार मिश्रा, अधिशासी अधिकारी