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Hamirpur News: नवरात्र से पहले ग्रामीणों ने साफ किया मंदिर का रास्ता
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बिवांर (हमीरपुर)। बांधुर बुजुर्ग गांव की सीमा पर चिलेहंटा जंगल के बीच स्थित करीब सौ वर्ष पुराना देवी मंदिर रास्ते के अभाव में जर्जर हालत में पहुंच गया है। मंदिर तक पहुंचने का मार्ग न होने से श्रद्धालु नियमित दर्शन-पूजन के लिए नहीं पहुंच पा रहे हैं। इससे मंदिर की देखरेख भी प्रभावित हो रही है।
नवरात्र पर्व को देखते हुए ग्रामीणों ने मंदिर तक जाने वाले रास्ते को दुरुस्त करने का बीड़ा उठाया है। ग्रामीण कुल्हाड़ी और फावड़े लेकर रास्ते में उगी झाड़ियों को काटने के साथ ही उसकी सफाई और मरम्मत में जुटे हैं। बीते एक सप्ताह से ग्रामीण श्रमदान कर मार्ग को आवागमन योग्य बनाने में लगे हैं, ताकि नवरात्र में मंदिर आने वाले श्रद्धालुओं को परेशानी न हो।
बांधुर बुजुर्ग निवासी उपेंद्र द्विवेदी उर्फ लाला पंडित ने बताया कि मंदिर करीब सौ वर्ष पुराना और सिद्धपीठ है। यहां मन्नत मांगने के बाद कई भक्तों की मनोकामनाएं पूरी हुई हैं। जंगल के बीच स्थित होने के कारण मंदिर परिसर में शांत और भक्तिमय वातावरण रहता है। यह मंदिर गांव के लोगों की आस्था का प्रमुख केंद्र रहा है, लेकिन उचित रास्ता न होने से पिछले कुछ वर्षों में श्रद्धालुओं का आवागमन कम हो गया। इससे मंदिर जर्जर हालत में पहुंच गया है।
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रास्ते की सफाई और मरम्मत में रामेश्वर पाल, अमरनाथ द्विवेदी, रामकिशन साहू, बाउवा प्रजापति, ऋषि सिंह, अजय यादव, अन्नू, ओपेन्द्र सिंह, विष्णु, दुर्गा, लाला पंडित और तुला भारती समेत अन्य ग्रामीण सहयोग कर रहे हैं। ग्रामीणों ने प्रशासन से मंदिर तक पक्का मार्ग बनवाने की मांग की है।
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नवरात्र पर्व को देखते हुए ग्रामीणों ने मंदिर तक जाने वाले रास्ते को दुरुस्त करने का बीड़ा उठाया है। ग्रामीण कुल्हाड़ी और फावड़े लेकर रास्ते में उगी झाड़ियों को काटने के साथ ही उसकी सफाई और मरम्मत में जुटे हैं। बीते एक सप्ताह से ग्रामीण श्रमदान कर मार्ग को आवागमन योग्य बनाने में लगे हैं, ताकि नवरात्र में मंदिर आने वाले श्रद्धालुओं को परेशानी न हो।
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बांधुर बुजुर्ग निवासी उपेंद्र द्विवेदी उर्फ लाला पंडित ने बताया कि मंदिर करीब सौ वर्ष पुराना और सिद्धपीठ है। यहां मन्नत मांगने के बाद कई भक्तों की मनोकामनाएं पूरी हुई हैं। जंगल के बीच स्थित होने के कारण मंदिर परिसर में शांत और भक्तिमय वातावरण रहता है। यह मंदिर गांव के लोगों की आस्था का प्रमुख केंद्र रहा है, लेकिन उचित रास्ता न होने से पिछले कुछ वर्षों में श्रद्धालुओं का आवागमन कम हो गया। इससे मंदिर जर्जर हालत में पहुंच गया है।
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रास्ते की सफाई और मरम्मत में रामेश्वर पाल, अमरनाथ द्विवेदी, रामकिशन साहू, बाउवा प्रजापति, ऋषि सिंह, अजय यादव, अन्नू, ओपेन्द्र सिंह, विष्णु, दुर्गा, लाला पंडित और तुला भारती समेत अन्य ग्रामीण सहयोग कर रहे हैं। ग्रामीणों ने प्रशासन से मंदिर तक पक्का मार्ग बनवाने की मांग की है।