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Hamirpur News: सचिवों के हड़ताल पर जाने से खाद वितरण प्रभावित
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फोटो 23 एचएएमपी 31- कुरारा की सहकारी समिति में लटक रहा ताला। संवाद
- फोटो : पांच किलोमीटर साइकिल दौड़ में सपना ने मारी बाजी
- पीसीएफ केंद्र में मिल रही प्रति किसान दो बोरी खाद
संवाद न्यूज एजेंसी
कुरारा (हमीरपुर)। कस्बा व ग्रामीण क्षेत्र में सहकारी समितियों के सचिवों के हड़ताल पर जाने से खाद वितरण व्यवस्था प्रभावित हो गई है। स्थिति यह है कि केवल पीसीएफ केंद्र खुला है। जहां सीमित मात्रा में खाद मिलने से किसानों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
पीसीएफ केंद्र पर 600 बोरी खाद आई थी। इसके लिए 300 किसानों को टोकन दिए गए हैं। वहीं अन्य किसानों को दो-दो बोरी के हिसाब से खाद वितरित की जा रही है। किसानों का कहना है कि जरूरत के मुताबिक खाद नहीं मिलने से उनकी समस्या बढ़ गई है।
जल्ला गांव के किसान मानस प्रताप और कामता प्रसाद ने बताया कि उन्हें पांच-पांच बोरी खाद की जरूरत है, लेकिन केंद्र से केवल दो-दो बोरी ही दी जा रही हैं। ऐसे में खेती के लिए उनकी जरूरत पूरी नहीं हो पा रही है। किसानों ने बताया कि उन्हें मजबूरी में निजी दुकानदारों से खाद खरीदनी पड़ रही है। आरोप है कि निजी दुकानों पर खाद की एक बोरी 1,650 से 1,700 रुपये तक में मिल रही है। इससे किसानों की जेब पर अतिरिक्त बोझ पड़ रहा है।
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संवाद न्यूज एजेंसी
कुरारा (हमीरपुर)। कस्बा व ग्रामीण क्षेत्र में सहकारी समितियों के सचिवों के हड़ताल पर जाने से खाद वितरण व्यवस्था प्रभावित हो गई है। स्थिति यह है कि केवल पीसीएफ केंद्र खुला है। जहां सीमित मात्रा में खाद मिलने से किसानों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
पीसीएफ केंद्र पर 600 बोरी खाद आई थी। इसके लिए 300 किसानों को टोकन दिए गए हैं। वहीं अन्य किसानों को दो-दो बोरी के हिसाब से खाद वितरित की जा रही है। किसानों का कहना है कि जरूरत के मुताबिक खाद नहीं मिलने से उनकी समस्या बढ़ गई है।
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जल्ला गांव के किसान मानस प्रताप और कामता प्रसाद ने बताया कि उन्हें पांच-पांच बोरी खाद की जरूरत है, लेकिन केंद्र से केवल दो-दो बोरी ही दी जा रही हैं। ऐसे में खेती के लिए उनकी जरूरत पूरी नहीं हो पा रही है। किसानों ने बताया कि उन्हें मजबूरी में निजी दुकानदारों से खाद खरीदनी पड़ रही है। आरोप है कि निजी दुकानों पर खाद की एक बोरी 1,650 से 1,700 रुपये तक में मिल रही है। इससे किसानों की जेब पर अतिरिक्त बोझ पड़ रहा है।
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