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सूखे मौदहा बांध में उफनाया पानी
ब्यूरो, अमर उजाला/हमीरपुर
Updated Tue, 14 Jul 2015 12:24 AM IST
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जिले के किसानों के लिए राहत भरी खबर है। पिछले माह गेटों की मरम्मत को
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लेकर पानी निकाले जाने से डेड हो चुके मौदहा बांध में अच्छी खासी बरसात
होने से जलस्तर 140.40 मिलियन क्यूसेक मीटर पहुंच चुका है। इसके चलते अब
किसानों को खरीफ व रबी की फसलों को भरपूर पानी मिल सकेगा। देखा जाए तो जिला
मुख्यालय में जहां अभी तक मात्र 59 एमएम वर्षा हुई है वहीं बांध क्षेत्र
में 197 एमएम वर्षा हो चुकी है। फिलहाल मौदहा डेम को अभी 7.40 एमसीएम पानी
की और जरूरत है।
मौदहा बांध का निर्माण 1976-77 में शुरू हुआ। जबकि लोकार्पण 1999 में जून माह में हुआ। डेम में 200 मिलियन क्यूसिक पानी भरने की क्षमता है। इस बांध का नाम बदलकर ब्रह्मानंद बांध कर दिया गया है।
वर्ष 2004 से नहरों पर बांध से पानी छोड़ना शुरू किया गया है। बांध में कुल 11 गेट हैं। जिसमें 12 वाई 8.40 मीटर का एक गेट है। जिनकी मरम्मत बीते दस वर्षों से नहीं हुई है।
बीते जून माह की शुरूआत में आईआईटी रुड़की के विशेषज्ञों की टीम बांध का निरीक्षण किया। टीम ने शासन को भेजी रिपोर्ट में कहा कि बांध के गेट मरम्मत योग्य हैं।
यदि बाढ़ के दौरान गेट नहीं खुले तो भारी जनहानि की आशंका हो सकती है। जिसको लेकर शासन स्तर पर हुई उच्चाधिकारियों की बैठक में बांध के फाटकों की मरम्मत कराने का फैसला लिया गया।
इसके चलते बांध में मौजूद 60 मिलियन क्यूसेक मीटर पानी में 40 मिलियन क्यूसेक मीटर पानी धीरे-धीरे नहरों और विरमा नदी में छोड़ दिया। फिलहाल बांध में डेड स्टोरेज 21 एमसीएम है।
वहीं करीब एक माह से खाली पड़े बांध में 197 एमएम वर्षा होने से बांध का जलस्तर बढ़कर 140.40 एमसीएम हो चुका है। बांध में पानी की क्षमता अधिकतम 147.80 एमसीएम है।
फिलहाल डेम क्षेत्र में हुई भारी वर्षा का लाभ किसानों को सिंचाई करने में मिलेगा। अधिशाषी अभियंता मौदहा बांध एसके पांडेय ने बताया कि आईटीआई रुड़की के विशेषज्ञों ने डैम के डैमेज फाटकों की मरम्मत कराना जरूरी कर दिया।
इस कार्य को कानपुर की गंगा बैराज मैकेनिकल टीम ने काम पूरा कर दिया। इधर बांध क्षेत्र में 197 एमएम वर्षा होने से खाली पड़े बांध में 140.40 एमसीएम पानी भर चुका है। अभी तो बरसात की शुरूआत है, कुछ दिनों में डैम पूरी तरह से लबालब हो जाएगा।
मौदहा बांध का निर्माण 1976-77 में शुरू हुआ। जबकि लोकार्पण 1999 में जून माह में हुआ। डेम में 200 मिलियन क्यूसिक पानी भरने की क्षमता है। इस बांध का नाम बदलकर ब्रह्मानंद बांध कर दिया गया है।
वर्ष 2004 से नहरों पर बांध से पानी छोड़ना शुरू किया गया है। बांध में कुल 11 गेट हैं। जिसमें 12 वाई 8.40 मीटर का एक गेट है। जिनकी मरम्मत बीते दस वर्षों से नहीं हुई है।
बीते जून माह की शुरूआत में आईआईटी रुड़की के विशेषज्ञों की टीम बांध का निरीक्षण किया। टीम ने शासन को भेजी रिपोर्ट में कहा कि बांध के गेट मरम्मत योग्य हैं।
यदि बाढ़ के दौरान गेट नहीं खुले तो भारी जनहानि की आशंका हो सकती है। जिसको लेकर शासन स्तर पर हुई उच्चाधिकारियों की बैठक में बांध के फाटकों की मरम्मत कराने का फैसला लिया गया।
इसके चलते बांध में मौजूद 60 मिलियन क्यूसेक मीटर पानी में 40 मिलियन क्यूसेक मीटर पानी धीरे-धीरे नहरों और विरमा नदी में छोड़ दिया। फिलहाल बांध में डेड स्टोरेज 21 एमसीएम है।
वहीं करीब एक माह से खाली पड़े बांध में 197 एमएम वर्षा होने से बांध का जलस्तर बढ़कर 140.40 एमसीएम हो चुका है। बांध में पानी की क्षमता अधिकतम 147.80 एमसीएम है।
फिलहाल डेम क्षेत्र में हुई भारी वर्षा का लाभ किसानों को सिंचाई करने में मिलेगा। अधिशाषी अभियंता मौदहा बांध एसके पांडेय ने बताया कि आईटीआई रुड़की के विशेषज्ञों ने डैम के डैमेज फाटकों की मरम्मत कराना जरूरी कर दिया।
इस कार्य को कानपुर की गंगा बैराज मैकेनिकल टीम ने काम पूरा कर दिया। इधर बांध क्षेत्र में 197 एमएम वर्षा होने से खाली पड़े बांध में 140.40 एमसीएम पानी भर चुका है। अभी तो बरसात की शुरूआत है, कुछ दिनों में डैम पूरी तरह से लबालब हो जाएगा।