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खरवार, गोंड और नायक के एसटी प्रमाणपत्रों की होगी जांच : बृजलाल
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खरवार, गोंड और नायक के एसटी प्रमाणपत्रों की होगी जांच : बृजलाल
गोरखपुर। प्रदेश के अनुसूचित जाति-जनजाति आयोग के अध्यक्ष व पूर्व डीजीपी बृजलाल ने कहा कि खरवार, गोंड और नायक जाति के अनुसूचित जनजाति के प्रमाणपत्रों की जांच की जाएगी। इसके लिए आयोग ने सूबे के सभी डीएम को निर्देश दिया है। उन्होंने कहा कि असल गोंड, खरवार जातियां मिर्जापुर की पहाड़ियाें, सोनभद्र एवं उसके आस-पास के जिलों में रहने वाली हैं। मगर देवरिया, कुशीनगर, महराजगंज, सिद्धार्थनगर, बलिया, गाजीपुर आदि कई जिलों के पिछड़ी जाति के लोगों ने भी गोंड, खरवार और नायक के अनुसूचित जनजाति के प्रमाणपत्र बनवाकर असल अनुसूचित जनजाति का हक हड़पा है। कई तो इन सर्टिफिकेट के दम पर नौकरी भी पा गए। बताया कि हाल ही में बीएचयू में ऐसे ही प्रमाणपत्र पर नौकरी करते एक असिस्टेंट प्रोफेसर को पकड़ा गया। उन पर कार्रवाई चल रही है।
सर्किट हाउस में मंगलवार को पत्रकार वार्ता के दौरान आयोग के अध्यक्ष ने कहा कि प्रदेश के सभी डीएम को निर्देश दिया गया है कि वे अनुसूचित जाति-जनजाति के प्रमाणपत्राें की जांच, परिवार रजिस्टर, जमीन से जुड़े सरकारी दस्तावेजों के अलावा उनके ससुराल, ननिहाल तक जाकर सच का पता लगाएं। मालूम करें कि उनकी उत्पत्ति कहां से हुई। उनकी सभ्यता-संस्कृति अनुसूचित जनजाति जैसी है कि नहीं। आयोग के अध्यक्ष ने आरोप लगाया कि सपा और बसपा सरकार में पिछड़ी जातियों ने फर्जी तरीके से अनुसूचित जाति, जनजाति के प्रमाणपत्र बनवा लिए।
उन्होंने कहा कि प्रदेश और केंद्र की भाजपा सरकार अनुसूचित जाति और जनजाति की सच्ची हितैषी है। केंद्र सरकार ने एससी-एसटी एक्ट में 25 और अपराध जोड़े हैं। 14 जून 2016 के बाद किसी भी घटना में एससी-एसटी की हत्या या मृत्यु होने पर उन्हें आर्थिक मदद के साथ ही संबंधित की पत्नी को हर माह पांच हजार रुपये पेंशन की व्यवस्था की गई है। यही नहीं पीड़ित परिवार के बच्चों को स्नातक तक निशुल्क शिक्षा और घटना के तीन महीने तक पूरे परिवार का खर्च सरकार उठाएगी। एक सवाल के जवाब में उन्होंने कहा कि एससी-एसटी के विवाद को लेकर प्रतापगढ़, रायबरेली, अमेठी, गोंडा आदि कुछ जिले संवेदनशील हैं। इससे पूर्व उन्होंने डीएम, एसएसपी और आईजी के साथ हुई समीक्षा बैठक में निर्देश दिया कि सभी एससी-एसटी को उनका हक समय से दिया जाए और किसी भी फरियादी को कोई तकलीफ न हो।
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सिर्फ एफआईआर दर्ज होने से कोई मुजरिम नहीं हो जाता
आयोग के अध्यक्ष बृजलाल ने स्वीकार किया एससी-एसटी एक्ट का दुरुपयोग हो रहा है। कहा कि सिर्फ एससी-एसटी का मुकदमा दर्ज होने से कोई मुजरिम नहीं हो जाता। मुकदमा दर्ज करना एक्ट की एक प्रक्रिया है, पुलिस की जांच के बाद संलिप्तता पाए जाने पर ही किसी की गिरफ्तारी करें। उन्होंने बताया कि सभी पुलिस अफसरों को इस संबंध में कड़े निर्देश दिए गए हैं। मथुरा में हुई एक घटना का जिक्र करते हुए कहा कि हाल ही में वहां एक महिला के छह साल बेटे की हत्या कर दी गई थी। उस मामले में सामान्य जाति के पांच लोगों को तमाम धाराओं समेत एससी-एसटी एक्ट के तहत भी नामजद किया गया था। बाद में जब जांच हुई तो पता चला कि महिला के देवर ने ही उसके बेटे की हत्या की थी। पांचों पर से एससी-एसटी एक्ट आदि का मुकदमा हटाने के साथ ही संबंधित महिला को दी गई आर्थिक मदद भी वापस ली गई।
अब ‘रसूखदारों’ के इशारे पर नहीं चलेंगे ‘मोहरे’
एससी-एसटी आयोग के अध्यक्ष ने कहा कि सीट आरक्षित होने पर तमाम जिलों में कई रसूखदारों ने अपने यहां काम करने वाले एससी-एसटी के व्यक्ति को अपने मोहरे के तौर पर नगर पालिका अध्यक्ष, जिला पंचायत अध्यक्ष, प्रधान आदि बनवा दिया। अब किसी ने भी अनुसूचित जाति-जनजाति के किसी जनप्रतिनिधि को काम करने से रोका तो उस पर भी एससी-एसटी एक्ट के तहत कार्रवाई होगी।
23 फीसदी एससी-एसटी के थानाध्यक्ष तैनात करने होंगे
बृजलाल ने कहा कि हर जिले में 23 फीसदी थानाध्यक्ष एससी-एसटी के तैनात करने के निर्देश हैं, लेकिन अभी प्रदेश में इसका औसत 17 फीसदी ही है। पिछली सरकारों में यह और कम था। एक सवाल के जवाब में उन्होंने कहा कि समीक्षा के दौरान यहां के आईजी जय नारायण सिंह ने बताया कि गोरखपुर रेंज में ही दो-तीन जिलों को छोड़कर बाकी में 23 फीसदी एससी-एसटी वर्ग के थानाध्यक्ष नहीं तैनात हो सके हैं। गोरखपुर जिले में भी पूरी तैनाती नहीं हो सकी है। आयोग के अध्यक्ष ने बताया कि इस संबंधा में डीजीपी को निर्देश दिए गए हैं। जल्द ही सभी जिलों के थानों में 23 फीसदी थानाध्यक्ष एससी-एसटी वर्ग के तैनात किए जाएंगे।
मुसहर व वनटांगिया को लेकर सरकार संजीदा
एससी-एसटी आयोग के अध्यक्ष ने कहा कि कुशीनगर समेत प्रदेश के कुछ जिलोें में मुसहर और वनटांगिया की संख्या अधिक है। वास्तव में ये जातियां जरूरतमंद हैं और सरकार इन्हें लेकर संजीदा भी है। इनकी मदद के लिए कई योजनाएं लाई गई हैं। खुद मुख्यमंत्री इनके विकास को लेकर प्रयासरत हैं।
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गोरखपुर। प्रदेश के अनुसूचित जाति-जनजाति आयोग के अध्यक्ष व पूर्व डीजीपी बृजलाल ने कहा कि खरवार, गोंड और नायक जाति के अनुसूचित जनजाति के प्रमाणपत्रों की जांच की जाएगी। इसके लिए आयोग ने सूबे के सभी डीएम को निर्देश दिया है। उन्होंने कहा कि असल गोंड, खरवार जातियां मिर्जापुर की पहाड़ियाें, सोनभद्र एवं उसके आस-पास के जिलों में रहने वाली हैं। मगर देवरिया, कुशीनगर, महराजगंज, सिद्धार्थनगर, बलिया, गाजीपुर आदि कई जिलों के पिछड़ी जाति के लोगों ने भी गोंड, खरवार और नायक के अनुसूचित जनजाति के प्रमाणपत्र बनवाकर असल अनुसूचित जनजाति का हक हड़पा है। कई तो इन सर्टिफिकेट के दम पर नौकरी भी पा गए। बताया कि हाल ही में बीएचयू में ऐसे ही प्रमाणपत्र पर नौकरी करते एक असिस्टेंट प्रोफेसर को पकड़ा गया। उन पर कार्रवाई चल रही है।
सर्किट हाउस में मंगलवार को पत्रकार वार्ता के दौरान आयोग के अध्यक्ष ने कहा कि प्रदेश के सभी डीएम को निर्देश दिया गया है कि वे अनुसूचित जाति-जनजाति के प्रमाणपत्राें की जांच, परिवार रजिस्टर, जमीन से जुड़े सरकारी दस्तावेजों के अलावा उनके ससुराल, ननिहाल तक जाकर सच का पता लगाएं। मालूम करें कि उनकी उत्पत्ति कहां से हुई। उनकी सभ्यता-संस्कृति अनुसूचित जनजाति जैसी है कि नहीं। आयोग के अध्यक्ष ने आरोप लगाया कि सपा और बसपा सरकार में पिछड़ी जातियों ने फर्जी तरीके से अनुसूचित जाति, जनजाति के प्रमाणपत्र बनवा लिए।
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उन्होंने कहा कि प्रदेश और केंद्र की भाजपा सरकार अनुसूचित जाति और जनजाति की सच्ची हितैषी है। केंद्र सरकार ने एससी-एसटी एक्ट में 25 और अपराध जोड़े हैं। 14 जून 2016 के बाद किसी भी घटना में एससी-एसटी की हत्या या मृत्यु होने पर उन्हें आर्थिक मदद के साथ ही संबंधित की पत्नी को हर माह पांच हजार रुपये पेंशन की व्यवस्था की गई है। यही नहीं पीड़ित परिवार के बच्चों को स्नातक तक निशुल्क शिक्षा और घटना के तीन महीने तक पूरे परिवार का खर्च सरकार उठाएगी। एक सवाल के जवाब में उन्होंने कहा कि एससी-एसटी के विवाद को लेकर प्रतापगढ़, रायबरेली, अमेठी, गोंडा आदि कुछ जिले संवेदनशील हैं। इससे पूर्व उन्होंने डीएम, एसएसपी और आईजी के साथ हुई समीक्षा बैठक में निर्देश दिया कि सभी एससी-एसटी को उनका हक समय से दिया जाए और किसी भी फरियादी को कोई तकलीफ न हो।
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सिर्फ एफआईआर दर्ज होने से कोई मुजरिम नहीं हो जाता
आयोग के अध्यक्ष बृजलाल ने स्वीकार किया एससी-एसटी एक्ट का दुरुपयोग हो रहा है। कहा कि सिर्फ एससी-एसटी का मुकदमा दर्ज होने से कोई मुजरिम नहीं हो जाता। मुकदमा दर्ज करना एक्ट की एक प्रक्रिया है, पुलिस की जांच के बाद संलिप्तता पाए जाने पर ही किसी की गिरफ्तारी करें। उन्होंने बताया कि सभी पुलिस अफसरों को इस संबंध में कड़े निर्देश दिए गए हैं। मथुरा में हुई एक घटना का जिक्र करते हुए कहा कि हाल ही में वहां एक महिला के छह साल बेटे की हत्या कर दी गई थी। उस मामले में सामान्य जाति के पांच लोगों को तमाम धाराओं समेत एससी-एसटी एक्ट के तहत भी नामजद किया गया था। बाद में जब जांच हुई तो पता चला कि महिला के देवर ने ही उसके बेटे की हत्या की थी। पांचों पर से एससी-एसटी एक्ट आदि का मुकदमा हटाने के साथ ही संबंधित महिला को दी गई आर्थिक मदद भी वापस ली गई।
अब ‘रसूखदारों’ के इशारे पर नहीं चलेंगे ‘मोहरे’
एससी-एसटी आयोग के अध्यक्ष ने कहा कि सीट आरक्षित होने पर तमाम जिलों में कई रसूखदारों ने अपने यहां काम करने वाले एससी-एसटी के व्यक्ति को अपने मोहरे के तौर पर नगर पालिका अध्यक्ष, जिला पंचायत अध्यक्ष, प्रधान आदि बनवा दिया। अब किसी ने भी अनुसूचित जाति-जनजाति के किसी जनप्रतिनिधि को काम करने से रोका तो उस पर भी एससी-एसटी एक्ट के तहत कार्रवाई होगी।
23 फीसदी एससी-एसटी के थानाध्यक्ष तैनात करने होंगे
बृजलाल ने कहा कि हर जिले में 23 फीसदी थानाध्यक्ष एससी-एसटी के तैनात करने के निर्देश हैं, लेकिन अभी प्रदेश में इसका औसत 17 फीसदी ही है। पिछली सरकारों में यह और कम था। एक सवाल के जवाब में उन्होंने कहा कि समीक्षा के दौरान यहां के आईजी जय नारायण सिंह ने बताया कि गोरखपुर रेंज में ही दो-तीन जिलों को छोड़कर बाकी में 23 फीसदी एससी-एसटी वर्ग के थानाध्यक्ष नहीं तैनात हो सके हैं। गोरखपुर जिले में भी पूरी तैनाती नहीं हो सकी है। आयोग के अध्यक्ष ने बताया कि इस संबंधा में डीजीपी को निर्देश दिए गए हैं। जल्द ही सभी जिलों के थानों में 23 फीसदी थानाध्यक्ष एससी-एसटी वर्ग के तैनात किए जाएंगे।
मुसहर व वनटांगिया को लेकर सरकार संजीदा
एससी-एसटी आयोग के अध्यक्ष ने कहा कि कुशीनगर समेत प्रदेश के कुछ जिलोें में मुसहर और वनटांगिया की संख्या अधिक है। वास्तव में ये जातियां जरूरतमंद हैं और सरकार इन्हें लेकर संजीदा भी है। इनकी मदद के लिए कई योजनाएं लाई गई हैं। खुद मुख्यमंत्री इनके विकास को लेकर प्रयासरत हैं।